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Veer Bal Diwas: पीएम मोदी बोले- देश में कई फर्जी नैरेटिव गढ़े गए, वीर बाल दिवस हमें भारत की पहचान बताएगा
Mon, 26 Dec 2022 03:11 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Mon, 26 Dec 2022 03:11 PM IST
सार
कार्यक्रम में शामिल होने आए युवक ने कहा कि यह हमारे लिए खुशी की बात है कि आजादी के 75 साल बाद ऐसा प्रधानमंत्री आया है, जिसने 'साहिबजादों' की कुर्बानी का सम्मान किया है।
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वीर बाल दिवस कार्यक्रम में पीएम मोदी।
- फोटो : BJP4India/Twitter
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विस्तार
दिल्ली में 'वीर बाल दिवस' के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हिस्सा लिया। कार्यक्रम साहिबजादों की कुर्बानी को समर्पित है। इस मौके पर पीएम मोदी ने वीर साहिबजादों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि मैं अपनी सरकार का सौभाग्य मानता हूं कि उसे आज 26 दिसंबर के दिन को 'वीर बाल दिवस' के तौर पर घोषित करने का मौका मिला।
पीएम ने कहा कि 'वीर बाल दिवस' हमें याद दिलाएगा कि दस गुरुओं का योगदान क्या है, देश के स्वाभिमान के लिए सिख परंपरा का बलिदान क्या है। 'वीर बाल दिवस' हमें बताएगा कि- भारत क्या है, भारत की पहचान क्या है। पीएम मोदी ने भारत के इतिहास में वीरता और पराक्रम का जिक्र करते हुए कहा, "इतिहास से लेकर किंवदंतियों तक, हर क्रूर चेहरे के सामने महानायकों और महानायिकाओं के भी एक से एक महान चरित्र रहे हैं। लेकिन ये भी सच है कि, चमकौर और सरहिंद के युद्ध में जो कुछ हुआ, वो ‘भूतो न भविष्यति' था।
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पीएम मोगी ने मुगलकाल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "एक ओर धार्मिक कट्टरता में अंधी इतनी बड़ी मुगल सल्तनत, दूसरी ओर, ज्ञान और तपस्या में तपे हुए हमारे गुरु, भारत के प्राचीन मानवीय मूल्यों को जीने वाली परंपरा! एक ओर आतंक की पराकाष्ठा, तो दूसरी ओर आध्यात्म का शीर्ष! एक ओर मजहबी उन्माद, तो दूसरी ओर सबमें ईश्वर देखने वाली उदारता! इस सबके बीच, एक ओर लाखों की फौज, और दूसरी ओर अकेले होकर भी निडर खड़े गुरु के वीर साहिबजादे! ये वीर साहिबजादे किसी धमकी से डरे नहीं, किसी के सामने झुके नहीं।
मोदी ने कहा, "उस दौर की कल्पना करिए! औरंगजेब के आतंक के खिलाफ, भारत को बदलने के उसके मंसूबों के खिलाफ, गुरु गोविंद सिंह जी पहाड़ की तरह खड़े थे। लेकिन, जोरावर सिंह साहब और फतेह सिंह साहब जैसे कम उम्र के बालकों से औरंगजेब और उसकी सल्तनत की क्या दुश्मनी हो सकती थी? दो निर्दोष बालकों को दीवार में जिंदा चुनवाने जैसी दरिंदगी क्यों की गई? वो इसलिए, क्योंकि औरंगजेब और उसके लोग गुरु गोविंद सिंह के बच्चों का धर्म तलवार के दम पर बदलना चाहते थे। लेकिन, भारत के वो बेटे, वो वीर बालक, मौत से भी नहीं घबराए। वो दीवार में जिंदा चुन गए, लेकिन उन्होंने उन आततायी मंसूबों को हमेशा के लिए दफन कर दिया। साहिबजादों ने इतना बड़ा बलिदान और त्याग किया, अपना जीवन न्यौछावर कर दिया, लेकिन इतनी बड़ी 'शौर्यगाथा' को भुला दिया गया। लेकिन अब 'नया भारत' दशकों पहले हुई एक पुरानी भूल को सुधार रहा है।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "अगर हमें भारत को भविष्य में सफलता के शिखरों तक लेकर जाना है, तो हमें अतीत के संकुचित नजरियों से भी आज़ाद होना होगा। इसलिए, आजादी के 'अमृतकाल' में देश ने 'गुलामी की मानसिकता से मुक्ति' का प्राण फूंका है। हम आजादी के 'अमृत महोत्सव' में देश के स्वाधीनता संग्राम के इतिहास को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहे हैं। स्वाधीनता सेनानियों, वीरांगनाओं, आदिवासी समाज के योगदान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए हम काम कर रहे हैं।
कार्यक्रम में पहुंचे हजारों लोग
कार्यक्रम में शामिल होने आए युवक ने कहा कि यह हमारे लिए खुशी की बात है कि आजादी के 75 साल बाद ऐसा प्रधानमंत्री आया है, जिसने 'साहिबजादों' की कुर्बानी का सम्मान किया है। कार्यक्रम में एक स्थानीय निवासी ने कहा कि "साहिबजादा बाबा जोरावर सिंह जी और साहिबजादा बाबा फतेह सिंह जी के बलिदान को आज सम्मानित किया जा रहा है। अगले साल से इस दिन छुट्टी घोषित की जानी चाहिए।
इससे पहले मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस दिन को साहिबजादों की कुर्बानी को समर्पित किया। इसे पूरे देश में दिखाया जा रहा है। विभिन्न राज्यों में लोग उनके बारे में जान रहे हैं। इसकी हमें उम्मीद नहीं थी। आज नया इतिहास रचा जा रहा है।
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पीएम ने कहा कि 'वीर बाल दिवस' हमें याद दिलाएगा कि दस गुरुओं का योगदान क्या है, देश के स्वाभिमान के लिए सिख परंपरा का बलिदान क्या है। 'वीर बाल दिवस' हमें बताएगा कि- भारत क्या है, भारत की पहचान क्या है। पीएम मोदी ने भारत के इतिहास में वीरता और पराक्रम का जिक्र करते हुए कहा, "इतिहास से लेकर किंवदंतियों तक, हर क्रूर चेहरे के सामने महानायकों और महानायिकाओं के भी एक से एक महान चरित्र रहे हैं। लेकिन ये भी सच है कि, चमकौर और सरहिंद के युद्ध में जो कुछ हुआ, वो ‘भूतो न भविष्यति' था।
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पीएम मोगी ने मुगलकाल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "एक ओर धार्मिक कट्टरता में अंधी इतनी बड़ी मुगल सल्तनत, दूसरी ओर, ज्ञान और तपस्या में तपे हुए हमारे गुरु, भारत के प्राचीन मानवीय मूल्यों को जीने वाली परंपरा! एक ओर आतंक की पराकाष्ठा, तो दूसरी ओर आध्यात्म का शीर्ष! एक ओर मजहबी उन्माद, तो दूसरी ओर सबमें ईश्वर देखने वाली उदारता! इस सबके बीच, एक ओर लाखों की फौज, और दूसरी ओर अकेले होकर भी निडर खड़े गुरु के वीर साहिबजादे! ये वीर साहिबजादे किसी धमकी से डरे नहीं, किसी के सामने झुके नहीं।
मोदी ने कहा, "उस दौर की कल्पना करिए! औरंगजेब के आतंक के खिलाफ, भारत को बदलने के उसके मंसूबों के खिलाफ, गुरु गोविंद सिंह जी पहाड़ की तरह खड़े थे। लेकिन, जोरावर सिंह साहब और फतेह सिंह साहब जैसे कम उम्र के बालकों से औरंगजेब और उसकी सल्तनत की क्या दुश्मनी हो सकती थी? दो निर्दोष बालकों को दीवार में जिंदा चुनवाने जैसी दरिंदगी क्यों की गई? वो इसलिए, क्योंकि औरंगजेब और उसके लोग गुरु गोविंद सिंह के बच्चों का धर्म तलवार के दम पर बदलना चाहते थे। लेकिन, भारत के वो बेटे, वो वीर बालक, मौत से भी नहीं घबराए। वो दीवार में जिंदा चुन गए, लेकिन उन्होंने उन आततायी मंसूबों को हमेशा के लिए दफन कर दिया। साहिबजादों ने इतना बड़ा बलिदान और त्याग किया, अपना जीवन न्यौछावर कर दिया, लेकिन इतनी बड़ी 'शौर्यगाथा' को भुला दिया गया। लेकिन अब 'नया भारत' दशकों पहले हुई एक पुरानी भूल को सुधार रहा है।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "अगर हमें भारत को भविष्य में सफलता के शिखरों तक लेकर जाना है, तो हमें अतीत के संकुचित नजरियों से भी आज़ाद होना होगा। इसलिए, आजादी के 'अमृतकाल' में देश ने 'गुलामी की मानसिकता से मुक्ति' का प्राण फूंका है। हम आजादी के 'अमृत महोत्सव' में देश के स्वाधीनता संग्राम के इतिहास को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहे हैं। स्वाधीनता सेनानियों, वीरांगनाओं, आदिवासी समाज के योगदान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए हम काम कर रहे हैं।
कार्यक्रम में पहुंचे हजारों लोग
कार्यक्रम में शामिल होने आए युवक ने कहा कि यह हमारे लिए खुशी की बात है कि आजादी के 75 साल बाद ऐसा प्रधानमंत्री आया है, जिसने 'साहिबजादों' की कुर्बानी का सम्मान किया है। कार्यक्रम में एक स्थानीय निवासी ने कहा कि "साहिबजादा बाबा जोरावर सिंह जी और साहिबजादा बाबा फतेह सिंह जी के बलिदान को आज सम्मानित किया जा रहा है। अगले साल से इस दिन छुट्टी घोषित की जानी चाहिए।
इससे पहले मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस दिन को साहिबजादों की कुर्बानी को समर्पित किया। इसे पूरे देश में दिखाया जा रहा है। विभिन्न राज्यों में लोग उनके बारे में जान रहे हैं। इसकी हमें उम्मीद नहीं थी। आज नया इतिहास रचा जा रहा है।