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अजय मिश्र टेनी: इस्तीफे की मांग के बीच बीएसएफ के कार्यक्रम में नहीं हुए शामिल, मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाए गए थे

Mon, 20 Dec 2021 08:37 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Mon, 20 Dec 2021 08:37 PM IST
सार

विपक्ष की ओर से इस्तीफे की मांग का सामना कर रहे केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र टेनी पर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। बीएसएफ ने उन्हें अपने स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर बुलावा भेजा था लेकिन वह इसमें शामिल नहीं हुए।

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Union Minister Ajay Mishra Teni skips BSF event amid calls for his resignation news in Hindi
गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी - फोटो : वीडियो ग्रैब (फाइल)

विस्तार

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में हुई हिंसा को लेकर विवादों में घिरे केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी सोमवार को सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के 59वें स्थापना दिवस समारोह में नहीं पहुंचे। टेनी को दिल्ली में आयोजित इस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया गया था लेकिन अंतिम क्षण में उन्होंने कार्यक्रम में न शामिल होने का फैसला लिया। उनके स्थान पर उनके साथी मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने समारोह में शिरकत की। 

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केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से टेनी की कार्यक्रम में गैरमौजूदगी को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने केवल इतना कहा कि वह किसी जरूरी कार्य के चलते नहीं आ सके। टेनी के बेटे आशीष मिश्र पर तीन अक्तूबर को लखीमपुर खीरी में प्रदर्शन कर रहे चार किसानों और एक पत्रकार की हत्या की कोशिश करने का आरोप है। विपक्षी दल इसे लेकर टेनी को तत्काल बर्खास्त करने की मांग कर रहे हैं।
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लखीमपुर खीरी के तिकुनियां में हुए इस मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्र मोनू समेत सभी 13 आरोपियों पर दुर्घटना की धाराएं हटाकर हत्या की कोशिश व अंगभंग करने की धाराएं बढ़ाई गई हैं। घटना के 70 दिन बाद जांच टीम ने माना था कि तीन अक्तूबर को हुआ खूनी संघर्ष दुर्घटना नहीं थी, बल्कि यह हत्या की एक सोची-समझी साजिश थी। सोमवार को आशीष की जमानत याचिका कुछ कमियों के चलते वापस ले ली गई।

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लखीमपुर खीरी हिंसा के विरोध में महाराष्ट्र बंद पर सरकार को हाईकोर्ट का नोटिस 

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खिरी की घटना के विरोध में महाराष्ट्र बंद आहूत करने पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। राज्य की महा विकास आघाडी सरकार में शामिल तीनों दल (शिवसेना, एनसीपी व कांग्रेस) ने 11 अक्तूबर को महाराष्ट्र बंद बुलाया था। हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करने के साथ ही मामले की अगली सुनवाई 14 फरवरी मुकर्रर की है। महाराष्ट्र बंद के विरोध में पूर्व आईपीएस अधिकारी ज्युलियो रिबेरो व पूर्व प्रशासकीय अधिकारी डीएम सुकथनकर ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने दलीलें सुनने के बाद कहा कि बंद अपने आप में अवैध होता है। वहीं, यह भी कहा कि हम इस बात को लेकर आशंकित है कि यदि भविष्य में बंद बुलाने से रोकने को लेकर आदेश जारी करेंगे तो क्या राजनीतिक दल इसका पालन करेंगे। इस पर भी विचार किया जाना चाहिए।
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