कानपुर गोलीकांड के आठवें दिन ढेर हुआ विकास दुबे, ये है गैंगस्टर के आठ दिनों की कहानी
हालांकि उसे पहले ही पुलिस की टीम के आने की सूचना मिल गई थी। इसके बाद वो और उसका गैंग पूरी तरह से तैयार थे। उन्होंने पुलिसकर्मियों पर गोलियों की बौछार कर दी। इसके बाद वो अपने साथियों के साथ मौके से फरार हो गया। यह घटना उत्तर प्रदेश में अपने तरह की पहली घटना थी। इससे योगी आदित्यनाथ सरकार और राज्य पुलिस के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।
घटना के चार घंटे बाद ही पुलिस ने तीन जुलाई को विकास के मामा प्रेम प्रकाश पांडे और उसके चचेरे भाई अतुल दुबे को मुठभेड़ में मार गिराया। घटना के एक दिन बाद पुलिस ने दुबे के बिकरू गांव में स्थित घर को ढहा दिया। घर के अंदर मौजूद उसके दो वाहनों और ट्रैक्टर को भी तोड़ दिया। इस कार्रवाई पर पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने सवाल उठाए। वहीं ब्राह्मण समुदाय से परिवार को समर्थन मिला।
यह भी पढ़ें- Vikas Dubey Encounter: आठ दिन, छह एनकाउंटर और विकास दुबे की गैंग खल्लास!!
थाना प्रभारी विनय तिवारी और निरीक्षक केके शर्मा को गैंगस्टर के साथ उनकी बातचीत की पुष्टि के बाद निलंबित कर दिया गया। दोनों को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया गया। जैसे-जैसे जांच में प्रगति होती गई। विकास दुबे के राजनीतिक संपर्कों ने खूब सुर्खियां बटोरीं। इसके बाद राजनेताओं के साथ उसकी तस्वीरें सामने आने लगीं। जिससे सत्ता और विपक्ष के लोग असहज हो गए।
जांच में पता चला कि विकास ने रियल एस्टेट, शराब और ठेके के कारोबार के जरिए धन और संपत्ति अर्जित की थी। इसी बीच राजनीतिक पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने लगीं। वहीं एसटीएफ ने उसके राइट हैंड कहे जाने वाले अमर दुबे और करीबी साथी बउवा दुबे और प्रभात मिश्रा को मुठभेड़ में मार गिराया।
यह भी पढ़ें- विकास दुबे के साथियों की पुलिस मुठभेड़ में मौत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर
प्रभात मिश्रा को फरीदाबाद में जिस जगह से गिरफ्तार किया गया था उसके आस-पास विकास दुबे को देखा गया था, जो वहां से भागने में कामयाब रहा। राज्य पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स की पचास टीमों ने उसके सभी ठिकानों पर छापा मारा और गैंगस्टर पर दबाव बनाने के लिए उसके रिश्तेदारों को पकड़ लिया।
राज्य की सीमाओं को सील कर दिया गया और राजमार्गों पर उसकी काफी खोज की गई। जबकि विकास दो दिनों तक कानपुर में एक रिश्तेदार के घर पर ठहरा हुआ था।cइसके बाद वह किसी तरह फरीदाबाद पहुंचने में कामयाब रहा। जहां एक होटल के सीसीटीवी कैमरे में वह कैद हो गया।
यह भी पढ़ें- Vikas Dubey Kanpur Gangster: महाकाल मंदिर से विकास दुबे गिरफ्तार, गार्ड लखन यादव ने की गैंगस्टर की पहचान
हालांकि पुलिस के पहुंचने से पहले ही वह वहां से फरार हो गया। पुलिस जहां लगातार उसे पकड़ने की कोशिश कर रही थी वहीं गैंगस्टर चुपके से मध्यप्रदेश पहुंच गया। वह गुरुवार सुबह उज्जैन स्थित महाकाल के मंदिर पहुंचा। यहां उसने अपनी पहचान उजागर की और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
मध्यप्रदेश पुलिस ने विकास की गिरफ्तारी का श्रेय लिया और उसे गुरुवार रात को यूपी एसटीएफ को सौंप दिया। उसे जब कानपुर लाया जा रहा था तब रास्ते में उसकी एसयूवी पलट गई। उसने भागने की कोशिश की और पुलिस की गोलियों का शिकार हो गया। इसके साथ ही आठ दिनों में विकास की कहानी हमेशा के लिए खत्म हो गई।