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CUET: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान ने तमिलनाडु के उच्च शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र, कहा सीयूईटी राज्यों के अधिकारों में हस्तक्षेप नहीं करता

Mon, 25 Apr 2022 02:12 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Mon, 25 Apr 2022 02:12 AM IST
सार

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए केंद्र सरकार को भी देश में शिक्षा को बढ़ावा देने के उपाय करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि सीयूईटी का मकसद कोचिंग लेने की आवश्यकता को समाप्त करना है। यह परीक्षा माध्यम के रूप में 13 भाषाओं के चयन का विकल्प देती है और पहुंच बढ़ाते हुए वित्तीय बोझ को कम करती है।

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Union Education Minister Dharmendra Pradhan letter to Tamil Nadu Higher Education Minister CUET does not infringe upon rights of states
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान। - फोटो : ANI

विस्तार

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रविवार को तमिलनाडु के उच्च शिक्षा मंत्री के पोनमुडी को पत्र लिखकर कहा कि संयुक्त विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी) राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों के अधिकारों का उल्लंघन नहीं करती है।

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दरअसल, तमिलनाडु विधानसभा ने 12 अप्रैल को मुख्यमंत्री एमके स्टालिन द्वारा पेश एक प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था, जिसमें केंद्र से सीयूईटी का विचार त्यागने का आग्रह किया गया था। इसी के जवाब में धर्मेंद्र प्रधान ने यह पत्र लिखा है।
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धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “चूंकि, शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए केंद्र सरकार को भी देश में शिक्षा को बढ़ावा देने के उपाय करने का अधिकार है।” उन्होंने कहा, “सीयूईटी का मकसद कोचिंग लेने की आवश्यकता को समाप्त करना है। यह परीक्षा माध्यम के रूप में 13 भाषाओं के चयन का विकल्प देती है और पहुंच बढ़ाते हुए वित्तीय बोझ को कम करती है।” 

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केंद्रीय मंत्री ने तर्क दिया कि कोचिंग संस्कृति को प्रोत्साहित करने वाले योगात्मक मूल्यांकन के विपरीत, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 प्रारंभिक मूल्यांकन पर जोर देती है।



उन्होंने कहा कि "सीयूईटी परीक्षा वंचित समूहों के हित में है। छात्र एक आवेदन पत्र के साथ अपनी पसंद के अनुसार एक से अधिक विश्वविद्यालयों में आवेदन कर सकते हैं, जिससे वित्तीय बोझ कम होगा और पहुंच में वृद्धि होगी। उनके पास देश भर के सैकड़ों परीक्षा केंद्रों में से अपनी पसंद के परीक्षा केंद्रों का चयन करने के विकल्प के साथ 13 भाषाओं में किसी में भी प्रवेश परीक्षा में बैठने का विकल्प होगा। इसमें राज्यों / केंद्र-शासित प्रदेशों के अधिकारों के उल्लंघन का कोई मामला नहीं है।"

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