{"_id":"680e1588c41220e76c01f850","slug":"vice-president-jagdeep-dhankhar-said-time-to-move-from-food-security-to-farmer-prosperity-2025-04-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"TNAU: 'खाद्य सुरक्षा से किसान समृद्धि की ओर बढ़ने का समय'; धनखड़ का कृषि उद्यमिता को और बढ़ावा देने पर जोर","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
TNAU: 'खाद्य सुरक्षा से किसान समृद्धि की ओर बढ़ने का समय'; धनखड़ का कृषि उद्यमिता को और बढ़ावा देने पर जोर
Sun, 27 Apr 2025 05:01 PM IST
शिव शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: शिव शुक्ला
Updated Sun, 27 Apr 2025 05:01 PM IST
सार
टीएनएयू में 'विकसित भारत के लिए कृषि-शिक्षा, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देना' विषय पर बोलते हुए उपराष्ट्रपति ने कृषि उद्यमिता को और भी ज्यादा बढ़ावा दिए जाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश में ऐसे 6,000 स्टार्टअप हैं, लेकिन 1.4 बिलियन की आबादी वाले देश के लिए यह पर्याप्त नहीं है।
विज्ञापन
जगदीप धनखड़, उपराष्ट्रपति
- फोटो : X / @VPIndia
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ इस समय दो दिवसीय तमिलनाडु के दौरे पर हैं। यहां रविवार को वे तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (टीएनएयू) में एक व्याख्यान समारोह में शामिल हुए। इस दौरान धनखड़ ने कहा कि अब किसानों को सिर्फ उत्पादक होने से ऊपर उठना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय कृषि एजेंडे के लिए खाद्य सुरक्षा से किसान समृद्धि की ओर बढ़ने का समय आ गया है। इस कार्यक्रम में राज्यपाल आरएन रवि और टीएनएयू के अधिकारी मौजूद थे।
विज्ञापन
टीएनएयू में 'विकसित भारत के लिए कृषि-शिक्षा, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देना' विषय पर छात्रों और अन्य लोगों को संबोधित करते हुए धनखड़ ने आगे कहा कि भारत में 46 प्रतिशत आबादी कृषि से जुड़ी हुई है बावजूद इसके यह क्षेत्र सकल घरेलू उत्पाद में केवल 16 प्रतिशत का योगदान देता है। ऐसे में टीएनएयू जैसे संस्थानों को कृषि वैज्ञानिक दिवंगत डॉ एम एस स्वामीनाथन की विरासत को आगे बढ़ाना चाहिए, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि हमारे सकल घरेलू उत्पाद में इस क्षेत्र के द्वारा होने वाले योगदान में बढ़ोतरी हो सके।
विज्ञापन
वैश्विक स्तर पर कृषि के क्षेत्र में भारत की स्थिति की बात करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत अब कृषि उत्पादों का बड़ा निर्यातक है। हमारे कुल निर्यात में कृषि खाद्य उत्पादों का हिस्सा 11 प्रतिशत से अधिक है। टीएनएयू में मौजूद लोगों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि लेकिन अब आपको एक नया अध्याय लिखना होगा। अब समय बदल गया है। हमें खाद्य सुरक्षा से किसान समृद्धि की ओर बढ़ना चाहिए। किसान समृद्ध होना चाहिए और यह आपके जैसे संस्थानों से विकसित होना चाहिए। भूमि और प्रयोगशाला के बीच की खाई को पाटा जाना चाहिए। इसके लिए हमारे 730 कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को शिक्षित करने के लिए कार्रवाई के जीवंत केंद्र होने चाहिए।
विज्ञापन
इसके अलावा, नवाचार और शोध पहलों का मूल्यांकन इस आधार पर किया जाना चाहिए कि उनका किसान पर क्या प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा, "केंद्र और राज्य सरकारों के अलावा उद्योग, व्यापार, व्यवसाय और वाणिज्य द्वारा भी शोध को समर्थन दिया जाना चाहिए।
इसे भी पढ़ें- Pahalgam Attack: पहलगाम हमले के पांच दिन बाद कश्मीर पहुंचा ये एक्टर, लोगों से भी की कश्मीर जाने की अपील
अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कृषि उद्यमिता को और भी ज्यादा बढ़ावा दिए जाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश में ऐसे 6,000 स्टार्टअप हैं, लेकिन 1.4 बिलियन की आबादी वाले देश के लिए यह पर्याप्त नहीं है। इस दौरान उन्होंने कृषि विज्ञान में कॉरपोरेट की बड़ी भूमिका का भी आह्वान किया। धनखड़ ने कहा कि मैं उनसे आग्रह करूंगा कि वे अपना लाभ किसानों के साथ साझा करें, किसानों से जुड़ें।
आगे अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने किसानों के लिए केंद्र सरकार द्वारा चलाई गई कई अभिनव योजनाओं की भी बात की। उन्होंने पीएम किसान निधि सम्मान योजना का जिख्र करते हुए रहा कि यह कोई मुफ्त की चीज नहीं है। यह उस क्षेत्र के साथ न्याय कर रही है जो हमारी जीवन रेखा है। यह किसानों को सीधे निधि का हस्तांतरण है। यह सीधे किसानों की मदद कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर भारत को 2047 में 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है तो कृषि को अहम भूमिका निभानी होगी। इसके लिए किसानों की आय में आठ गुना वृद्धि होनी चाहिए। यह हासिल किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे देश एक समय खाद्यान्न की कमी से जूझता था, अमेरिका से गेहूं आयात करता था लेकिन अब आत्मनिर्भर बन रहा है।
इसे भी पढ़ें- कुरुक्षेत्र: तपती रेत में सीमा पर मेधावी छात्रों का शहीदों को नमन, सेना से हुए सम्मानित