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जस्टिस जोसेफ पर जंगः SC का जज बनाने की सिफारिश वापस, सरकार ने कहा- पुनर्विचार करे कोलेजियम

Thu, 26 Apr 2018 04:32 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 26 Apr 2018 04:32 PM IST
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Union Government asked Supreme Court Collegium to rethink on elevation of justice KM Joseph
केंद्र सरकार ने गुरुवार को जस्टिस केएम जोसेफ को सर्वोच्च न्यायालय में जज नियुक्त करने की सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम की सिफारिश को लौटा दिया और इस निर्णय पर पुनर्विचार करने के लिए कहा। सरकार का यह कदम न्यायपालिका और विधायिका के बीच की खाई को और बढ़ा सकता है। 
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कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भारत के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को आज सुबह चिट्ठी लिखकर पांच वरिष्ठतम जजों के समूह, कोलेजियम को जस्टिस जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त करने की सिफारिश करने के अपने फैसले पर पुनर्विचार की अपील की। सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम सुप्रीम कोर्ट के जजों का चयन करता है। 
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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बतौर जज नियुक्ति के लिए वरिष्ठ वकील इंदु मल्होत्रा के नाम को मंजूरी देने के एक दिन बाद यह कदम उठाया और उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसेफ पर लिए गए निर्णय को बरकरार रखा। 
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गौरतलब है कि 2016 में अपने एक फैसले में जस्टिस जोसेफ ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन रद्द कर दिया था, जिसके बाद हरीश रावत की कांग्रेस सरकार वापस सत्ता में लौटी थी। इस फैसले को केंद्र की बीजेपी सरकार के लिए एक झटके के तौर पर देखा गया था। जोसेफ के नाम को मंजूरी नहीं देने के सरकार के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कड़ी प्रतिक्रियाएं दी हैं और इसे "परेशान" करने वाला बताया है।

क्या राष्ट्रपति शासन न लगाने का फैसला बना वजह

Union Government asked Supreme Court Collegium to rethink on elevation of justice KM Joseph
इससे पहले केंद्र सरकार ने वरिष्ठ वकील इंदु मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट की जज बनाए जाने की हरी झंडी दी। वहीं उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के एम जोसेफ की पदोन्नति रोके जाने का फैसला लिया। जोसेफ की नियुक्ति रोके जाने पर  पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने एक के बाद एक तीन ट्वीट कर केंद्र सरकार के निर्णय पर सवाल खड़े किए हैं। 

वहीं सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट विकास सिंह ने कहा कि इंदु मल्होत्रा एक बेहतरीन वकील हैं और वह एक महान जज साबित होंगी। उन्होंने सरकार के रुख पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसी कोई वजह नहीं है कि जस्टिस जोसेफ के नाम को मंजूरी न दी जाए।  

Delighted that Ms Indu Malhotra will be sworn in as Judge of the Supreme Court tomorrow. Disappointed that Justice K M Joseph's appointment is still on hold.

— P. Chidambaram (@PChidambaram_IN) April 26, 2018

 

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पी चिदंबरम ने ट्वीट किया कि, 'खुश हूं कि इंदु मल्होत्रा सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगी, लेकिन निराश हूं कि जस्टिस केएम जोसेफ की नियुक्ति अभी भी रोक कर रखी गई है।  चिदंबरम ने अपने दूसरे ट्वीट में पूछा है कि, 'केएम जोसेफ की पदोन्नति  को रोके जाने की वजह क्या है? आखिर क्यों रोकी गई है जोसेफ की पदोन्नति? उन्होंने सवाल किया कि, 'क्या इसके लिए उनका राज्य, उनका धर्म या उत्तराखंड केस में उनका फैसला लेना जिम्मेदार है?'

As the law stands now, the recommendation of the SC collegium is final and binding in the appointment of judges.
Is the Modi government above the law?

— P. Chidambaram (@PChidambaram_IN) April 26, 2018

पी चिदंबरम ने लिखा, 'कानून के मुताबिक, जज नियुक्त में कॉलेजियम की सिफारिश ही अंतिम है। क्या मोदी सरकार कानून से ऊपर हो गई है?' इससे पहले बुधवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की सिफारिश मानते हुए वरिष्ठ वकील इंदु मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किए जाने को हरी झंडी दे दी है। इंदु सुप्रीम कोर्ट में वकील से सीधे जज बनने वाली पहली महिला होंगी। न्यायमूर्ति जोसेफ उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश हैं। कोलेजियम ने फरवरी में अपनी सिफारिश भेजी थी।  
 

Union Government asked Supreme Court Collegium to rethink on elevation of justice KM Joseph

चीफ जस्टिस केएम जोसेफ की खंडपीठ ने 21 मार्च 2016 को उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के फैसले को पलट दिया था।  इसकी वजह से हरीश रावत एक बार फिर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बन गए थे।  जस्टिस जोसेफ और जस्टिस वीके बिष्ट की बेंच ने अपने फैसले में कहा था, 'केंद्र की ओर से राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्धारित नियम के खिलाफ है।'

जस्टिस जोसेफ के प्रमोशन न किए जाने के बारे में विशेषज्ञों का मानना है कि उनके नाम की सिफारिश पर सरकार को लग रहा है कि कोलेजियम ने वरिष्ठता और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को नजरअंदाज किया है। जस्टिस जोसेफ हाईकोर्ट के 669 जजों की वरिष्ठता सूची में 42वें नंबर पर हैं।

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