Outbreaks Alert: 'आने वाले समय में मंकीपॉक्स, जीका वायरस जैसे और भी खतरे आएंगे'; डॉ. रणदीप गुलेरिया ने चेताया
एएनआई से विशेष बातचीत में डॉ. गुलेरिया ने कहा कि जहां तक टीबी का सवाल है, भारत ज्यादा खतरे वाले देशों में से एक है। इसे लेकर निजी और सरकारी क्षेत्र में बहुत सारे काम किए गए हैं। टीबी के टीकों पर बहुत सारे परीक्षण किए गए हैं। उम्मीद है कि जल्द ही हमारे पास एक टीका होगा। नए और बेहतर उपचार पद्धतियों को खोजने के प्रयास चल रहे हैं। इसलिए सक्रिय रूप से इस पर काम करते रहने की जरूरत है।
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मेदांता में इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनल मेडिसिन रेस्पिरेटरी एंड स्लीप मेडिसिन के चेयरमैन और एम्स के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने गुरुवार को भविष्य के खतरों को लेकर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि जहां तक टीबी का सवाल है, भारत सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से एक है। इसके लिए निजी और सरकारी क्षेत्र में कई कदम उठाए गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में हम मंकीपॉक्स जैसे और भी प्रकोप देखेंगे। जीका वायरस भी चिंता का विषय है। ऐसे में हमें अभी ऐसे खतरों से लड़ने के लिए तैयारी करनी चाहिए।
'नए और बेहतर उपचार पद्धतियों को खोजने के प्रयास चल रहे'
एएनआई से विशेष बातचीत में डॉ. गुलेरिया ने कहा कि जहां तक टीबी का सवाल है, भारत ज्यादा खतरे वाले देशों में से एक है। इसे लेकर निजी और सरकारी क्षेत्र में बहुत सारे काम किए गए हैं। टीबी के टीकों पर बहुत सारे परीक्षण किए गए हैं। उम्मीद है कि जल्द ही हमारे पास एक टीका होगा। नए और बेहतर उपचार पद्धतियों को खोजने के प्रयास चल रहे हैं। इसलिए सक्रिय रूप से इस पर काम करते रहने की जरूरत है। खासकर टीबी की दवा को लेकर तो बहुत ही सक्रियता से काम करने की जरूरत है। इसलिए अगर हम ड्रग-प्रतिरोधी टीबी के लिए छह महीने या उससे कम समय तक चलने वाले उपचार तैयार कर सकते हैं तो यह बेहतर होगा।
'24 वर्षों में हमने बड़ी संख्या में प्रकोप देखे'
हाल के दिनों में वायरस जनित प्रकोपों पर बोलते हुए डॉ. गुलेरिया ने कहा कि इस सदी के पिछले 24 वर्षों में हमने बड़ी संख्या में प्रकोप देखे हैं। इनमें सार्स, कोरोना जैसी दो महामारियां और एच1एन1 शामिल हैं। हमारे पास मंकीपॉक्स और जीका वायरस जैसे अन्य प्रकोप हैं। ये सभी जानवरों या पक्षियों की प्रजातियों के वायरस हैं। अब ये मनुष्यों में आने लगे हैं। इसलिए यह समझने की जरूरत है कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण को हो रहे नुकसान की वजह से हम इस तरह के और अधिक प्रकोप देखने जा रहे हैं।
'मामलों की सक्रिय निगरानी जरूरी'
उन्होंने इस बात पर दिया कि तैयारी की जरूरत है। ऐसे मामलों की सक्रिय निगरानी जरूरी है। तभी इससे बचने के उपाय तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमें इसके लिए तैयार रहना होगा। ऐसा करने के लिए हमें सक्रिय निगरानी की आवश्यकता है। ताकि हम किसी भी प्रकोप या किसी भी असामान्य घटना को पहले ही पहचान सकें और उस पर काबू पा सकें। हमने ऐसा तब किया था, जब केरल में निपाह वायरस का प्रकोप हुआ था। हमें इसे राष्ट्रीय स्तर पर करना चाहिए। हमारे पास इस पर काबू पाने, इसे खत्म करने और इसे ठीक करने के लिए काम करने वाली एक टीम तैयार है। निश्चित रूप से इन नए संक्रमणों के लिए दवा से लेकर टीकों तक के अनुसंधान पर बहुत अधिक ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
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