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West Bengal: अस्पताल से नहीं मिली एंबुलेंस, रेलवे स्टेशन पर महिला ने तोड़ा दम; जानें क्या है मामला
Fri, 21 Apr 2023 04:11 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्वेता महतो
Updated Fri, 21 Apr 2023 04:11 PM IST
सार
इस घटना ने स्थानीय लोगों में आक्रोश उत्पन्न कर दिया। वे सभी अस्पताल के अधिकारियों पर लापरवाही और उदासीनता का आरोप लगाया है।
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Bhatar Railway Station
- फोटो : Social Media
विस्तार
पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले के रेलवे स्टेशन पर अस्पताल द्वारा एंबुलेंस उपलब्ध न कराने के कारण औरत की मौत हो गई। यह घटना भातार रेलवे स्टेशन की है, जहां 50 वर्षीय मानेका कोड़ा और उनके पति Dसीत बर्धमान जाने के लिए ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। मानेका को बर्धमान के अस्पताल में इलाज के लिए रेफर किया गया था।
महिला की मौत के बाद पुलिस ने बताया- "अपने पति के साथ काचीगोरिया गांव में दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करते हुए मानेका कोड़ा को लू लग गई थी। उनके पति उन्हें भातार अस्पताल ले गए थे। वहां उन्हें सलाइन की दो बोतल चढ़ाई गई और फिर उन्हें बर्धमान मेडिकल कॉलेज और अस्पताल रेफर कर दिया गया था।"
उन्होंने आगे कहा- अस्पताल के अधिकारियों ने उन्हें एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई और उनके पति को एक निजी वाहन में बर्धमान ले जाने के लिए कहा था। इसके लिए उनके पास ज्यादा पैसे नहीं थे और अन्य कोई विकल्प न होने की वजह से असित कोड़ा ने अपनी पत्नी को ट्रेन से ही बर्धमान ले जाने का फैसला किया। मानेका को पहले ई-रिक्शा से रेलवे स्टेशन ले जाया गया और गुरुवार को ट्रेन का इंतजार करने के दौरान एक पेड़ के नीचे ही उसकी मौत हो गई।
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इस घटना ने स्थानीय लोगों में आक्रोश उत्पन्न कर दिया। वे सभी अस्पताल के अधिकारियों पर लापरवाही और उदासीनता का आरोप लगाया है। अस्पताल ने बताया कि एंबुलेंस खराब होने की वजह से उसे मरम्मत के लिए भेजा गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने इस घटना की जांच शुरू कर दी है। यह घटना इसी साल जलपाईगुड़ी में हुए हादसे की याद दिला दी, जहां एक व्यक्ति को अपनी मां का शव ले जाने के लिए तीन हजार रुपये की मांग के बाद कई किलोमीटर तक शव को ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा था।
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महिला की मौत के बाद पुलिस ने बताया- "अपने पति के साथ काचीगोरिया गांव में दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करते हुए मानेका कोड़ा को लू लग गई थी। उनके पति उन्हें भातार अस्पताल ले गए थे। वहां उन्हें सलाइन की दो बोतल चढ़ाई गई और फिर उन्हें बर्धमान मेडिकल कॉलेज और अस्पताल रेफर कर दिया गया था।"
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उन्होंने आगे कहा- अस्पताल के अधिकारियों ने उन्हें एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई और उनके पति को एक निजी वाहन में बर्धमान ले जाने के लिए कहा था। इसके लिए उनके पास ज्यादा पैसे नहीं थे और अन्य कोई विकल्प न होने की वजह से असित कोड़ा ने अपनी पत्नी को ट्रेन से ही बर्धमान ले जाने का फैसला किया। मानेका को पहले ई-रिक्शा से रेलवे स्टेशन ले जाया गया और गुरुवार को ट्रेन का इंतजार करने के दौरान एक पेड़ के नीचे ही उसकी मौत हो गई।
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इस घटना ने स्थानीय लोगों में आक्रोश उत्पन्न कर दिया। वे सभी अस्पताल के अधिकारियों पर लापरवाही और उदासीनता का आरोप लगाया है। अस्पताल ने बताया कि एंबुलेंस खराब होने की वजह से उसे मरम्मत के लिए भेजा गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने इस घटना की जांच शुरू कर दी है। यह घटना इसी साल जलपाईगुड़ी में हुए हादसे की याद दिला दी, जहां एक व्यक्ति को अपनी मां का शव ले जाने के लिए तीन हजार रुपये की मांग के बाद कई किलोमीटर तक शव को ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा था।