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Hindi News ›   India News ›   Veer Savarkar Shiv Sena Savarkar love decreased as soon as Congress came along did not even find space in mouthpiece Saamana Latest News Update

Veer Savarkar: कांग्रेस के साथ आते ही कम हुआ शिवसेना का सावरकर प्रेम, मुखपत्र सामना में भी नहीं मिली जगह, ट्वीट कर चलाया काम  

Sat, 28 May 2022 05:55 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Sat, 28 May 2022 05:55 PM IST
सार

हमेशा सावरकर के मुद्दे पर दूसरे दलों को घेरने वाले शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने भी सावरकर की जयंती पर एक ट्वीट कर इतिश्री कर ली। वहीं, शिवसेना के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से वीर सावरकर को नमन करते हुए एक पोस्ट शेयर की है।

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Veer Savarkar Shiv Sena Savarkar love decreased as soon as Congress came along did not even find space in mouthpiece Saamana Latest News Update
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे - फोटो : PTI

विस्तार

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विनायक दामोदर सावरकर की कभी कट्टर समर्थक रही शिवसेना, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ महाराष्ट्र में सरकार बनाने के बाद से ही इस मसले पर मुश्किल में है। शनिवार को सावरकर की जयंती से शिवसेना किनारा करते हुए नजर आ रही है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना हिंदी में सावरकर की जयंती पर न ही कोई लेख छापा है न ही अपनी संपादकीय में कोई जिक्र किया है। इसके अलावा हमेशा सावरकर के मुद्दे पर दूसरे दलों को घेरने वाले शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने भी सावरकर की जयंती पर एक ट्वीट कर इतिश्री कर ली। वहीं, शिवसेना के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से वीर सावरकर को नमन करते हुए एक पोस्ट शेयर की है।

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जबकि दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी देश समेत महाराष्ट्र में वीर सावरकर की जयंती जोर शोर से मना रही है। पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर केंद्रीय मंत्री, भाजपा शासित राज्यों के सीएम, सभी प्रदेश अध्यक्ष और संगठन के नेता सावरकर को याद कर उनकी जयंती मना रहे है। इस मौके पीएम ने ट्वीट किया कि मां भारती के कर्मठ सपूत वीर सावरकर को उनकी जयंती पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। प्रधानमंत्री ने सावरकर से जुड़े चित्रों को मिलाकर तैयार की गई एक तस्वीर (फोटो मोंटाज) भी साझा की। इस तस्वीर में एक वॉइस ओवर भी शामिल किया गया है, जिसमें मोदी और पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी सावरकर की खूबियों और योगदान के बारे में बता रहे हैं।
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वहीं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी ट्वीट कर सावरकर को श्रद्धांजलि अर्पित की है। अमित शाह ने कहा कि वीर सावरकर जी को एक ही जीवन में मिली दो उम्रकैद व काल कोठरी की अमानवीय यातनाएं भी मां भारती को परम वैभव पर ले जाने के उनके संकल्प को डिगा नहीं पाई। स्वतंत्रता आंदोलन में उनके अद्वितीय योगदान और समाज से अस्पृश्यता को दूर करने के उनके प्रयासों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। जबकि बीजेपी के ट्विटर हैंडल से भी ट्वीट कर एक वीडियो शेयर की। इस ट्वीट में वीडियो भी शेयर किया गया है। वीडियो में पीएम मोदी सावरकर की तस्वीर के सामने हाथ जोड़े देखे जा सकते हैं।
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शिवसेना बाला साहब और सावरकर दोनों को भूली
महाराष्ट्र भाजपा की प्रदेश सचिव और प्रवक्ता श्वेता शालिनी अमर उजाला से चर्चा में कहती है कि आज की शिवसेना हिंदुत्व, बालासाहेब ठाकरे और वीर सावरकर की विचारधारा को पूरी तरह से भूला चुकी है। आज महाराष्ट्र में जो सरकार सत्ता में है वह सम्मानीय बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना नहीं है बल्कि सोनिया सेना है। इसलिए इनको मां भारती के कर्मठ सपूत सावरकर और उनकी विचारधारा को याद रखना बिल्कुल भी शोभा नहीं देता हैं। आज चाहे राजीव गांधी की पुण्यतिथि का कार्यक्रम हो या अन्य कोई कांग्रेस समर्थित व्यक्ति के कार्यक्रम इसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे शामिल होते हैं, लेकिन आज उन्होंने सावरकर की जयंती पर न तो कोई माल्यार्पण किया ना ही कोई कार्यक्रम किया। सत्ता के मोह में सीएम को न तो हिंदुत्व याद है,ना ही ठाकरे याद है, ना ही सावरकर याद है।

अमर उजाला से चर्चा में वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई कहते है कि वीर सावरकर की पुण्यतिथि के मौके पर एक बार फिर शिवसेना के हिंदुत्व की परीक्षा होगी। शिवसेना सरकार में रहते हुए कांग्रेस की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहेगी, इसलिए सावरकर को लेकर शिवसेना का रुख स्पष्ट नहीं है। कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी में कोई वैचारिक समानता नहीं है। लेकिन तीनों पार्टियों के बीच जब महाविकास अघाड़ी गठबंधन बना तब यह तय किया गया था कि सभी दल सरकार को चलाने में परस्पर सहयोग करेंगे। लेकिन राजनीतिक मुद्दों पर दलों का दृष्टिकोण अलग अलग हो सकता है। इसलिए इस गठबंधन में विचारधाराओं से जुड़े मुद्दों को शामिल नहीं किया गया है। आज अगर महाराष्ट्र सरकार वीर सावरकर को लेकर कोई सरकारी कार्यक्रम का आयोजन करती है तो ऐसे में तीनों दलों के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है। इसलिए शिवसेना भी इस तरह के आयोजन से बचती हुई दिखाई देती है और पार्टी स्तर पर कोई आयोजन कर लेती है।


गौरतलब है कि शिवसेना, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के बीच वीर सावरकर के मुद्दे को लेकर मतभेद रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी कई बार सावरकर और संघ पर हमले बोलते रहे है। जबकि शिवसेना हमेशा वीर सावरकर को स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर पेश करती रही है और उनके मुद्दे पर कभी भी समझौता नहीं करने की बात कहती रही है। ऐसी स्थिति में अगर शिवसेना सावरकर को लेकर कुछ सराहनीय कदम उठाती है तो कांग्रेस के साथ फिर टकराव की स्थिति बन सकती है। इस कारण शिवसेना महाराष्ट्र में उनके नाम पर कोई बड़ा कार्यक्रम करने से बचते हुए दिखाई देती है। 

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