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200 करोड़ की जमीन पर घमासान: केटीआर बोले- किसे फायदा पहुंचा रही रेवंत सरकार? राज्यपाल से मिले निलंबित विधायक

Thu, 10 Sep 2026 01:50 PM IST
प्रशांत तिवारी एएनआई, हैदराबाद
एएनआई, हैदराबाद Published by: प्रशांत तिवारी Updated Thu, 10 Sep 2026 01:50 PM IST
सार

तेलंगाना विधानसभा से बीआरएस विधायकों के निलंबन के मुद्दे पर बीआरएस और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है।  बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव ने मुख्यमंत्री पर बेहद ही गंभीर आरोप लगाए और विपक्ष के आवाज को दबाने की कोशिश का आरोप लगाया है। 

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Uproar Telangana over land worth 200 crore KTR asks who Revanth government benefiting BRS MLAs meet Governor
केटीआर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव ने गुरुवार को तेलंगाना सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बीआरएस विधायकों को विधानसभा से इसलिए निलंबित किया गया, ताकि वे मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के भाई से जुड़ी कंपनी को कथित तौर पर 200 करोड़ रुपये की जमीन आवंटित किए जाने का मुद्दा सदन में न उठा सकें। केटीआर ने कहा कि विपक्षी विधायक जनता से जुड़े सवाल सदन में उठाना चाहते थे। सरकार को इसकी आशंका थी इसलिए उसने हमारे विधायकों को सदन से निलंबित करा दिया। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि बीआरएस कांग्रेस सरकार के उन ‘420 झूठे वादों’ और मुख्यमंत्री के परिवार से कथित तौर पर जुड़ी कंपनी को कीमती जमीन आवंटित किए जाने के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में थी। केटीआर ने कहा कि इसी वजह से विधायकों को निलंबित करने का बहाना तलाशा गया और अब बीआरएस सीधे उस जमीन पर पहुंची है, जिसे मुख्यमंत्री के भाई से जुड़ी कथित शेल कंपनी को आवंटित किया गया है।

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200 करोड़ की जमीन पर केटीआर का सरकार से सवाल
केटी रामाराव ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से सवाल किया कि अगर सरकार ने किसी कंपनी को इतनी कीमती जमीन उपलब्ध कराई है, तो क्या तेलंगाना के युवा उद्यमियों को भी इसी तरह की सुविधा दी जाएगी। उन्होंने पूछा,'अगर आज तेलंगाना का कोई युवा सिर्फ एक लाख रुपये की पूंजी से कंपनी शुरू करता है, तो क्या उसे भी 200 करोड़ रुपये की जमीन दी जाएगी?' केटीआर ने आरोप लगाया कि रेवंत रेड्डी के भाई अनमुला कोंडल रेड्डी ने एक एयरोस्पेस और डिफेंस कंपनी स्थापित की थी और पांच एकड़ जमीन मिलने से पहले एक इजरायली इनोवेशन कंपनी के साथ गठजोड़ किया था। उन्होंने इस पूरे मामले की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जमीन आवंटित करने से पहले कंपनी की वित्तीय क्षमता और उसकी पृष्ठभूमि की उचित जांच की गई थी या नहीं, यह स्पष्ट होना चाहिए।
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राहुल गांधी से भी केटीआर ने मांगा जवाब
बीआरएस नेता ने इस मुद्दे को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से भी जोड़ते हुए सवाल किया कि कांग्रेस सरकार का ‘इंदिरम्मा राज्यम’ का नारा आखिर किस तरह के शासन की बात करता है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या ‘इंदिरम्मा राज्यम’ का मतलब मुख्यमंत्री के भाई, बहन और अन्य रिश्तेदारों को समृद्ध बनाना है। केटीआर ने कहा कि यदि भारतीय जनता पार्टी इस मामले में वास्तव में कार्रवाई करना चाहती है, तो प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), आयकर विभाग और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से तत्काल जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जांच के जरिए पूरे मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए और जनता को पता चलना चाहिए कि जमीन आवंटन में नियमों का पालन हुआ था या नहीं।
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विधानसभा में हंगामे के बाद 20 से अधिक बीआरएस विधायक निलंबित
केटीआर के आरोप ऐसे समय सामने आए हैं, जब तेलंगाना विधानसभा में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी बीआरएस के बीच टकराव चरम पर है। मानसून सत्र के दौरान कथित तौर पर सदन की कार्यवाही बाधित करने और नारेबाजी करने के आरोप में 20 से अधिक बीआरएस विधायकों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई, जब केटी रामाराव ने तेलंगाना में कथित रूप से बिगड़ती कानून-व्यवस्था और बीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव को कथित तौर पर मिल रही धमकियों सहित कई मुद्दों पर तत्काल चर्चा की मांग की थी। बीआरएस विधायक के संजय ने भी कांग्रेस सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया और कहा कि मुख्यमंत्री बीआरएस द्वारा उठाए जा रहे जनहित के मुद्दों पर चर्चा नहीं चाहते।


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राज्यपाल से मिले निलंबित विधायक और एमएलसी
विधानसभा से निलंबन के बाद बीआरएस के निलंबित विधायक और विधान परिषद सदस्य तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से भी मिले। उन्होंने राज्यपाल के सामने विधानसभा की कार्यवाही और विधायकों के निलंबन से जुड़े मुद्दे उठाए। बीआरएस का आरोप है कि विपक्ष को जनता से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल उठाने से रोका जा रहा है, जबकि सरकार का रुख है कि सदन की कार्यवाही बाधित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है। फिलहाल 200 करोड़ रुपये की कथित जमीन आवंटन का मामला तेलंगाना की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन गया है। बीआरएस ने जहां केंद्रीय एजेंसियों से जांच की मांग की है, वहीं इस मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

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