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UP: बाल श्रम को लेकर कार्रवाई की तैयारी में योगी सरकार, तैयार कीं संकटग्रस्त बच्चों की सहायता से जुड़ी योजनाएं

Fri, 01 Aug 2025 02:16 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Fri, 01 Aug 2025 02:16 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश सरकार ने लक्ष्य रखा है कि दिसंबर 2026 तक प्रदेश के आठ आकांक्षी जनपदों- बहराइच, बलरामपुर, चंदौली, चित्रकूट, फतेहपुर, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर और सोनभद्र को बाल श्रम से मुक्त कर दिया जाएगा।

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Uttar Pradesh Govt CM Yogi Adityanath Child Labour Women and Child Development Department Rehabilitation Plan
समीक्षा बैठक करते सीएम योगी आदित्यनाथ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य को बाल श्रम से पूरी तरह मुक्त कराने के लिए व्यापक और चरणबद्ध रणनीति तैयार की है। सीएम योगी के नेतृत्व में श्रम विभाग ने इससे जुड़ी राज्य कार्ययोजना तैयार की है और इसके केंद्र में महिला एवं बाल विकास विभाग को रखा गया है, जो न केवल संकटग्रस्त बच्चों की पहचान और सहायता करेगा, बल्कि उनके पुनर्वासन के हर स्तर पर प्रमुख भूमिका निभाएगा।
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प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि दिसंबर 2026 तक प्रदेश के आठ आकांक्षी जनपदों- बहराइच, बलरामपुर, चंदौली, चित्रकूट, फतेहपुर, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर और सोनभद्र को बाल श्रम से मुक्त कर दिया जाएगा। इसके साथ ही कानपुर मंडल और देवीपाटन मंडल में भी विशेष बाल श्रम विरोधी अभियान चलाया जाएगा।
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बाल श्रमिकों के पुनर्वासन में प्रभावी होगी योजनाएं
महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत वन स्टॉप सेंटर, बाल सेवा योजना और स्पॉन्सरशिप योजना जैसी योजनाओं को बाल श्रमिकों के पुनर्वासन में प्रभावी रूप से उपयोग में लाया जाएगा। वन स्टॉप सेंटर के जरिए संकट में फंसे बच्चों को अस्थायी आश्रय देने की योजना तय की गई है। साथ ही इनमें बच्चों की पहचान, स्वास्थ्य जांच, परामर्श और समाज में पुनर्स्थापन की भी व्यवस्था करना तय किया गया है। 
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गौरतलब है कि ‘बाल सेवा योजना’ के तहत अनाथ, परित्यक्त और संकटग्रस्त बच्चों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिससे उनकी शिक्षा और पालन-पोषण बाधित न हो। इस योजना के तहत योगी सरकार ऐसे बच्चों को 2500 रुपये प्रतिमाह उपलब्ध कराती है। इसी प्रकार, स्पॉन्सरशिप योजना के माध्यम से कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों के बच्चों को प्रतिमाह सहयोग राशि दी जाती है, ताकि वे शिक्षा और जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित न रहें।

बाल श्रमिक विद्या योजना का होगा विस्तार
यूपी सरकार ने बाल श्रमिक विद्या योजना का विस्तार अब सभी 75 जिलों में करने की योजना बनाई है। इस योजना के तहत काम में लगे बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ा जाएगा और उन्हें छात्रवृत्ति, पुस्तकें, यूनिफॉर्म और विशेष शिक्षण सहायता प्रदान की जाएगी। शिक्षा विभाग इन बच्चों के पुनः नामांकन और शैक्षिक सहयोग की जिम्मेदारी निभाएगा।


पंचायत स्तर पर कामकाजी बच्चों और प्रवासी श्रमिक परिवारों के बच्चों का विस्तृत डेटा एकत्र किया जाएगा, ताकि कोई भी बच्चा निगरानी से बाहर न रहे। पंचायत सचिव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और स्कूल प्रबंधन समितियां इस कार्य में सहयोग करेंगी। इसके अलावा, बाल श्रम उन्मूलन अभियान को जनांदोलन बनाने के लिए गैर सरकारी संगठनों (NGOs), शैक्षणिक संस्थानों और सिविल सोसाइटी की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।
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