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UN Report: महिलाओं को बराबरी का दर्जा मिलने में लगेंगे 40 वर्ष; सात दशक में दूर हो पाएगी बाल विवाह की कुप्रथा

Thu, 19 Sep 2024 04:10 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Thu, 19 Sep 2024 04:10 AM IST
सार

महिला सशक्तीकरण और लैंगिक समानता के लिए काम कर रहे संगठन यूएन वीमेन और यूनाइटेड नेशंस डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक एंड सोशल अफेयर्स ने रिपोर्ट में खुलासा किया है कि महिलाओं और पुरुषों के बीच असमानता की खाई अभी भी बहुत गहरी है जिसे भरना आसान नहीं है।

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UN report claims it will take 40 years for women to get equal status
महिला मजदूर। - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

दुनियाभर में महिलाओं की समानता को लेकर कितनी भी बड़ी-बड़ी बातें की जाती हों, लेकिन सच यह है कि लैंगिक असमानता की खाई पाटने में अभी और 40 वर्ष लगेंगे। संयुक्त राष्ट्र ने रिपोर्ट में कहा है कि संसद में महिलाओं की बराबर की हिस्सेदारी किसी सपने से कम नहीं। यदि मौजूदा रफ्तार से देखें तो इस सपने को 2063 तक साकार करना सम्भव नहीं होगा।

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महिला सशक्तीकरण और लैंगिक समानता के लिए काम कर रहे संगठन यूएन वीमेन और यूनाइटेड नेशंस डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक एंड सोशल अफेयर्स ने रिपोर्ट में खुलासा किया है कि महिलाओं और पुरुषों के बीच असमानता की खाई अभी भी बहुत गहरी है जिसे भरना आसान नहीं है। प्रोग्रेस ऑन द सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स : द जेंडर स्नेपशॉट 2024 नामक इस रिपोर्ट में बाल विवाह को भी लेकर चिंताजनक खुलासा किया है। इसके अनुसार बाल विवाह की कुप्रथा को दुनिया से दूर करने में सात दशकों से अधिक का समय बीत जाएगा। आज भी हर पांच में से एक बच्ची का विवाह बालिग होने से पहले हो रहा है।
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महिला सशक्तीकरण की दिशा में हो रही प्रगति
रिपोर्ट में इस बात को भी स्वीकार किया गया है कि दुनिया लैंगिक समानता और महिला सशक्तीकरण की दिशा में प्रगति कर रही है। अब संसद में हर चार सीटों में से एक पर महिला सांसद काबिज है, जो 10 साल पहले की तुलना में बड़े सुधार का इशारा है। इसी तरह आज 10 फीसदी से भी कम महिलाएं और बच्चियां भीषण गरीबी के भंवर जाल में फंसी हैं, जो कोरोना महामारी के बाद एक बड़ा सुधार है। महामारी के दौर में यह खाई 25 फीसदी तक पहुंच गई थी। पहली जेंडर स्नैपशॉट रिपोर्ट के बाद पुरुषों और महिलाओं के बीच के अंतर को भरने के लिए दुनियाभर में 56 नए कानून पारित किए गए हैं। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। इसके बावजूद महिलाओं को पुरुषों के बराबर दर्जा हासिल करने में अभी भी लंबा सफर तय करना होगा। इस दिशा में प्रगति तो हो रही है, लेकिन उसकी रफ्तार बेहद सुस्त है।
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गरीबी के गर्त से बाहर निकालने में लगेंगे 137 वर्ष
रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए महिलाओं और बच्चियों को गरीबी के गर्त से बाहर निकालने के लिए अभी 137 वर्षों का इंतजार करना होगा। रिपोर्ट में जो आंकड़े साझा किए गए हैं वो इस बात की पुष्टि करते हैं कि लैंगिक समानता हासिल करने के लिए निर्धारित सतत विकास के इस पांचवें लक्ष्य और उससे जुड़े सभी संकेतक फिलहाल पहुंच से काफी दूर हैं।

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