UP Congress: यूपी कांग्रेस अध्यक्ष बृजलाल खाबरी दिल्ली तलब, आखिर आलाकमान ने उनके फैसलों पर क्यों चलाई कैंची?
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विस्तार
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बृजलाल खाबरी के द्वारा झांसी और जौनपुर में नियुक्त जिलाध्यक्षों को पार्टी आलाकमान ने तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। खाबरी ने पार्टी हाईकमान को संज्ञान में लिए बिना इन जिलों में अध्यक्षों की नियुक्तियां कर दी थीं। उनके इस निर्णय से नाराज हाईकमान ने न केवल इन जिलाध्यक्षों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है, बल्कि खाबरी को दिल्ली तलब भी किया गया है। लगभग एक साल से उनके नेतृत्व में हुई कई गड़बड़ियों के बाद उनकी कुर्सी भी खतरे में बताई जा रही है।
पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल के द्वारा बृजलाल खाबरी को जारी पत्र में कहा गया है कि झांसी और जौनपुर में पार्टी की सांगठनिक प्रक्रिया को पूरा किए बिना इन जिलों में कार्यवाहक अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी गई, जबकि इस तरह के किसी बड़े निर्णय पर पार्टी अध्यक्ष से औपचारिक सहमति लेनी होती है। लेकिन बृजलाल खाबरी ने इस पूरी प्रक्रिया को पूरा किए बिना मनमाने तरीके से नियुक्ति कर दी।
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उनके इस निर्णय से न केवल यूपी कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच नाराजगी पैदा हुई, बल्कि इससे पार्टी हाईकमान भी नाराज हो गया। उनके इस निर्णय को रद्द करते हुए पार्टी आलाकमान ने उन्हें तत्काल दिल्ली तलब किया है।
इसके पहले भी हो चुकी है गड़बड़ी
दरअसल, बृजलाल खाबरी के बारे में इसके पहले भी संगठन की उपेक्षा करने के गंभीर आरोप लगे थे। हाल ही में संपन्न हुए निकाय चुनावों के दौरान भी गंभीर अनियमितता की बात सामने आई थी। निकाय चुनाव के दौरान वोट हासिल करने के मामले में कांग्रेस ने पूरे प्रदेश में अच्छा प्रदर्शन किया है। कई स्थानों पर पार्टी उम्मीदवार जीत हासिल करने की स्थिति में थे, लेकिन सही रणनीति से चुनाव में न उतरने के कारण इन उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा।
निकाय चुनाव के दौरान चर्चा थी कि कांग्रेस मथुरा की सीट निकाल सकती है। पार्टी यहां से अपने मजबूत उम्मीदवार राजकुमार रावत को चुनाव लड़ाना चाहती थी, लेकिन अंतिम समय में दूसरे उम्मीदवार को पार्टी का सिंबल जारी कर दिया और वह कांग्रेस का आधिकारिक उम्मीदवार बनकर चुनाव लड़ा। हालांकि, पार्टी ने रावत के पक्ष में ही चुनाव प्रचार किया।
लेकिन पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ने वाले और पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशी में अंतर होने के कारण मतदाताओं में गलतफहमी पैदा हुई और पार्टी मथुरा की सीट हार गई। चूंकि प्रदेश अध्यक्ष के हस्ताक्षर के बाद ही सिंबल जारी होते हैं, ऐसे में अंतिम समय में किसी अनाधिकारिक प्रत्याशी को सिंबल कैसे जारी हो गया, इसको लेकर बृजलाल खाबरी पर अंगुली उठी थी।
केंद्र की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे
दरअसल कांग्रेस अपने पारंपरिक मतदाताओं दलितों और मुसलमानों को अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है, जिससे वह आने वाले चुनावों में मजबूत लड़ाई लड़ सके। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र में मल्लिकार्जुन खरगे को पार्टी का अध्यक्ष चुना गया था। देश में उत्तर प्रदेश के सियासी कद को देखते हुए पार्टी ने यूपी में भी दलित समुदाय के व्यक्ति बृजलाल खाबरी को अध्यक्ष बनाया था।
पार्टी को अनुमान था कि उनके आने से यूपी के दलित और मुसलमान तेजी से पार्टी से जुड़ेंगे और पार्टी अपनी जड़ों को मजबूत कर सकेगी। लेकिन फिलहाल अक्तूबर 2022 में उनके अध्यक्ष बनने के बाद से, अब तक वे दलित या मुसलमान समुदाय के लोगों को पार्टी से जोड़ने का कोई प्रभावशाली कार्य नहीं कर सके हैं। इस कारण भी पार्टी आलाकमान उन्हें लेकर असहज बताया जा रहा है। उनके पार्टी हाईकमान से मुलाकात के बाद यूपी में नए राजनीतिक समीकरण पैदा होने की संभावना जताई जा रही है।