UP Congress: सीट शेयरिंग होते ही कांग्रेस में घमासान, पूर्व सांसद का पार्टी में चाटुकारिता भारी पड़ने का आरोप
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विस्तार
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच टिकटों पर समझौता हुए 24 घंटे भी नहीं हुए हैं कि कांग्रेस पार्टी में घमासान मच गया है। वाराणसी से कांग्रेस के पूर्व सांसद रहे राजेश मिश्रा ने आरोप लगाया है कि पार्टी में केंद्रीय नेतृत्व के प्रति समर्पण और पार्टी में निष्ठा के साथ काम करने वालों पर चाटुकारिता भारी पड़ रही है। राजेश मिश्रा कांग्रेस के टिकट पर भदोही से चुनाव लड़ना चाहते थे। लेकिन समझौते में यह सीट समाजवादी पार्टी के पास चली गई है। ऐसे में उनका टिकट कटना तय हो गया है। इसी कारण वे उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय के खिलाफ खुलकर मैदान में उतर गए हैं।
इसी बीच चर्चा है कि राजेश मिश्रा ठीक चुनाव के बीच कांग्रेस से पाला बदल कर समाजवादी पार्टी के पाले में जा सकते हैं और सपा की साइकिल पर सवार होकर भदोही लोकसभा सीट से ताल ठोक सकते हैं। अजय राय और राजेश मिश्रा के बीच तनातनी लंबे समय से चर्चा का विषय बनी रही है, लेकिन चुनाव के बीच कांग्रेस के दोनों शीर्ष नेताओं में यह अनबन पार्टी को नुकसान पहुंचा सकती है।
क्या कहा राजेश मिश्रा ने
सपा-कांग्रेस के समझौते के तुरंत बाद राजेश मिश्रा ने ट्वीट कर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीति कभी सेवा का काम था, लेकिन वर्तमान समय में राजनीति व्यापार हो गई है। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना लिखा कि चाटुकारिता पार्टी और नेतृत्व के प्रति समर्पण और निष्ठा पर भारी पड़ रही है।
क्यों हुए नाराज?
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों पर तालमेल में यूपी में कांग्रेस को 80 में से 17 सीटें मिलीं। इनमें भदोही की सीट शामिल नहीं थी, जहां से राजेश मिश्रा चुनाव लड़ना चाहते हैं। दरअसल, 2004 के लोकसभा चुनाव में डॉ. राजेश कुमार मिश्रा ने कांग्रेस के टिकट पर वाराणसी से जीत हासिल की थी। लेकिन 2009 में वे इसी सीट पर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े और चौथे स्थान पर रहे। इस चुनाव में भाजपा के डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने जीत हासिल की थी, जबकि बसपा उम्मीदवार मुख्तार अंसारी दूसरे और समाजवादी पार्टी के अजय राय तीसरे स्थान पर रहे थे।
इसके बाद अजय राय कांग्रेस में आ गए और 2014-2019 में कांग्रेस के टिकट पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने चुनाव लड़ा। इस बार भी माना जा रहा है कि कांग्रेस की ओर से वही मोदी के सामने उम्मीदवार हो सकते हैं।
इस बीच, राजेश मिश्रा ने वाराणसी की बगल की सीट भदोही से अपनी चुनावी तैयारी शुरू कर दी थी। उन्हें उम्मीद थी कि ब्राह्मण-मुसलमान बहुल सीट भदोही से वे जीत हासिल कर सकते हैं। लेकिन समझौते में यह सीट सपा के पास चली गई। राजेश मिश्रा के करीबी मानते हैं कि राजेश मिश्रा की राजनीति को किनारे लगाने के लिए ही पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने इस सीट को सपा को दे दिया, इससे राजेश मिश्रा नाराज हो गए।
असली कहानी कुछ और
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने अमर उजाला को बताया कि राजेश मिश्रा की नाराजगी का कारण कुछ और है। दरअसल, वाराणसी में अपने लिए कोई संभावना न होने के कारण वे भदोही से चुनाव लड़ना चाहते थे। उन पर आरोप है कि वे पहले से समाजवादी पार्टी के संपर्क में हैं और कांग्रेस से टिकट न मिलने की स्थिति में वे सपा की ओर से भदोही से चुनाव लड़ सकते हैं। अब जब भदोही सीट सपा के खाते में चली गई है, वे कांग्रेस नेताओं पर हमले कर अखिलेश यादव के प्रति अपना समर्पण दिखाना चाहते हैं।