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Uttarakhand Assembly Election 2022: पीएम मोदी के करीबी धामी की अग्निपरीक्षा, केरल जैसी चूक नहीं चाहेगी कांग्रेस

Sun, 09 Jan 2022 06:07 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Sun, 09 Jan 2022 06:07 AM IST
सार

यह चुनाव पीएम मोदी और धामी दोनों की अग्निपरीक्षा है। वहीं कांग्रेस पार्टी नहीं चाहेगी कि हर चुनाव में नई सरकार चुनने वाले केरल में मात खाने की गलती यहां दोहराए। इसी बीच सियासत में आम आदमी पार्टी के प्रवेश ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। आप के कारण राज्य की कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले के आसार बन रहे हैं।

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Uttarakhand Assembly Election 2022 litmus test for Pushkar Singh Dhami Congress will not want a mistake like Kerala AAP entry will decide multi cornered contest in many seats
पुष्कर सिंह धामी, हरीश रावत और अजय कोठियाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीते चुनाव में मोदी लहर पर सवार भाजपा ने देवभूमि उत्तराखंड में सबसे बड़ी और ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। तब से राज्य की सियासत में बड़ा बदलाव आया है। पांच साल के कार्यकाल में पीएम मोदी के करीबी पुष्कर सिंह धामी तीसरे मुख्यमंत्री बने हैं। यह चुनाव पीएम मोदी और धामी दोनों की अग्निपरीक्षा है।

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अस्तित्व में आने के बाद उत्तराखंड ने हर चुनाव में सत्ता परिवर्तन किया है। मतदाताओं के इस सियासी चरित्र से कांग्रेस को बड़ी उम्मीदें हैं। पार्टी नहीं चाहेगी कि हर चुनाव में नई सरकार चुनने वाले केरल में मात खाने की गलती यहां दोहराए। हालांकि सच्चाई यह है कि राज्य के दोनों ताकतवर दल कांग्रेस और भाजपा अंतर्विरोधों से जूझ रहे हैं। इसी बीच सियासत में आम आदमी पार्टी के प्रवेश ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। आप के कारण राज्य की कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले के आसार बन रहे हैं।
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धामी ही होंगे भाजपा का मुख्य चेहरा
यह चुनाव धामी के लिए अग्निपरीक्षा है। दो मुख्यमंत्रियों की विदाई के बाद पीएम मोदी ने धामी पर विश्वास व्यक्त किया है। केंद्रीय नेतृत्व धामी को राज्य की राजनीति में स्थापित करना चाहता है। बड़े नेताओं के रिटायर होने या केंद्रीय राजनीति में जाने के बाद नेतृत्व ने बहुत सोच समझ कर युवा धामी को सरकार की कमान सौंपी है। उनका कद बढ़ाने के लिए टिकट वितरण में भी उनकी इच्छा का सम्मान करने के संकेत हैं। राज्य में चुनाव प्रचार की कमान पीएम के हाथों में होगी और इस दौरान धामी का कद बढ़ाने के लिए भी पीएम पूरा जोर लगाएंगे।
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पहाड़ की सियासत में तीसरा दावेदार
इस चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के अलावा आप ने भी तीसरा कोण बनकर अपनी दावेदारी पूरी मजबूती से पेश कर दी है। देखना है लुभावने वादों के जरिये आप कितना पहाड़ चढ़ पाती है।

कांग्रेस-भाजपा में अंतर्विरोध
भाजपा और कांग्रेस में जबर्दस्त अंतर्विरोध है। कांग्रेस के सर्वाधिक कद्दावर नेता हरीश रावत ने बगावत का बिगुल बजाया था। फिर भी कांग्रेस ने उन्हें चेहरा नहीं बनाया है। चुनाव से पहले अंतर्विरोध न थमने की स्थिति में कांग्रेस को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसी प्रकार भाजपा में बाहर से आए नेता बगावत का बिगुल बजा रहे हैं। जाहिर तौर पर भाजपा को भी चुनाव से पहले इसे थामना होगा।


आप से मची हलचल
राज्य के चुनाव में कभी बसपा की उपस्थिति सियासी समीकरणों को बदलने में अहम भूमिका निभाया करती थी। इस बार इस भूमिका में आप है। आप ने राज्य की दो दर्जन सीटों को चिह्नित कर अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराने की रणनीति बनाई है। इसके कारण राज्य की कई सीटों में मुकाबला त्रिकोणीय होगा। भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति का लाभ उसे हासिल होगा।

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