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यूपी बोर्ड परीक्षा पर चुनाव आयोग का ब्रेक, सीईओ-प्रमुख सचिव शिक्षा दिल्ली तलब
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 09 Dec 2016 09:20 AM IST
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निर्वाचन आयोग
- फोटो : PTI
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यूपी बोर्ड के बृहस्पतिवार को दिन मे घोषित परीक्षा कार्यक्रम पर शाम होते-होते चुनाव आयोग ने रोक लगा दी। निर्वाचन आयोग ने सूबे के मुख्य निर्वाचन अधिकारी टी. वेंकटेश, प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा जितेन्द्र कुमार व निदेशक माध्यमिक शिक्षा को दिल्ली तलब किया है। इन अफसरों को शुक्रवार को दिल्ली पहुंचना है।
दरअसल, चुनाव आयोग ने चुनाव वाले पांचों राज्यों को यह निर्देश दिए हैं कि आयोग की अनुमति लेने के बाद ही अपने यहां के बोर्ड परीक्षा कार्यक्रम जारी किए जाएं। इसके बावजूद यूपी बोर्ड ने बृहस्पतिवार को दिन में हाईस्कूल व इंटर का परीक्षा कार्यक्रम जारी कर दिया। इसके तहत हाईस्कूल की परीक्षाएं 16 फरवरी से छह मार्च के बीच आयोजित होनी हैं। जबकि इंटरमीडिएट की परीक्षा 16 फरवरी से 20 मार्च के बीच कराए जाने का कार्यक्रम था।
जब इसकी जानकारी निर्वाचन आयोग को हुई तो उसने इस पर कड़ी नाराजगी जताई। आयोग का कहना है कि विधानसभा चुनाव के मद्देनजर परीक्षा कार्यक्रम उसके परामर्श के बाद ही घोषित होना चाहिए। आयोग ने फिलहाल आज जारी परीक्षा कार्यक्रम को रोकने के निर्देश देते हुए अफसरों को दिल्ली तलब कर लिया माना जा रहा है कि आयोग से विचार-विमर्श के बाद ही बोर्ड के परीक्षा कार्यक्रम जारी होगा।
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पांचों राज्यों में एक साथ होने हैं चुनाव
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर व पंजाब में 2017 में चुनाव होने हैं। इनमें गोवा, मणिपुर व पंजाब में 18 मार्च से पहले चुनाव होने हैं। उत्तराखंड में 26 मार्च से पहले चुनाव कराए जाने हैं। जबकि यूपी में 27 मई से पहले चुनाव होने हैं। चुनाव आयोग 2012 की तरह 2017 में भी एक साथ पांचों राज्यों का चुनाव कराना चाहता है। बोर्ड परीक्षा कार्यक्रम पर रोक के बाद माना जा रहा है कि आयोग जल्द ही चुनाव का एलान कर सकता है।
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दरअसल, चुनाव आयोग ने चुनाव वाले पांचों राज्यों को यह निर्देश दिए हैं कि आयोग की अनुमति लेने के बाद ही अपने यहां के बोर्ड परीक्षा कार्यक्रम जारी किए जाएं। इसके बावजूद यूपी बोर्ड ने बृहस्पतिवार को दिन में हाईस्कूल व इंटर का परीक्षा कार्यक्रम जारी कर दिया। इसके तहत हाईस्कूल की परीक्षाएं 16 फरवरी से छह मार्च के बीच आयोजित होनी हैं। जबकि इंटरमीडिएट की परीक्षा 16 फरवरी से 20 मार्च के बीच कराए जाने का कार्यक्रम था।
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जब इसकी जानकारी निर्वाचन आयोग को हुई तो उसने इस पर कड़ी नाराजगी जताई। आयोग का कहना है कि विधानसभा चुनाव के मद्देनजर परीक्षा कार्यक्रम उसके परामर्श के बाद ही घोषित होना चाहिए। आयोग ने फिलहाल आज जारी परीक्षा कार्यक्रम को रोकने के निर्देश देते हुए अफसरों को दिल्ली तलब कर लिया माना जा रहा है कि आयोग से विचार-विमर्श के बाद ही बोर्ड के परीक्षा कार्यक्रम जारी होगा।
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पांचों राज्यों में एक साथ होने हैं चुनाव
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर व पंजाब में 2017 में चुनाव होने हैं। इनमें गोवा, मणिपुर व पंजाब में 18 मार्च से पहले चुनाव होने हैं। उत्तराखंड में 26 मार्च से पहले चुनाव कराए जाने हैं। जबकि यूपी में 27 मई से पहले चुनाव होने हैं। चुनाव आयोग 2012 की तरह 2017 में भी एक साथ पांचों राज्यों का चुनाव कराना चाहता है। बोर्ड परीक्षा कार्यक्रम पर रोक के बाद माना जा रहा है कि आयोग जल्द ही चुनाव का एलान कर सकता है।
2012 में जनवरी-फरवरी में हो गए थे चुनाव
भारतीय निर्वाचन आयोग
यदि 2012 के विधानसभा चुनाव देखे जाएं तो यह जनवरी व फरवरी में हो गए थे। चार मार्च को वोटों की गिनती भी हो गई थी। उस समय सात चरणों में चुनाव हुए थे। पहले चरण के चुनाव के लिए 12 जनवरी को नोटिफिकेशन होने के साथ ही आठ फरवरी को मतदान हुआ था।
दूसरे चरण का मतदान 11 फरवरी, तीसरे चरण का 15 फरवरी, चौथे चरण का 19 फरवरी , पांचवें चरण का 23 फरवरी, छठे चरण का 28 फरवरी व सातवें चरण का मतदान तीन मार्च को हुआ था। चुनाव आयोग इसी तरह का कार्यक्रम 2017 के चुनाव में भी रखना चाह रहा है। यदि फरवरी व मार्च में बोर्ड परीक्षाएं होंगी तो चुनाव कराने में दिक्कत आ सकती है।
दूसरे चरण का मतदान 11 फरवरी, तीसरे चरण का 15 फरवरी, चौथे चरण का 19 फरवरी , पांचवें चरण का 23 फरवरी, छठे चरण का 28 फरवरी व सातवें चरण का मतदान तीन मार्च को हुआ था। चुनाव आयोग इसी तरह का कार्यक्रम 2017 के चुनाव में भी रखना चाह रहा है। यदि फरवरी व मार्च में बोर्ड परीक्षाएं होंगी तो चुनाव कराने में दिक्कत आ सकती है।