फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Two yards distance insufficient: Chief Scientific Advisor of the country set new guidelines for safety from covid-19

कोरोना : देश के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार बोले- दो गज नहीं अब 11 गज की दूरी है जरूरी

Mon, 24 May 2021 07:25 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Mon, 24 May 2021 07:25 PM IST
सार

कोरोना महामारी से बचाव के लिए 'दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी' जैसे कायदे पुराने पड़ते जा रहे हैं। संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए अब नए तरीकों पर जोर दिया जाने लगा है। 
 

विज्ञापन
Two yards distance insufficient: Chief Scientific Advisor of the country set new guidelines for safety from covid-19
सांकेतिक चित्र - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

कोविड-19 से बचने के लिए मास्क पहनना, हाथ धोना, दो गज की शारीरिक दूरी रखना जैसे मंत्र अब नाकाफी होते जा रहे हैं। सरकारी विज्ञापनों में भी इन्हीं बातों पर जोर दिया जाता था, लेकिन सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार विजयराघवन के अनुसार अब बचाव के नए मानक तय किए गए हैं। 

विज्ञापन


देश के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय के अनुसार कोविड-19 से सुरक्षा के प्रोटोकॉल में बदलाव किया गया है। अब सार्स-कोव-2 वायरस 10 मीटर दूर तक हवा में रह सकता है। यह करीब 33 फीट होता है
विज्ञापन


पहले दो गज की दूरी जरूरी थी, अब 11 गज की 
नए मानकों के अनुसार कोरोना वायरस से बचाव के लिए पहले दो गज की दूरी काफी थी, लेकिन अब 10 मीटर यानी 33 फीट या करीब 11 गज की दूरी जरूरी है। चूंकि वायरस संक्रमित व्यक्ति की छींक या खांसी के जरिए उड़कर इतनी दूरी तक हवा में फैल सकता है, इसलिए इससे बचाव के लिए इतनी दूरी जरूरी है। हां, यदि संक्रमित व्यक्ति या उसके पास खड़े व्यक्ति ने मास्क लगा रखा है तो संक्रमण फैलने का खतरा कम हो सकता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


'स्टाप द ट्रांसमिशन, क्रश द पेंडेमिक'
इस शीर्षक की नई गाइडलाइन में देश के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार के. विजयराघवन ने कहा है कि खुले इलाकों में संक्रमित होने का खतरा कम है, क्योंकि वायरस तेजी से बिखर जाता है। उन्होंने कहा कि जब भी कोई संक्रमित व्यक्ति छींकता या खांसता है तो उसकी नाक या मुंह से ड्रॉपलेट्स निकलते हैं और वे दूसरों को संक्रमित करते हैं। ये ही वायरस किसी सतह पर जम जाते हैं और जब दूसरा कोई गैर संक्रमित उस सतह को छूने के बाद अपने नाक, मुंह या आंखों को छूता है तो ये वायरस इनके माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाता है।


सलीवा, बहती नाक के निकलते हैं ड्रॉपलेट्स
गाइडलाइन के अनुसार संक्रमित व्यक्ति के गले के सलीवा या नाक बहने के कारण जो ड्रॉपलेट्स या एरोसोल निकलते हैं, उनसे दूसरे व्यक्ति के संक्रमित होने का खतरा होता है। जब संक्रमण ज्यादा होता है तो बड़े आकार के ड्रॉपलेट्स जमीन या सतह पर गिरते हैं, जबकि कम संक्रमण होने पर ये कण हल्के होने से हवा में दूर तक फैल जाते हैं। इसी से 10 मीटर यानी करीब 11 गज तक उनसे संक्रमण फैलने का खतरा रहता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed