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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट में भगोड़े विजय माल्या के खिलाफ अवमानना मामले में सजा पर आज हो सकता है फैसला

Mon, 05 Sep 2022 02:18 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Mon, 05 Sep 2022 02:18 AM IST
सार

विजय माल्या किंगफिशर एयरलाइंस से जुड़े 9,000 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक ऋण चूक मामले में एक अवमानना मामले में दोषी पाया गया है।

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Verdict on sentence in contempt case against fugitive Vijay Mallya in Supreme Court today
विजय माल्या - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट सोमवार को भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के खिलाफ अवमानना के मामले में सजा पर फैसला सुना सकता है। माल्या को किंगफिशर एयरलाइंस से जुड़े 9,000 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक ऋ ण चूक मामले में अवमानना का दोषी पाया गया है। 

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चीफ जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस एस रवींद्र भट की पीठ ने 10 मार्च 2022 को माल्या के खिलाफ अवमानना मामले में सजा पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था और कहा था कि उनके खिलाफ कार्यवाही गतिरोध पर है।
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शीर्ष अदालत ने अवमानना कानून और सजा से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर वरिष्ठ अधिवक्ता और न्याय मित्र जयदीप गुप्ता को सुना था और माल्या के वकील अंकुर सहगल को सजा के पहलू पर अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने का एक आखिरी मौका दिया था।
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पीठ ने अपने आदेश में कहा था कि भले ही वकील अंकुर सहगल ने प्रविष्ठियां पेश करने में असमर्थता व्यक्त की है, फिर भी हम उन्हें 15 मार्च 2022 तक एमिकस क्यूरी को एक अग्रिम प्रति के साथ अपनी प्रविष्ठियां दाखिल करने का एक और अवसर प्रदान करते हैं।

माल्या के वकील ने कहा था कि उनके मुवक्किल जो यूके में हैं, उन्होंने उन्हें कोई निर्देश नहीं दिया था, इसलिए वह सजा की मात्रा पर बहस नहीं कर सकते थे। इस पर पीठ ने कहा था कि हमें बताया गया है कि यूनाइटेड किंगडम (यूके) में कुछ कार्यवाही चल रही है। जिसे हम नहीं जानते, मामलों की संख्या क्या है उसके बारे में भी हम नहीं जानते हैं। मुद्दा यह है कि जहां तक हमारे अधिकार क्षेत्र का सवाल है, हम कब तक इस तरह से आगे बढ़ सकते हैं।   

विजय माल्या ने जमा नहीं कराई कोई राशि
बंगलूरू स्थित ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) के अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि न तो भगोड़े कारोबारी विजय माल्या और न ही फंड हस्तांतरण के लाभार्थियों ने 18 अगस्त तक न्यायाधिकरण को कोई राशि जमा कराई है। माल्या को सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना मामले में चार महीने जेल की सजा सुनाई थी।

शीर्ष अदालत ने 11 जुलाई को अदालत की अवमानना के मामले में चार महीने की सजा सुनाई थी और चार करोड़ अमेरिकी डॉलर (40 मिलियन) उसे व फंड के लाभार्थियों को 8 फीसदी सालाना ब्याज के साथ डीआरटी में जमा कराने के निर्देश दिए थे। ये राशि चार हफ्ते के भीतर जमा करने को कहा गया था। पीठ ने इसके साथ ही केंद्र से भगोड़े कारोबारी की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए कहा था। माल्या 2016 से ब्रिटेन में है।

चीफ जस्टिस उदय उमेश ललित और जस्टिस एस रवींद्र भट की पीठ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्ववाली कंसोर्टियम की ओर से दायर याचिका पर सोमवार को सुनवाई करेगी। शीर्ष अदालत इसके साथ ही गृह मंत्रालय की ओर से मामले की प्रगति पर सौंपे गए पत्रों पर भी गौर करेगी। दरअसल, माल्या ने अदालत की रोक के बावजूद 9 मई, 2017 को अपने बच्चों को चार करोड़ डॉलर हस्तांतरित किए थे। 


शीर्ष अदालत ने पुनरीक्षण याचिका की थी खारिज
शीर्ष अदालत ने माल्या की 2020 में दायर पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी थी। इसमें उसने मई, 2017 के आदेश की समीक्षा की मांग की थी।
माल्या मार्च, 2016 से ब्रिटेन में रह रहा है। वह 18 अप्रैल, 2017 को स्कॉटलैंड यार्ड द्वारा निष्पादित प्रत्यर्पण वारंट पर जमानत पर है।

अपनी करतूतों पर न माफी मांगी और न ही जताया खेद
माल्या के लिए सजा सुनाते हुए पीठ ने कहा था कि उसने अपनी करतूतों के लिए कोई माफी नहीं मांगी और न ही कोई खेद की जताया। कानून की गरिमा को अक्षुण्ण रखने के लिए उचित दंड दिया जाना चाहिए। पीठ ने इसके साथ ही माल्या पर 2000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था।

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