उत्तर प्रदेश चुनाव: बहुत मशक्कत के बाद जारी हुई भाजपा की पहली सूची, दलों को क्यों आ रही हैं उम्मीदवारों के चयन में मुश्किलें
प्रयागराज के एक नेता का कहना है कि प्रत्याशी के चयन में तीन बड़ी चुनौतियां सामने आ रही हैं। पहली चुनौती पांच साल की सरकार के कामकाज तथा मौजूदा विधायकों से नाराजगी है। दूसरी चुनौती भाजपा के नेता, कार्यकर्ता, 60 से अधिक विधानसभा सीटों के चुनाव प्रभारियों के टिकट मांगने से पैदा हुई है। तीसरी चुनौती कुछ नेताओं के पार्टी छोड़ने के कारण तथा गठबंधन के सहयोगियों के कारण आ रही हैं...
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आखिर काफी मशक्कत के बाद भाजपा ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले दो चरणों के लिए 107 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी। पिछले कई महीनों से भाजपा प्रत्याशियों के चयन, सहयोगी दलों को दी जाने वाली सीट के लिए माथा पच्ची कर रही थी। दूसरी तरफ भाजपा की ही तरह उम्मीदवारों के चयन में माथापच्ची कर रही समाजवादी पार्टी के लिए दिसंबर और जनवरी का महीना जैसे अग्निपरीक्षा बनकर आया हो। हालांकि इस बारे में सबसे कम मशक्कत बसपा और कांग्रेस को करनी पड़ी है।
लखनऊ में भाजपा के एक नेता ने कहा कि 2014 से हमारे यहां चयन के तरीके में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। इसका श्रेय वे भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को देते हैं। भाजपा की पहली सूची में सबसे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सीट को लेकर चल रही अटकलों को विराम दिया गया और उन्हें गोरखपुर शहर से ही लड़ने को कहा गया, जबकि उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या को उनकी तय सीट सिराथू ही मिली। वहीं दूसरे उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा का नाम पहली सूची में न होना सवाल भी खड़े करता है।
योगी सरकार के मंत्री मुकट बिहारी वर्मा ने लखनऊ में स्वीकार किया था कि संगठन के कामकाज में सरकार दखल नहीं देती। भाजपा में संगठन का मतलब है। जबकि अन्य दलों में सरकार बनने के बाद संगठन हल्के पड़ जाते हैं। भाजपा के सूत्र बताते हैं कि पार्टी के सामने प्रत्याशी चयन को लेकर कई चुनौतियां हैं। कुछ चुनौतियां तो पिछले दो सप्ताह के दौरान अचानक बढ़ गई हैं। योगी सरकार के एक मंत्री स्वीकार करते हैं कि हर सरकार के पांच साल के कामकाज के बाद जनता में थोड़ी बहुत नाराजगी तो रहती ही है। इसे आप थोड़ी चुनौती कह सकते हैं। जबकि प्रयागराज के एक नेता का कहना है कि प्रत्याशी के चयन में तीन बड़ी चुनौतियां सामने आ रही हैं। पहली चुनौती पांच साल की सरकार के कामकाज तथा मौजूदा विधायकों से नाराजगी है। दूसरी चुनौती भाजपा के नेता, कार्यकर्ता, 60 से अधिक विधानसभा सीटों के चुनाव प्रभारियों के टिकट मांगने से पैदा हुई है। तीसरी चुनौती कुछ नेताओं के पार्टी छोड़ने के कारण तथा गठबंधन के सहयोगियों के कारण आ रही हैं। बताते हैं कि इसके कारण भाजपा को पहली सूची जारी करने में ही काफी मशक्कत करनी पड़ी।
सपा के पास दलों, नेताओं की भीड़ है
समाजवादी पार्टी की लगभग सभी सीटों पर उम्मीदवारों की लंबी कतार लगी है। जफराबाद की सीट से अकेले 42 उम्मीदवार टिकट मांगने के लिए लखनऊ में डटे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता के मुताबिक इस बार सपा ने कई दर्जन छोटे-छोटे संगठनों को मिलाया है। आधा दर्जन बड़े राजनीतिक दलों ने समर्थन दिया है, तो प्रदेश के आधा दर्जन से अधिक क्षेत्रीय दल भी गठबंधन में शामिल हैं। इसके चलते सीटों का बंटवारा, उम्मीदवारों का चयन दोनों परेशानी का सबब बना हुआ है। अकेले मुलायम सिंह यादव परिवार से ही टिकट की चाहत रखने वाले लोगों की संख्या आधा दर्जन से अधिक है। इसी तरह से सपा में शामिल होने वाले नेता भी अपने समर्थकों के साथ आ रहे हैं। टिकट को लेकर उनकी भी कुछ शर्ते हैं। इसे पूरा करने में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं का ध्यान सबसे अहम है। संजय लाठर कहते हैं कि बागियों की संख्या न्यूनतम और अधिकतम तालमेल के सहारे ही 2022 में अभूतपूर्व सफलता पाई जा सकती है। सपा इसका पूरा ध्यान रखकर उम्मीदवारों का चयन कर रही है।
सबसे अहम सवाल किसने किस जाति को कहां से टिकट दिया
एक राष्ट्रीय पार्टी के स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्य का कहना है कि राज्य में सभी दल चुनाव जीतने का दावा करते हैं। उत्तर प्रदेश के चुनाव में सभी दल जातिगत समीकरण को महत्व दे रहे हैं। इसमें यह जरूरी नहीं है कि जिस विधानसभा सीट पर किसी खास जाति की संख्या अधिक हो, उसी जाति के प्रत्याशी को टिकट दिया जाए। वह कहते हैं कि कई बार ऐसी सीट से संख्या में कम जाति के उम्मीदवार को टिकट देकर जीत का समीकरण बन जाता है। इसलिए सभी दल पहले प्रतिद्वंदी राजनीतिक दल के उम्मीदवारों की सूची की बाट जोहते हैं। बताते हैं कि अधिकांश विधानसभा सीटों पर जीत का आधा समीकरण राजनीतिक दल तो आधा समीकरण प्रत्याशी का चेहरा तय करता है। सत्ता की दौड़ में नंबर एक या दो पर चल रहे दलों में केवल 15-20 फीसदी सीटों की हार जीत अकेले प्रत्याशी के दम पर हो पाती है।