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Venkaiah Naidu :'कभी-कभी संसद भी कैसे काम करती है?' मानसून सत्र में हंगामे पर सभापति ने जताई चिंता, कही यह बात

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sat, 30 Jul 2022 06:46 PM IST
सार

नायडू ने कहा कि छात्रों को उनकी दूसरी सलाह अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने की है। उन्होंने कहा कि 'मैंने सांसदों से भी इसका पालन करने को कहा है। क्योंकि, आप सभी जानते हैं कि संसद में कई बार क्या हो रहा है। संसद चल रही है, लेकिन यह कभी-कभी कैसे काम करती है, यह एक चिंताजनक तथ्य है।

उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू
उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू - फोटो : Twitter
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विस्तार

हैदराबाद पब्लिक स्कूल के स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल होने पहुंचे उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने शनिवार को संसद के काम करने के तरीके पर चिंता व्यक्त की है। हैदराबाद के रामंतपुर में स्कूल के स्वर्ण जयंती समारोह का उद्घाटन करने के बाद अपने संबोधन के दौरान नायडू ने छात्रों के साथ जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव पर भी चर्चा की। उन्होंने बच्चों को प्रकृति से प्यार करने और जीने की सलाह दी।



संसद को लेकर जताई चिंता
संबोधन के दौरान, जलवायु परिवर्तन और उसके प्रतिकूल प्रभाव पर बोलते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि कुछ भी कहने से पहले मेरी पहली सलाह है कि प्यार करें और प्रकृति के साथ रहें। उन्होंने चल रहे मानसून सत्र के दौरान वर्चुअल वाशआउट की पृष्ठभूमि के खिलाफ हंगामे पर चिंता जाहिर की। नायडू ने कहा कि छात्रों को उनकी दूसरी सलाह अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने की है। उन्होंने कहा कि 'मैंने सांसदों से भी इसका पालन करने को कहा है।  क्योंकि, आप सभी जानते हैं कि संसद में कई बार क्या हो रहा है। संसद चल रही है, लेकिन यह कभी-कभी कैसे काम करती है, यह एक चिंताजनक तथ्य है।'


नई शिक्षा नीति का भी किया जिक्र
नायडू ने अपने भाषण में नई शिक्षा नीति (एनईपी) का भी जिक्र किया। उन्होंने एनईपी को सही दिशा में एक सही कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस नीति को सभी को लागू करना चाहिए। मुझे बहुत खुशी है कि नई शिक्षा नीति सही दिशा में एक सही कदम है।  उन्होंने कहा कि यह बहुत उपयोगी है।  इसे एक समान भावना से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विदेशियों ने देश को लूटा, धोखा दिया और बर्बाद किया।
हमें अपनी जड़ों की ओर फिर लौटना होगा

नायडू ने कहा कि किसी जमाने में भारत दुनिया का सबसे अमीर देश था और वह 'विश्व गुरु' था। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के छात्र प्राचीन भारत में नालंदा, तक्षशिला और विक्रमशिला जैसे महान संस्थानों में पढ़ते थे। औपनिवेशिक शासन के आगमन के साथ, देश ने अपने मानकों को खो दिया है। उन्होंने कहा, "हमें फिर से जड़ों की ओर जाना होगा और यह देखना होगा कि हमारे शैक्षणिक संस्थान उत्कृष्टता के केंद्र बनें।"

भारत ने कभी किसी देश पर हमला नहीं किया और उपनिवेशवाद में विश्वास नहीं किया। उन्होंने कहा, हम साथ रहने में विश्वास करते हैं।  इस दौरान उपराष्ट्रपति नायडू ने मातृभाषा पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों की प्राथमिक शिक्षा उनकी मातृभाषा में होनी चाहिए। कोई भी अंग्रेजी सहित कई अन्य भाषाएं सीख सकता है, लेकिन मातृभाषा को नहीं भूलना चाहिए।

उन्होंने राष्ट्रपति, खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के मुख्य न्यायाधीश एन वी रमना का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई नहीं की। उन्होंने छात्रों को शारीरिक रूप से फिट, अनुशासित, उच्च लक्ष्य रखने और अपने सपनों को साकार करने के लिए कड़ी मेहनत करने की भी सलाह दी। 

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