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उत्तराखंड: विधायकों की नाराजगी और मंडल का बंटवारा भारी पड़ रहा त्रिवेंद्र सिंह रावत पर

Mon, 08 Mar 2021 06:06 PM IST
Harendra Chaudhary आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली
आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 08 Mar 2021 06:06 PM IST
सार

उत्तराखंड में अगर फेरबदल होता है, तो तीन बड़े नेताओं के नाम चर्चा में सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के सूत्रों के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में कैबिनेट मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक का नाम उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के तौर पर प्रबल दावेदारों में है...

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Uttarakhand raw: Chief Minister Trivendra singh rawat came to Delhi and met BJP President JP Nadda
Uttarakhand Chief Minister Trivendra Singh - फोटो : ANI

विस्तार

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ कई मोर्चों पर घेराबंदी शुरू हो गयी है। इसमें उनके ही अपने विधायकों की नाराजगी से लेकर उत्तराखंड में बनाए गए नए गैरसैंण मंडल की राजनीति और भाजपा की अंदरूनी कलह भी हावी है। चूंकि उत्तराखंड में अगले साल चुनाव हैं। इसलिए भारतीय जनता पार्टी अगले साल होने वाले चुनावों में किसी भी तरीके का कोई जोखिम मोल नहीं लेना चाहती है। ऐसे में पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री को बदलने का दबाव है, वहीं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी बने रहने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं।

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उन्होंने दिल्ली आकर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत पार्टी के कई नेताओं से मुलाकात की। वहीं मुख्यमंत्री बदले जाने की स्थिति में जो नाम मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे हैं उसमें केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, सांसद अनिल बलूनी और उत्तराखंड सरकार में मंत्री सतपाल जी महाराज का नाम शामिल है। भाजपा नेतृत्व की दुविधा है कि पांच राज्यों के जारी चुनावों के बीच उत्तराखंड में नेतृत्व परिवर्तन करना उचित होगा या नहीं। साथ ही चुनाव से महज 10-11 महीने पहले मुख्यमंत्री बदलने से कहीं बात और न बिगड़ जाए।
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भारतीय जनता पार्टी के सूत्रों के मुताबिक कई ऐसे राजनैतिक और प्रशासनिक मामले रहे, जिसे लेकर आलाकमान ने पर्यवेक्षकों को भेजकर जांच कराई। भारतीय जनता पार्टी ने अपना पर्यवेक्षक बनाकर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह और भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और उत्तराखंड के प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम को हालात का जायजा लेने के लिए भेजा था। दोनों नेताओं के दिल्ली आने के बाद अटकलें तेज हो गईं कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत को बदला जाएगा। सोमवार को त्रिवेंद्र सिंह रावत का दिल्ली आना इसी दबाव का नतीजा है।
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भारतीय जनता पार्टी के सूत्रों का कहना है कि भाजपा के एक कद्दावर मंत्री ने गैरसैंण को मंडल बनाए जाने पर आपत्ति दर्ज की। कद्दावर मंत्री गैरसैंण को लगातार उत्तराखंड की राजधानी की मांग करते आ रहे हैं। मुख्यमंत्री के गैरसैंण को मंडल बनाए जाने पर उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। बहुत से राज्य आंदोलनकारियों ने गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थाई राजधानी बनाने की मांग की थी। इसको लेकर बहुत से विधायकों ने भी अपनी नाराजगी दर्ज की। भारतीय जनता पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इसके अलावा कई विधायकों ने आलाकमान से प्रदेश में चल रही अफसरशाही की भी शिकायत की थी।

भाजपा से जुड़े सूत्र बताते हैं कि त्रिवेंद्र रावत का पूरा मंत्रिमंडल ना तैयार करना भी एक बड़ी प्रशासनिक खामी के तौर पर देखा गया। सूत्रों ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी की जो अंदरूनी एक लॉबी थी, उसने लगातार आलाकमान और दूसरे नेताओं को इस बाबत जानकारी देते रहे कि प्रशासनिक मामलों में त्रिवेंद्र सिंह मजबूत नहीं हैं।

नाम तो ये तीन हैं

उत्तराखंड में अगर फेरबदल होता है, तो तीन बड़े नेताओं के नाम चर्चा में सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के सूत्रों के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में कैबिनेट मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक का नाम उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के तौर पर प्रबल दावेदारों में है। इसके अलावा सांसद अनिल बलूनी का नाम भी जोर शोर से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के तौर पर चल रहा है। तीसरा नाम उत्तराखंड सरकार में मंत्री और कद्दावर नेता सतपाल जी महाराज का भी नाम शामिल है।

हालांकि भाजपा सूत्रों का कहना है सतपाल महाराज को मुख्यमंत्री बनाए जाने की उम्मीद बहुत कम है। क्योंकि वह कांग्रेस पार्टी से भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए हैं। चुनावी साल में भारतीय जनता पार्टी ऐसा कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है जिससे उसका अपना मूल वोटर भटक कर इधर-उधर चला जाए।



उत्तराखंड क्रांतिदल के प्रवक्ता देवेंद्र कहते हैं कि गैरसैंण के नाम पर सरकार सिर्फ राजनीति कर रही है। सिर्फ कमिश्नरी बनाकर सरकार ने खानापूर्ति की है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता जोत सिंह बिष्ट ने कहा कि गैरसैंण के सत्र के नाम पर जन भावनाओं की अनेदखी का ऐसा निर्णय लिया गया है, जो धरातल पर उतरेगा भी या नहीं।

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