पुलिस को स्मार्ट बनाएंगे IIT पास IPS: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से थाना स्तर पर ऐसे रोके जाएंगे अपराध
केंद्रीय गृह सचिव भल्ला ने कहा, अब पुलिस सेवा में आईआईटी उत्तीर्ण आईपीएस अधिकारी बड़ी संख्या में आ रहे हैं। उनकी मदद से पुलिस महकमे की कई दिक्कतों का समाधान निकाला जा सकता है। यदि कोई आईपीएस अधिकारी अपनी ड्यूटी के अतिरिक्त 'प्रौद्योगिकी' के इस्तेमाल को लेकर अगर कोई योजना तैयार करता है, तो उसे केंद्रीय गृह मंत्रालय का पूर्ण सहयोग हासिल होगा...
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देश में पुलिस व्यवस्था का परंपरागत ढांचा बदलने की तैयारी हो रही है। केंद्र सरकार का प्रयास है कि थाना स्तर पर पुलिस को मॉडर्न प्रौद्योगिकी में पारंगत बनाया जाए। इसके लिए भारतीय पुलिस सेवा 'आईपीएस' के उन अधिकारियों की मदद ली जाएगी, जो आईआईटी पास हैं। उनके तकनीक ज्ञान की मदद से अपराध रोकने के लिए 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' जैसी प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल होगा। पुलिस स्टेशन स्तर तक जांच कार्य में सीसीटीवी और स्मार्ट सेंसर का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो, आईपीएस अधिकारियों को मदद देगा। दूसरी तरफ केंद्रीय गृह मंत्रालय का भी इस तकनीकी पहल में पूर्ण सहयोग मिलता रहेगा।
पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो, मुख्यालय, महिपालपुर, में गुरुवार को 'भारतीय पुलिस को स्मार्ट बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग' विषय पर आयोजित डॉ. आनंदस्वरूप गुप्ता स्मारक व्याख्यान में बतौर अध्यक्षीय भाषण में केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने यह बात कही है। उन्होंने कहा, पुलिस बलों की क्षमता निर्माण एवं आधुनिकीकरण में बीपीआरएंडडी (Bureau of Police Research and Development) की भूमिका सराहनीय रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा के बदलते परिप्रेक्ष्य में पुलिस बलों को बदलती हुई चुनौतियों के अनुसार अपने उत्तरदायित्वों को पुनर्निर्धारित करने पर बल देना चाहिए। पुलिस, सरकार का सबसे दृश्यमान अंग है। यह सभी जगह, सभी लोगों के जीवन को प्रभावित करता है। देश की सुरक्षा के बगैर देश का विकास संभव नहीं है। केंद्रीय गृह सचिव भल्ला ने कहा, महामारी के दौरान देश के पुलिस बलों ने शानदार भूमिका निभाई है।
साइबर अपराध बड़ी चुनौती
भल्ला ने कहा, विगत वर्षों में हमारे पुलिस बल, कानून और व्यवस्था, प्राकृतिक आपदा, नक्सलवाद, कोविड-19, सीमा पार से आंतकवाद तथा आर्थिक अपराधों से पूरी सक्षमता के साथ लड़े हैं। उन्हें अब साइबर अपराध की चुनौतियों से बड़े स्तर पर लड़ना है। इसके लिए केवल प्रतिक्रियात्मक होने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उन्हें बड़े स्तर पर प्रशिक्षित और सुसज्जित होने की आवश्यकता होगी। इसके बाद ही पुलिस बल इन चुनौतियों का सामना कर सकेंगे। इसमें ब्यूरो की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो, उद्योग शोधकर्ताओं इत्यादि से सहयोग कर पुलिस बलों की सहायता कर सकता है।
योजना को मिलेगा गृह मंत्रालय का समर्थन
अब पुलिस सेवा में आईआईटी उत्तीर्ण आईपीएस अधिकारी बड़ी संख्या में आ रहे हैं। उनकी मदद से पुलिस महकमे की कई दिक्कतों का समाधान निकाला जा सकता है। यदि कोई आईपीएस अधिकारी अपनी ड्यूटी के अतिरिक्त 'प्रौद्योगिकी' के इस्तेमाल को लेकर अगर कोई योजना तैयार करता है, तो उसे केंद्रीय गृह मंत्रालय का पूर्ण सहयोग हासिल होगा। थाना स्तर पर जांच कार्य में पुलिस किस तरह से तकनीक का इस्तेमाल करे, आईआईटी पास आईपीएस इसमें बड़ी मदद कर सकते हैं। आजकल कई सारे मॉडर्न गजट सामने हैं। बहुत से थाने ऐसे हैं, जहां पर अभी तक परंपरागत तरीके से केस को उसके अंजाम तक पहुंचाया जाता है। ऐसे में जांच के दौरान कई अहम पक्ष छूट जाते हैं। कई बार शातिर अपराधी इसका फायदा उठा लेते हैं।
साइबर क्राइम की बढ़ती वारदातें, पुलिस संगठनों के लिए बड़ी चुनौती बनी हैं। अजय भल्ला के अनुसार, पुलिस व्यवस्था की विभिन्न विधाओं में ड्रोन काफी उपयोगी हो सकता है। इसके साथ ही अपराध में इस्तेमाल होने वाले ड्रोन को नाकाम करने के लिए उचित समाधान प्राप्त करने की आवश्यकता है। उन्होंने सीसीटीवी और स्मार्ट सेंसर का उपयोग, जांच में पुलिस स्टेशन स्तर तक करने पर बल दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल भी अपराध के नियंत्रण एवं मैपिंग में बहुत ही लाभप्रद है। पीएम मोदी ने लखनऊ में आयोजित डीजीपी/आईजीपी सम्मेलन में पुलिस तकनीकी मिशन की घोषणा की थी। अब उस मिशन की स्थापना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में की जा चुकी है। इससे पुलिस बलों की आधुनिकीकरण प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा। बालाजी श्रीवास्तव, महानिदेशक, पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो ने कहा, केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा ब्यूरो के 49वें स्थापना दिवस पर कहे गए शब्द, बीपीआरएंडडी के बगैर अच्छी पुलिसिंग की कल्पना नहीं हो सकती, बहुत अहम हैं।