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कांग्रेस: यूएस नागरिक पर नहीं लगा यूएपीए; जयराम रमेश केंद्र पर हमलावर, पूछा- किसके दबाव में झुकी मोदी सरकार?

Wed, 09 Sep 2026 11:25 AM IST
प्रशांत तिवारी एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Wed, 09 Sep 2026 11:25 AM IST
सार

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की चार्जशीट में गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धाराएं नहीं लगाए जाने पर केंद्र सरकार से सवाल किया है। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं अमेरिकी दबाव में आतंकवाद से जुड़े आरोप तो नहीं हटाए गए। 

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UAPA charges dropped against US citizen VanDyke congress attacks asks whose pressure did Modi government
वैनडाइक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

म्यांमार में सशस्त्र समूहों को प्रशिक्षण देने के आरोप में गिरफ्तार एक अमेरिकी नागरिक के खिलाफ एनआईए की चार्जशीट में यूएपीए की धारा न लगाने पर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ दाखिल आरोपपत्र में गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए की धाराएं नहीं लगाई हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या एजेंसी पर आतंकवाद से जुड़े आरोप हटाने के लिए किसी तरह का 'दबाव' डाला गया था।

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जयराम रमेश ने उठाया अमेरिकी दबाव का सवाल
एक्स पर एक पोस्ट के जरिए जयराम रमेश ने सवाल किया कि क्या एनआईए का यह फैसला निष्पक्ष और सही जांच के नतीजे पर आधारित था या फिर अमेरिकी अधिकारियों के कहने पर मोदी सरकार के दबाव में लिया गया। क्या एनआईए ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक के खिलाफ आतंकवाद से जुड़े आरोप सही जांच के बाद हटाए या अमेरिकी अधिकारियों के कहने पर मोदी सरकार ने तुरंत ऐसा करने के लिए दबाव डाला? इसके बदले भारत को क्या फायदा मिलने की उम्मीद है? यह दादागिरी जैसा लगता है।"
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'जेल में नहीं मिल रहे बुनियादी अधिकार'
इससे पहले 2 सितंबर को मैथ्यू वैनडाइक के परिवार की ओर से चलाए जा रहे एक एक्स खाते से अमेरिकी सरकार से उन्हें तिहाड़ जेल से रिहा कराने की अपील की गई थी। परिवार ने दावा किया था कि मैथ्यू वैनडाइक बेगुनाह हैं। परिवार ने कहा, 'मैथ्यू वैनडाइक का परिवार अमेरिकी सरकार से तुरंत राजनयिक दखल की मांग कर रहा है, क्योंकि उन्हें अभी भी कैदियों के बुनियादी अधिकार नहीं मिल रहे हैं और उन्हें भारत के दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल की जेल संख्या 8/9 में अकेले रखा जा रहा है। मैथ्यू पर लगे सभी आरोप झूठे हैं। अपने करियर के दौरान उन्होंने मानवीय तकलीफों को दर्ज किया है और संघर्ष तथा संकट से प्रभावित लोगों तक मानवीय मदद पहुंचाई है।'
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सात आरोपियों के खिलाफ एनआईए ने दाखिल किया आरोपपत्र
इससे पहले मंगलवार को एनआईए ने मार्च 2026 में दर्ज एक मामले में छह यूक्रेनी नागरिकों और अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक के खिलाफ राउज एवेन्यू अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। यह मामला शुरुआत में यूएपीए के तहत दर्ज किया गया था। हालांकि, एजेंसी की ओर से दाखिल आरोपपत्र में यूएपीए की धाराओं का इस्तेमाल नहीं किया गया है।

यूएपीए के तहत अपराध मिलने पर दाखिल होगा पूरक आरोपपत्र
एनआईए के विशेष लोक अभियोजक ने कहा कि इस मामले में जांच अभी भी जारी है। अगर जांच के दौरान यूएपीए के तहत कोई अपराध बनता है, तो एजेंसी पूरक आरोपपत्र दाखिल कर सकती है। एनआईए ने मौजूदा आरोपपत्र में विदेशियों से संबंधित कानून की धारा 21 और 23 लगाई है। ये ऐसे अपराध हैं, जिन्हें विदेशियों के क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय के स्तर पर समझौते के जरिए निपटाया जा सकता है यानी इनमें निर्धारित प्रक्रिया के तहत समझौते की गुंजाइश होती है। आरोपपत्र विशेष एनआईए न्यायाधीश प्रशांत शर्मा के सामने दाखिल किया गया। अदालत ने मामले पर विचार करने के लिए 1 अक्टूबर की तारीख तय की है।

इन पर क्या है आरोप?
इन सातों आरोपियों को म्यांमार में ऐसे जातीय सशस्त्र समूहों को प्रशिक्षण देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें कथित तौर पर भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना गया था।

कौन-कौन हैं सात आरोपी?
एनआईए ने मैथ्यू एरॉन वैनडाइक (अमेरिकी नागरिक) के साथ यूक्रेन के छह नागरिकों- हर्बा पेट्रो, स्लीवियाक तारास, इवान सुकमनोव्स्की, स्टेफनकिव मारियन, होंचारुक मक्सिम और कामिन्स्की विक्टर को गिरफ्तार किया था। वहीं, खुद को युद्धक विशेषज्ञ बताने वाले और सुरक्षा कंपनी 'सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल' के संस्थापक मैथ्यू वैनडाइक को 13 मार्च की रात करीब 9 बजे नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक समन्वित कार्रवाई के तहत गिरफ्तार किया गया था।

हथियार और प्रशिक्षण मुहैया कराने का आरोप
आरोप है कि ये लोग म्यांमार में जातीय सशस्त्र समूहों को हथियार और आतंकवादी गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाले उपकरण मुहैया कराने के साथ-साथ उन्हें प्रशिक्षण देने में शामिल थे। इसी मामले में यूएपीए की धारा 18 यानी आतंकवादी साजिश और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को 17 मार्च को 11 दिनों की एनआईए हिरासत में भेजा गया था। मामले की जानकारी के मुताबिक, मई 2026 में गिरफ्तारी के बाद आरोपी करीब 180 दिनों तक हिरासत में रहे।


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जांच अभी खत्म नहीं हुई
हालांकि, एनआईए का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। एजेंसी के मुताबिक, अगर जांच के दौरान यूएपीए के तहत कोई अपराध सामने आता है या साबित होता है, तो उसके आधार पर पूरक आरोपपत्र दाखिल किया जा सकता है।

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