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NCERT: 'किताबों से मुगलकाल को नहीं, दोहराव को हटाया', 7वीं की पाठ्यपुस्तकों में बदलाव पर शिक्षा राज्य मंत्री

Tue, 29 Apr 2025 07:10 AM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Tue, 29 Apr 2025 07:10 AM IST
सार

केंद्रीय मंत्री और पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार इस बात पर जोर दिया कि मुगलकाल भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसे अन्य ऐतिहासिक युगों की कीमत पर महिमामंडित नहीं किया जाना चाहिए। इसलिए जो दोहराव था, उसे हटाया गया है।
 

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Union Minister Sukant Majumdar says not Mughal period but repetition has been removed from NCERT books
सुकांत मजूमदार, केंद्रीय मंत्री - फोटो : ANI

विस्तार

 शिक्षा राज्य मंत्री और पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने सोमवार को कहा कि एनसीईआरटी की किताबों से मुगल काल को बाहर नहीं किया गया है, बल्कि केवल दोहराव वाली सामग्री को संपादित किया गया है।

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मजूमदार ने इस बात पर जोर दिया कि मुगलकाल भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसे अन्य ऐतिहासिक युगों की कीमत पर महिमामंडित नहीं किया जाना चाहिए। इसलिए जो दोहराव था, उसे हटाया गया है। उन्होंने कहा, जिस तरह मुगलकाल इतिहास का अहम हिस्सा है, उसी तरह का महत्व दूसरे युग को भी दिया जाना चाहिए, जो भारत का स्वर्णिम काल था। मजूमदार ने मुगलकाल को भारतीय इतिहास का सबसे काला दौर बताया। इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में छत्रपति संभाजी नगर में एक जनसभा में भारतीय इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में मुगल शासक औरंगजेब का महिमामंडन होने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि इस तरह के चित्रण ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं और विवादास्पद विरासत वाले शासकों की प्रशंसा करते हैं।
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पहले हुआ था ये बदलाव
एनसीईआरटी ने पहले मुगलों और दिल्ली सल्तनत पर अनुभागों को छोटा कर दिया था, जिसमें तुगलक, खलजी, मामलूक और लोदी जैसे राजवंशों का विस्तृत विवरण और 2022-23 में COVID-19 महामारी के दौरान अपने पाठ्यक्रम को युक्तिसंगत बनाने के हिस्से के रूप में मुगल सम्राटों की उपलब्धियों पर दो-पृष्ठ की तालिका शामिल थी, अब नई पाठ्यपुस्तक ने उनके सभी संदर्भ हटा दिए हैं। पुस्तक में अब सभी नए अध्याय हैं जिनमें मुगलों और दिल्ली सल्तनत का कोई उल्लेख नहीं है।
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7वीं की नई पुस्तकों में क्या?
सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक "समाज की खोज: भारत और उससे परे" में मगध, मौर्य, शुंग और सातवाहन जैसे प्राचीन भारतीय राजवंशों पर नए अध्याय हैं, जिनका ध्यान "भारतीय लोकाचार" पर है।

पुस्तक में एक और नया संस्करण "भूमि कैसे पवित्र बनती है" नामक एक अध्याय है जो इस्लाम, ईसाई धर्म, यहूदी धर्म और पारसी धर्म, हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और सिख धर्म जैसे धर्मों के लिए भारत और बाहर पवित्र माने जाने वाले स्थानों और तीर्थस्थलों पर केंद्रित है।

अध्याय में "पवित्र भूगोल" जैसी अवधारणाओं का परिचय दिया गया है, जिसमें 12 ज्योतिर्लिंग, चार धाम यात्रा और "शक्ति पीठ" जैसे स्थानों के नेटवर्क का विवरण दिया गया है। अध्याय में नदी संगम, पहाड़ और जंगल जैसे स्थानों का भी विवरण दिया गया है, जो पूजनीय हैं।

जवाहरलाल नेहरू का एक उद्धरण भी शामिल
पाठ्यपुस्तक में जवाहरलाल नेहरू का एक उद्धरण शामिल है, जिन्होंने भारत को तीर्थयात्राओं की भूमि के रूप में वर्णित किया है - बद्रीनाथ और अमरनाथ की बर्फीली चोटियों से लेकर कन्याकुमारी के दक्षिणी सिरे तक।

पाठ्यपुस्तक में दावा किया गया है कि वर्ण-जाति व्यवस्था ने शुरू में सामाजिक स्थिरता प्रदान की, लेकिन बाद में यह कठोर हो गई, खासकर ब्रिटिश शासन के तहत, जिससे असमानताएं पैदा हुईं।

इस साल की शुरुआत में प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेले का भी पुस्तक में उल्लेख है और बताया गया है कि कैसे लगभग 660 मिलियन लोगों ने इसमें भाग लिया। भगदड़ का कोई उल्लेख नहीं है जिसमें 30 तीर्थयात्री मारे गए और कई घायल हो गए। नई पाठ्यपुस्तक में मेक इन इंडिया, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और अटल सुरंग जैसी सरकारी पहलों का संदर्भ शामिल किया गया है।

पुस्तक में भारत के संविधान पर एक अध्याय है, जिसमें यह बताया गया है कि पहले लोगों को अपने घरों में राष्ट्रीय ध्वज फहराने की अनुमति नहीं थी। यह स्थिति 2004 में बदली जब एक नागरिक ने यह महसूस किया कि अपने देश पर गर्व करना उसका अधिकार है और उसने इस नियम को अदालत में चुनौती दी। सर्वोच्च न्यायालय ने इसे सही ठहराया और कहा कि झंडा फहराना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है। अब हम तिरंगे को गर्व से फहरा सकते हैं, लेकिन हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि इसका कभी अपमान नहीं होना चाहिए।


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अंग्रेजी की पाठ्यपुस्तक के बारे में
अंग्रेजी की पाठ्यपुस्तक "पूर्वी" में 15 कहानियां, कविताएं और कथाएं हैं, जिनमें से नौ भारतीय लेखकों की हैं या जिनमें भारतीय विषय और पात्र शामिल हैं, जैसे रवींद्रनाथ टैगोर, एपीजे अब्दुल कलाम और रस्किन बॉन्ड की रचनाएं।

"हनीकॉम्ब" नामक पहले की पाठ्यपुस्तक में 17 कहानियां, कविताएं और अन्य रचनाएं थीं, जिनमें से चार भारतीय लेखकों की थीं।

विपक्षी दलों ने बताया भगवाकरण के समान
एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों के पुनर्गठन को विपक्षी दलों ने आलोचना की है और इसे "भगवाकरण" के समान बताया है। एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी ने पिछले साल एक साक्षात्कार में कहा था, "दंगों के बारे में पढ़ाने से छोटे बच्चे नकारात्मक नागरिक बन सकते हैं।"

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