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West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में खेला होबे या दीदी बनेंगी धुरंधर, आखिर किधर जा रहा इस बार का चुनाव?

Thu, 09 Apr 2026 09:24 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Thu, 09 Apr 2026 09:24 PM IST
सार

पश्चिम बंगाल में दो चरण में चुनाव होने हैं। इसके लिए राजनीतिक दलों ने कमर कस ली है। हालांकि, मुख्य मुकाबला सत्तासीन तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भाजपा के बीच होना तय माना जा रहा है। ऐसे में इस मुकाबले में दोनों दलों के मुख्य चेहरे ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी आमने-सामने हैं, साथ ही टक्कर में होंगे इन दोनों दलों के नारे। 

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West Bengal Assembly Election 2026 Mamata Banerjee Suvendu Adhikari Khela Hobe vs Double Engine Slogan BJP TMC
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा सांसद सुवेंदु अधिकारी - फोटो : ANI

विस्तार

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में सबसे दिलचस्प मुकाबला पश्चिम बंगाल में चल रहा है। भाजपा ने तृणमूल से आए सुवेंदु अधिकारी को भावी मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर न केवल पेश किया है, बल्कि सुवेंदु की रणनीति पर ही तृणमूल की ममता बनर्जी को मात देने की तैयारी कर रखी है। हालांकि दीदी (ममता बनर्जी) हैं कि हिम्मत नहीं हारतीं।

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वरिष्ठ पत्रकार शांतनु बनर्जी कहते हैं कि 2021 के चुनाव में तृममूल का ‘खेला होबे’ का नारा मशहूर हुआ था। असल की खेला होबे की तस्वीर इस बार बन रही है। इस बार तृणमूल ने बाजी मारी तो ममता बनर्जी धुरंधर (आइरन लेडी) बन जाएंगी। शांतनु कहते हैं कि अभी कुछ कहना मुश्किल है क्योंकि पश्चिम बंगाल में ‘डबल इंजन की सरकार’ का कांसेप्ट शहरी मतदाताओं में घर करने लगा है। गांव वाले अभी पत्ते नहीं खोल रहे हैं।

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तृणमूल काडर के सिस्टम पर चुनाव आयोग का प्रहार
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के निर्देश पर प्रमुख सचिव स्तर के आईएएस अधिकारी अनुराग यादव को पर्यवेक्षक पद से हटा दिया गया। मुख्य चुनाव आयुक्त लगातार पश्चिम बंगाल में भय रहित और निष्पक्ष चुनाव कराने का दावा कर रहे हैं। राज्य में अभूतपूर्व पैमाने पर अर्ध सैनिक बल तैनात हैं। मालदा हिंसा मामले में उच्चतम न्यायालय ने राज्य के डीजीपी और मुख्य सचिव को फटकार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने मालदा हिंसा मामले की जांच राष्ट्रीय जांच ऐजेंसी को सौंप दी है। इधर चुनाव आयोग ने भी डीजीपी से लेकर जिलों के कप्तान और थानों के प्रभारी के स्तर पर बड़ा बदलाव कर दिया है। राज्य के मुख्य सचिव से लेकर ब्लॉक और निचले स्तर तक के अधिकारियों का बड़े पैमाने पर स्थानांतरण हुआ है।  

ममता बनर्जी लड़ेंगी लड़ाई
मतदाता सूची पुनरीक्षण में राज्य के 91 लाख मतदाताओं के नाम कटे हैं। यह संख्या कुल मतदाताओं का 11 प्रतिशत से अधिक है। ममता बनर्जी इसे चुनाव आयोग की मनमानी बताती हैं। उनका कहना है कि वह मतदाताओं के नाम काटे जाने की लड़ाई आगे लड़ेंगी। वह मतदाताओं के बीच में कहती हैं कि 32 लाख मतदाताओं का नाम उनकी बदौलत ही मतदाता सूची में शामिल हो पाया है। वह इसे न्याय की जीत बताती हैं।

राज्य के 60 लाख मतदाताओं के नाम पर लटकी तलवार को देखते हुए ममता बनर्जी खुद वकील के रूप में उच्चतम न्यायालय में दलील देने तक आ गई थीं। यही कारण है कि जिनके नाम मतदाता सूची में नहीं हैं, वह ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के साथ काफी संख्या में जुड़े हैं।  बात क्षेत्रवार करें तो चुनाव आयोग के आंकड़े के आनुसार 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को थोक में नाम कटने वाले 5 जिलों से बड़ी संख्या में सीटें मिली थी। इन जिलों की 114 से अधिक सीटों में से ममता बनर्जी की पार्टी की पार्टी के 91 से अधिक विधायक जीते थे।  

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अग्निमित्रा पॉल का दावा जनता बदलाव चाहती है
भाजपा की महिला नेत्री अग्निमित्रा पॉल ने अमर उजाला से कहा कि इस बार पश्चिम बंगाल की तस्वीर बदलेगी। पॉल को यह भरोसा दो बड़े कारणों से हो रहा है। पहला भरोसा चुनाव आयोग के निष्पक्ष चुनाव कराने की प्रतिबद्धता पर है। दूसरा भरोसा राज्य की जनता के ममता बनर्जी की सरकार के भ्रष्टाचार, राज्य में बेरोजगारी, तानाशाही और खराब विकास के मॉडल से ऊब जाने का है।   

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