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ये है विश्नोई समाज जो पेड़ों को बचाने के लिए कटा देता है सिर: अशोक विश्नोई

Sat, 01 Sep 2018 03:52 PM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 01 Sep 2018 03:52 PM IST
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Vishnoi society can chop their heads to save the trees: Ashok Vishnoi
प्रतीकात्मक तस्वीर
पूरी दुनिया के इतिहास में ऐसी मिसाल कहीं देखने को नहीं मिलती जहां पेड़ों को बचाने के लिए सैकड़ों लोगों ने हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहूति दे दी हो। लेकिन राजस्थान के विश्नोई समाज ने ऐसा ही अद्भुत इतिहास साल 1730 में रचा था जिसके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। खुशी की बात यह है कि विश्नोई समाज अपनी उस महान परंपरा को जीवित रखने के लिए और अपने बच्चों में वही संस्कार देने के लिए आज भी उतना ही सजग है। 
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दिल्ली के हंसराज कॉलेज में शुक्रवार को विश्नोई समाज ने अपनी उसी परंपरा को याद करने के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमें सैकड़ों की संख्या में विश्नोई समाज के लोगों ने भाग लिया और वृक्षारोपण किया। कार्यक्रम में बोलते हुए विशिष्ट अतिथि आईआरएस अधिकारी अशोक विश्नोई ने कहा कि आज जब पूरी दुनिया में प्राकृतिक असंतुलन गड़बड़ा रहा है; बाढ़, सूखा और वायुप्रदूषण से मानव सभ्यता खतरे में पड़ती दिख रही है, लोग पर्यावरण बचाने की बात कर रहे हैं।
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अपनी हर छोटी-बड़ी जरुरत के लिए झटके में पेड़ों को काट गिराने वाले लोगों के बीच शायद ही कोई ऐसा हो जो इन जीवनदायी पेड़ों को बचाए रखने के लिए अपना जीवन न्योछावर करने को तैयार हो। लेकिन विश्नोई समाज ने दुनिया के सामने ऐसा अद्भुत कार्य करके दिखलाया था। 
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उन्होंने कहा कि इंसान के लिए वृक्ष सबसे पहली प्राथमिकता में आना चाहिए क्योंकि आज सभी यह मानते हैं कि अगर मानव सभ्यता को बचाना है तो सबसे पहले पेड़ों को बचाना होगा। क्योंकि अगर पेड़ बचे रहेंगे तो न तो बाढ़ का संकट आएगा और न ही सूखे का। धरती का तापमान भी संतुलित रहेगा और प्रदूषण से भी मुक्ति मिलेगी। लोगों को भोजन भी मिलेगा और छाया भी। इसलिए आज वृक्षारोपण और उन्हें बचाना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे काफी सजग हैं। उन्हें अपने इतिहास और परंपरा की जानकारी देते रहनी होगी जिससे यह महान परंपरा आगे बढ़ती रहे। 

 
हंसराज कॉलेज एल्यूमनी एसोसिएशन के अध्यक्ष महेंद्र गोयल ने कहा कि आज पूरी दुनिया को यह सीख दिए जाने की जरुरत है कि वृक्षों के बिना हमारा जीवन संभव नहीं है।
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