फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Vanilla cultivation and its ecosystem in grave danger due to climate change

खतरा: वनीला की मिठास-खुशबू को भी प्रभावित कर रहा जलवायु परिवर्तन, परागणकर्ता कीटों के बिना अस्तित्व पर संकट

Tue, 15 Jul 2025 06:02 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Tue, 15 Jul 2025 06:02 AM IST
सार

फ्रंटियर्स इन प्लांट साइंस जर्नल में प्रकाशित एक नवीनतम शोध के अनुसार जलवायु परिवर्तन की वजह से वनीला की खेती और उससे जुड़ी पारिस्थितिकी प्रणाली गंभीर खतरे में पड़ चुकी है। वनीला, केसर के बाद दुनिया का दूसरा सबसे महंगा मसाला है। इसे वनीला ऑर्किड नामक पौधे की फलियों से तैयार किया जाता है, जिसकी खेती और परागण अत्यंत नाजुक और श्रमसाध्य प्रक्रिया होती है।

विज्ञापन
Vanilla cultivation and its ecosystem in grave danger due to climate change
जलवायु परिवर्तन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

आइसक्रीम, केक या चॉकलेट की वह भीनी-सी महक और स्वाद, जो हर दावत को खास बना देती है, अब खतरे में है। अगर जलवायु परिवर्तन की रफ्तार नहीं थमी, तो खुशबू की रानी वनीला बहुत जल्द हमारे जीवन से विलुप्त हो सकती है।

विज्ञापन


ये भी पढ़ें: Karnataka: सिद्धारमैया ने PM मोदी को लिखा पत्र, गडकरी के शिवमोगा कार्यक्रम को प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताया
विज्ञापन


फ्रंटियर्स इन प्लांट साइंस जर्नल में प्रकाशित एक नवीनतम शोध के अनुसार जलवायु परिवर्तन की वजह से वनीला की खेती और उससे जुड़ी पारिस्थितिकी प्रणाली गंभीर खतरे में पड़ चुकी है। वनीला, केसर के बाद दुनिया का दूसरा सबसे महंगा मसाला है। इसे वनीला ऑर्किड नामक पौधे की फलियों से तैयार किया जाता है, जिसकी खेती और परागण अत्यंत नाजुक और श्रमसाध्य प्रक्रिया होती है। इसकी उपज पहले से ही अत्यधिक तापमान, जल संकट और नई बीमारियों के कारण प्रभावित हो रही है। प्राकृतिक रूप से वनीला के परागण में मधुमक्खियों और अन्य कीटों की अहम भूमिका होती है। लेकिन बढ़ते तापमान और पर्यावरणीय असंतुलन के कारण इन कीटों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं।  शोध के अनुसार छोटे आकार की मधुमक्खियों के आवास 2050 तक तेजी से घट सकते हैं, जिससे परागण की प्रक्रिया ही बाधित हो सकती है। शोधकर्ता शार्लोट वाट्टेइन के मुताबिक जलवायु परिवर्तन वनीला और उनके परागणकर्ताओं के बीच का प्राकृतिक संतुलन बिगाड़ सकता है, जिससे जंगली प्रजातियों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: ओडिशा में आत्मदाह करने वाली छात्रा का निधन: तीन दिन मौत से लड़ी, यौन उत्पीड़न से परेशान हो खुद को लगाई थी आग

भविष्य का परिदृश्य भयावह
शोध में जलवायु के दो परिदृश्यों एसएसपी 2-4.5 (मध्यम वृद्धि) और एसएसपी 3-7.0 (तेज वृद्धि)  के तहत वनीला की 11 प्रजातियों और 7 प्रमुख परागणकर्ताओं के आवास क्षेत्रों का विश्लेषण किया गया।निष्कर्ष बताते हैं कि कुछ वनीला प्रजातियां 2050 तक अपने आवास क्षेत्र को 140% तक बढ़ा सकती हैं,वहीं दूसरी प्रजातियां 53% तक अपनी उपयुक्त भूमि खो सकती हैं। परागणकर्ता कीटों की स्थिति इससे भी गंभीर है जो उनके पूरे अस्तित्व को ही चुनौती दे सकती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed