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IPS in CPO: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सख्ती, मगर फिर भी नहीं भर पा रहे आईपीएस DIG-SP के सौ फीसदी पद
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सीएपीएफ
- फोटो : अमर उजाला
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केंद्र सरकार में विभिन्न राज्यों से प्रतिनियुक्ति पर आने वाले 'आईपीएस' अधिकारियों के लिए स्वीकृत पद अभी तक 'सौ' फीसदी नहीं भरे जा सके हैं। केंद्रीय जांच एजेंसियों, पुलिस संगठनों और सीएपीएफ में डीआईजी व एसपी के अनेक पद खाली पड़े हैं। 2025 में फरवरी के पहले सप्ताह की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र में बतौर प्रतिनियुक्ति आईपीएस डीजी के लिए 15 पद स्वीकृत हैं। सभी पद भरे हुए हैं। एसडीजी के 12 पद हैं, इनमें भी कोई पद खाली नहीं है। एडीजी लेवल पर 25 पद स्वीकृत हैं, इनमें केवल एक पद खाली है। आईजी के 149 पद हैं, जिनमें से 27 रिक्त हैं। डीआईजी के लिए स्वीकृत 256 पदों में से 68 पद रिक्त दिखाए गए हैं। केंद्र में बतौर प्रतिनियुक्ति एसपी आईपीएस के 221 पद स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 126 पद खाली हैं। गत वर्षों के मुकाबले केंद्रीय इस बार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सख्ती का असर दिख रहा है। आईपीएस डीआईजी की पोस्टिंग में थोड़ी सी तेजी देखने को मिली है।
सीबीआई और आईबी में नहीं आना चाहते एसपी
सीबीआई जैसी प्रतिष्ठित जांच एजेंसी में आईपीएस एसपी के 73 पद स्वीकृत हैं, लेकिन मौजूदा समय में वहां 54 पद खाली पड़े हैं। इंटेलिजेंस ब्यूरो 'आईबी' में एसपी आईपीएस के 83 पद मंजूर किए गए हैं। अभी 55 पद रिक्त पड़े हैं। आईबी में डीआईजी आईपीएस के 63 पद रिजर्व हैं। हैरानी की बात है कि इनमें से 30 पद खाली पड़े हैं। बीपीआरएंडी में आईपीएस एसपी के छह पदों में से तीन खाली हैं। बीएसएफ में आईपीएस डीआईजी के 26 पद हैं, लेकिन 11 पद खाली हैं। आईजी की बात करें तो बीएसएफ में आईपीएस के लिए 21 पद स्वीकृत हैं। मौजूदा समय में 6 पद खाली पड़े हैं। सीआईएसएफ में आईपीएस डीआईजी के 20 पद मंजूर हैं, लेकिन 9 पद रिक्त हैं। सीआरपीएफ में आईपीएस आईजी के 23 पदों में से छह तो वहीं डीआईजी के लिए स्वीकृत 38 पदों में से आठ खाली हैं।
डीआईजी के पद भरने की संख्या में बढ़ोतरी
हालांकि इस वर्ष फरवरी से लेकर अभी तक डीआईजी के कई पदों को भरा गया है। पश्चिम बंगाल कैडर के डीआईजी अवधेश पाठक (आईपीएस 2009) को प्रतिनियुक्ति पर सीआरपीएफ में लगाया गया है। पश्चिम बंगाल कैडर के डीआईजी अन्नाप्पा ई (आईपीएस 2009) को भी सीआरपीएफ में पोस्टिंग दी गई है। एनएन त्रिपाठी, पश्चिम बंगाल कैडर के (आईपीएस 2009) को सीआईएसएफ में लगाया गया है। मार्च में तमिलनाडु कैडर के (आईपीएस 2003) आर सुधाकर को एनसीबी में डीडीजी लगाया गया है। एजीएमयूटी कैडर के सुजीत कुमार (आईपीएस 2007) को सीआरपीएफ में डीआईजी की पोस्टिंग दी गई है। उत्तर प्रदेश कैडर के हिमांशु कुमार (आईपीएस 2010) को आईटीबीपी में डीआईजी लगाया गया है। इन नियुक्तियों को मिलाएं तो करीब साठ पद अभी भी रिक्त पड़े हैं।
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2024 व 2023 में नहीं भरे जा सके पद
केंद्र में आईपीएस प्रतिनियुक्ति की एक मार्च 2024 की स्थिति देखें तो डीजी के लिए स्वीकृत 15 पदों में से दो पद खाली थे। एसडीजी के 12 पदों में दो पद रिक्त थे। एडीजी लेवल के 25 में से 3 पद रिक्त थे। आईजी के 149 पदों में से 30 पद रिक्त थे। डीआईजी के 256 पदों में से 70 पद रिक्त थे। केंद्र में बतौर प्रतिनियुक्ति एसपी आईपीएस के 228 पदों में से 132 पद खाली थे। केंद्रीय गृह मंत्रालय की तीन मार्च 2023 की स्थिति के अनुसार, विभिन्न केंद्रीय सुरक्षा बलों, आयोगों और जांच एवं खुफिया एजेंसियों में डीआईजी 'आईपीएस' के लिए 255 पद स्वीकृत थे, जिनमें से 77 पद खाली पड़े थे। इससे पहले खाली पदों की यह संख्या 120 से 186 के बीच रही है। दिसंबर 2021 की स्थिति के अनुसार, आईपीएस डीआईजी के लिए 252 पद स्वीकृत थे, 118 पद रिक्त थे। इसी तरह एसपी 'आईपीएस' के लिए 203 पद मंजूर किए गए, लेकिन 104 पद खाली पड़े रहे। आईजी के लिए मंजूर 140 पदों में से 29 पद रिक्त थे। उस वक्त अनेक पद, जो भरे हुए दिखाए गए थे, वे आईपीएस से नहीं, बल्कि अस्थायी तौर से सीएपीएफ अधिकारियों के जरिए भरे गए थे।
2020 में आईपीएस प्रतिनियुक्ति की स्थिति
जुलाई 2020 की स्थिति के मुताबिक, केंद्र में बतौर प्रतिनियुक्ति डीआईजी 'आईपीएस' के लिए 254 पद स्वीकृत थे। इनमें से 164 पद थे। आईजी 'आईपीएस' के लिए स्वीकृत 135 पदों में से 20 पद खाली पड़े थे। डीजी रैंक के लिए 13 पद स्वीकृत किए गए थे, जिनमें से दो पद खाली थे। एसडीजी 'आईपीएस' के 10 में से 3 पद रिक्त थे। एडीजी 'आईपीएस' के 27 पदों में से चार पद खाली रहे। उस दौरान एसपी 'आईपीएस' के लिए स्वीकृत पदों की संख्या 199 थी, मगर इनमें से 97 पद रिक्त रहे। हैरानी की बात रही कि उस वर्ष बीएसएफ में आईपीएस डीआईजी के 26 पदों में से 22 पद खाली थे। सीआरपीएफ में ये पद 38 थे, जिनमें से केवल एक ही पद भरा हुआ था। सीबीआई में 35 में से 20 पद खाली थे, जबकि सीआईएसएफ में 20 में से 16 पद रिक्त थे। आईबी में आईपीएस डीआईजी के 63 में से 28 पद और आईपीएस एसपी के 83 में से 49 पद खाली रह गए थे।
सख्त जॉब से बचना चाहते हैं आईपीएस अधिकारी
बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद का कहना है, आईपीएस अधिकारी किसी भी तरह की सख्त जॉब से बचना चाहते हैं। उन्हें अपने राज्य में एसपी के पद पर जिला पुलिस की कमान संभालने का मौका मिलता है, इसलिए वे वहां से कहीं नहीं जाना चाहते। जब वे डीआईजी बनते हैं तो खुद के लिए सुविधा वाली पोस्टिंग तलाशते हैं। अगर उन्हें वह पद केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर नहीं मिलता तो वे ऐसे पद पर ज्वाइन नहीं करते। केंद्रीय पुलिस संगठन या अर्धसैनिक बलों में डीआईजी बनकर आईपीएस नहीं आना चाहते। इन बलों में डीआईजी का पद 'फील्ड पोस्टिंग' के अंतर्गत आता है। बॉर्डर एरिया में तैनाती होती है। कई अफसर हेडक्वार्टर में रहने का जुगाड़ कर लेते हैं, लेकिन ज्यादातर डीआईजी को दूरदराज की यूनिटों में पोस्टिंग मिलती है। आईजी और एडीजी जैसे पद ज्यादातर मुख्यालयों में होते हैं, इसलिए आईपीएस यहां तुरंत ज्वाइन कर लेते हैं। खाली पड़े पदों पर कैडर अधिकारियों को स्थायी पदोन्नति नहीं दी जाती। जब आईपीएस अफसर 'डीआईजी' के पद पर ज्वाइन नहीं करता है तो कुछ पदों को कैडर अधिकारियों की तरफ डायवर्ट कर दिया जाता है। ये पद अस्थायी तौर पर कैडर अधिकारियों को दिए जाते हैं। अगर स्थायी तौर पर उनकी नियुक्ति होती है तो उन्हें समय रहते प्रमोशन मिल सकता है, लेकिन ऐसा नहीं किया जाता।
17 सेवानिवृत्त अधिकारियों ने की थी अपील
चार साल पहले भारतीय पुलिस सेवा (आईपीस) के 17 सेवानिवृत्त अधिकारियों ने सेवारत आईपीएस से केंद्र सरकार के तहत सेवा देने के लिए आगे आने की अपील की थी। पूर्व अफसरों ने कहा, आईपीएस को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आना चाहिए। उन्हें यहां पर विभिन्न जांच एजेंसियों और सुरक्षा बलों में काम करने का मौका मिलता है। वे समय रहते इन अवसरों का लाभ उठाएं। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति, केंद्र और राज्य सरकार के बीच संबंधों को मजबूत करती है। अखिल भारतीय सेवाएं ही सबसे महत्वपूर्ण सूत्र हैं जो भारतीय संघ और राज्यों को एक साथ जोड़ते हैं। पूर्व आईपीएस अधिकारियों के रूप में हम आईपीएस अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आने के लिए प्रोत्साहित करने तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के वृहद एवं सूक्ष्म स्तर पर योगदान के लिए भारत सरकार की पहल का समर्थन करते हैं।
सरकार ने नियम आसान बनाए तो वहीं चेताया भी
आईपीएस, केंद्रीय प्रतिनियुक्ति को हल्के में न लें, इसके लिए केंद्र सरकार ने कई वर्ष पहले प्रतिनियुक्ति के नियम कुछ आसान बनाए थे तो वहीं अफसरों को चेताया भी था। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया था कि किसी आईपीएस को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए अनुमोदित किया जाता है और वह अपनी नियुक्ति लेने में विफल रहता है तो उसे पांच वर्ष की अवधि के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति और विदेश में नियुक्ति/परामर्श से वंचित कर दिया जाएगा। आईपीएस अधिकारियों की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति 'आईपीएस कार्यकाल नीति' के अंतर्गत शासित होती है। उक्त नीति के पैरा 17 के अनुसार, कोई अधिकारी, जिसे केंद्र सरकार के तहत किसी पद पर नियुक्ति के लिए अनुमोदित किया जाता है। यदि कोई आईपीएस अपनी नियुक्ति लेने में विफल रहता है तो उसे पांच वर्ष की अवधि के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति और विदेश में नियुक्ति से वंचित कर दिया जाएगा।
इस सुझाव को मान लिया गया था
केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक कमेटी ने सुझाव दिया था कि आईपीएस डीआईजी की प्रतिनियुक्ति के लिए पैनल प्रक्रिया को समाप्त कर दिया जाए। इसके पूरा होने में काफी समय लगता है। सरकार के इस कदम का मकसद, केंद्र में डीआईजी-रैंक के अधिकारियों की भारी कमी को दूर करना था। वह सुझाव मान लिया गया था। इसके बाद सरकार को यह उम्मीद जगी थी कि डीआईजी-रैंक के अधिकारियों के लिए पैनल सिस्टम को खत्म करने से अब प्रतिनियुक्ति पर अधिक आईपीएस केंद्र में आ सकेंगे। मनोनयन प्रक्रिया पूरी होने में करीब एक साल लग जाता था। केंद्र ने 'अखिल भारतीय सेवा' नियमों में संशोधन भी किया था। उसमें कहा गया था कि केंद्र सरकार, आईएएस व आईपीएस अधिकारी को राज्य की अनुमति या बिना अनुमति के भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर बुला सकती है।
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सीबीआई और आईबी में नहीं आना चाहते एसपी
सीबीआई जैसी प्रतिष्ठित जांच एजेंसी में आईपीएस एसपी के 73 पद स्वीकृत हैं, लेकिन मौजूदा समय में वहां 54 पद खाली पड़े हैं। इंटेलिजेंस ब्यूरो 'आईबी' में एसपी आईपीएस के 83 पद मंजूर किए गए हैं। अभी 55 पद रिक्त पड़े हैं। आईबी में डीआईजी आईपीएस के 63 पद रिजर्व हैं। हैरानी की बात है कि इनमें से 30 पद खाली पड़े हैं। बीपीआरएंडी में आईपीएस एसपी के छह पदों में से तीन खाली हैं। बीएसएफ में आईपीएस डीआईजी के 26 पद हैं, लेकिन 11 पद खाली हैं। आईजी की बात करें तो बीएसएफ में आईपीएस के लिए 21 पद स्वीकृत हैं। मौजूदा समय में 6 पद खाली पड़े हैं। सीआईएसएफ में आईपीएस डीआईजी के 20 पद मंजूर हैं, लेकिन 9 पद रिक्त हैं। सीआरपीएफ में आईपीएस आईजी के 23 पदों में से छह तो वहीं डीआईजी के लिए स्वीकृत 38 पदों में से आठ खाली हैं।
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डीआईजी के पद भरने की संख्या में बढ़ोतरी
हालांकि इस वर्ष फरवरी से लेकर अभी तक डीआईजी के कई पदों को भरा गया है। पश्चिम बंगाल कैडर के डीआईजी अवधेश पाठक (आईपीएस 2009) को प्रतिनियुक्ति पर सीआरपीएफ में लगाया गया है। पश्चिम बंगाल कैडर के डीआईजी अन्नाप्पा ई (आईपीएस 2009) को भी सीआरपीएफ में पोस्टिंग दी गई है। एनएन त्रिपाठी, पश्चिम बंगाल कैडर के (आईपीएस 2009) को सीआईएसएफ में लगाया गया है। मार्च में तमिलनाडु कैडर के (आईपीएस 2003) आर सुधाकर को एनसीबी में डीडीजी लगाया गया है। एजीएमयूटी कैडर के सुजीत कुमार (आईपीएस 2007) को सीआरपीएफ में डीआईजी की पोस्टिंग दी गई है। उत्तर प्रदेश कैडर के हिमांशु कुमार (आईपीएस 2010) को आईटीबीपी में डीआईजी लगाया गया है। इन नियुक्तियों को मिलाएं तो करीब साठ पद अभी भी रिक्त पड़े हैं।
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2024 व 2023 में नहीं भरे जा सके पद
केंद्र में आईपीएस प्रतिनियुक्ति की एक मार्च 2024 की स्थिति देखें तो डीजी के लिए स्वीकृत 15 पदों में से दो पद खाली थे। एसडीजी के 12 पदों में दो पद रिक्त थे। एडीजी लेवल के 25 में से 3 पद रिक्त थे। आईजी के 149 पदों में से 30 पद रिक्त थे। डीआईजी के 256 पदों में से 70 पद रिक्त थे। केंद्र में बतौर प्रतिनियुक्ति एसपी आईपीएस के 228 पदों में से 132 पद खाली थे। केंद्रीय गृह मंत्रालय की तीन मार्च 2023 की स्थिति के अनुसार, विभिन्न केंद्रीय सुरक्षा बलों, आयोगों और जांच एवं खुफिया एजेंसियों में डीआईजी 'आईपीएस' के लिए 255 पद स्वीकृत थे, जिनमें से 77 पद खाली पड़े थे। इससे पहले खाली पदों की यह संख्या 120 से 186 के बीच रही है। दिसंबर 2021 की स्थिति के अनुसार, आईपीएस डीआईजी के लिए 252 पद स्वीकृत थे, 118 पद रिक्त थे। इसी तरह एसपी 'आईपीएस' के लिए 203 पद मंजूर किए गए, लेकिन 104 पद खाली पड़े रहे। आईजी के लिए मंजूर 140 पदों में से 29 पद रिक्त थे। उस वक्त अनेक पद, जो भरे हुए दिखाए गए थे, वे आईपीएस से नहीं, बल्कि अस्थायी तौर से सीएपीएफ अधिकारियों के जरिए भरे गए थे।
2020 में आईपीएस प्रतिनियुक्ति की स्थिति
जुलाई 2020 की स्थिति के मुताबिक, केंद्र में बतौर प्रतिनियुक्ति डीआईजी 'आईपीएस' के लिए 254 पद स्वीकृत थे। इनमें से 164 पद थे। आईजी 'आईपीएस' के लिए स्वीकृत 135 पदों में से 20 पद खाली पड़े थे। डीजी रैंक के लिए 13 पद स्वीकृत किए गए थे, जिनमें से दो पद खाली थे। एसडीजी 'आईपीएस' के 10 में से 3 पद रिक्त थे। एडीजी 'आईपीएस' के 27 पदों में से चार पद खाली रहे। उस दौरान एसपी 'आईपीएस' के लिए स्वीकृत पदों की संख्या 199 थी, मगर इनमें से 97 पद रिक्त रहे। हैरानी की बात रही कि उस वर्ष बीएसएफ में आईपीएस डीआईजी के 26 पदों में से 22 पद खाली थे। सीआरपीएफ में ये पद 38 थे, जिनमें से केवल एक ही पद भरा हुआ था। सीबीआई में 35 में से 20 पद खाली थे, जबकि सीआईएसएफ में 20 में से 16 पद रिक्त थे। आईबी में आईपीएस डीआईजी के 63 में से 28 पद और आईपीएस एसपी के 83 में से 49 पद खाली रह गए थे।
सख्त जॉब से बचना चाहते हैं आईपीएस अधिकारी
बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद का कहना है, आईपीएस अधिकारी किसी भी तरह की सख्त जॉब से बचना चाहते हैं। उन्हें अपने राज्य में एसपी के पद पर जिला पुलिस की कमान संभालने का मौका मिलता है, इसलिए वे वहां से कहीं नहीं जाना चाहते। जब वे डीआईजी बनते हैं तो खुद के लिए सुविधा वाली पोस्टिंग तलाशते हैं। अगर उन्हें वह पद केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर नहीं मिलता तो वे ऐसे पद पर ज्वाइन नहीं करते। केंद्रीय पुलिस संगठन या अर्धसैनिक बलों में डीआईजी बनकर आईपीएस नहीं आना चाहते। इन बलों में डीआईजी का पद 'फील्ड पोस्टिंग' के अंतर्गत आता है। बॉर्डर एरिया में तैनाती होती है। कई अफसर हेडक्वार्टर में रहने का जुगाड़ कर लेते हैं, लेकिन ज्यादातर डीआईजी को दूरदराज की यूनिटों में पोस्टिंग मिलती है। आईजी और एडीजी जैसे पद ज्यादातर मुख्यालयों में होते हैं, इसलिए आईपीएस यहां तुरंत ज्वाइन कर लेते हैं। खाली पड़े पदों पर कैडर अधिकारियों को स्थायी पदोन्नति नहीं दी जाती। जब आईपीएस अफसर 'डीआईजी' के पद पर ज्वाइन नहीं करता है तो कुछ पदों को कैडर अधिकारियों की तरफ डायवर्ट कर दिया जाता है। ये पद अस्थायी तौर पर कैडर अधिकारियों को दिए जाते हैं। अगर स्थायी तौर पर उनकी नियुक्ति होती है तो उन्हें समय रहते प्रमोशन मिल सकता है, लेकिन ऐसा नहीं किया जाता।
17 सेवानिवृत्त अधिकारियों ने की थी अपील
चार साल पहले भारतीय पुलिस सेवा (आईपीस) के 17 सेवानिवृत्त अधिकारियों ने सेवारत आईपीएस से केंद्र सरकार के तहत सेवा देने के लिए आगे आने की अपील की थी। पूर्व अफसरों ने कहा, आईपीएस को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आना चाहिए। उन्हें यहां पर विभिन्न जांच एजेंसियों और सुरक्षा बलों में काम करने का मौका मिलता है। वे समय रहते इन अवसरों का लाभ उठाएं। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति, केंद्र और राज्य सरकार के बीच संबंधों को मजबूत करती है। अखिल भारतीय सेवाएं ही सबसे महत्वपूर्ण सूत्र हैं जो भारतीय संघ और राज्यों को एक साथ जोड़ते हैं। पूर्व आईपीएस अधिकारियों के रूप में हम आईपीएस अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आने के लिए प्रोत्साहित करने तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के वृहद एवं सूक्ष्म स्तर पर योगदान के लिए भारत सरकार की पहल का समर्थन करते हैं।
सरकार ने नियम आसान बनाए तो वहीं चेताया भी
आईपीएस, केंद्रीय प्रतिनियुक्ति को हल्के में न लें, इसके लिए केंद्र सरकार ने कई वर्ष पहले प्रतिनियुक्ति के नियम कुछ आसान बनाए थे तो वहीं अफसरों को चेताया भी था। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया था कि किसी आईपीएस को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए अनुमोदित किया जाता है और वह अपनी नियुक्ति लेने में विफल रहता है तो उसे पांच वर्ष की अवधि के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति और विदेश में नियुक्ति/परामर्श से वंचित कर दिया जाएगा। आईपीएस अधिकारियों की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति 'आईपीएस कार्यकाल नीति' के अंतर्गत शासित होती है। उक्त नीति के पैरा 17 के अनुसार, कोई अधिकारी, जिसे केंद्र सरकार के तहत किसी पद पर नियुक्ति के लिए अनुमोदित किया जाता है। यदि कोई आईपीएस अपनी नियुक्ति लेने में विफल रहता है तो उसे पांच वर्ष की अवधि के लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति और विदेश में नियुक्ति से वंचित कर दिया जाएगा।
इस सुझाव को मान लिया गया था
केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक कमेटी ने सुझाव दिया था कि आईपीएस डीआईजी की प्रतिनियुक्ति के लिए पैनल प्रक्रिया को समाप्त कर दिया जाए। इसके पूरा होने में काफी समय लगता है। सरकार के इस कदम का मकसद, केंद्र में डीआईजी-रैंक के अधिकारियों की भारी कमी को दूर करना था। वह सुझाव मान लिया गया था। इसके बाद सरकार को यह उम्मीद जगी थी कि डीआईजी-रैंक के अधिकारियों के लिए पैनल सिस्टम को खत्म करने से अब प्रतिनियुक्ति पर अधिक आईपीएस केंद्र में आ सकेंगे। मनोनयन प्रक्रिया पूरी होने में करीब एक साल लग जाता था। केंद्र ने 'अखिल भारतीय सेवा' नियमों में संशोधन भी किया था। उसमें कहा गया था कि केंद्र सरकार, आईएएस व आईपीएस अधिकारी को राज्य की अनुमति या बिना अनुमति के भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर बुला सकती है।