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Hindi News ›   India News ›   Tunnel Collapse in Sikkim's Namchi Traps 12 Workers; Rescue Operation Underway

सिक्किम सुरंग हादसा: मीथेन गैस रिसाव और भूस्खलन से टनल हुई बंद, 27 मजदूरों के फंसे होने की आशंका

Mon, 20 Jul 2026 08:12 PM IST
राहुल कुमार अमर उजाला ब्यूरो, गंगटोक।
अमर उजाला ब्यूरो, गंगटोक। Published by: राहुल कुमार Updated Mon, 20 Jul 2026 08:12 PM IST
सार

Tunnel Collapse In Sikkim: सिक्किम के नामची जिले में निर्माणाधीन सुरंग में मीथेन गैस रिसाव और भूस्खलन के बाद कई मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। राहत अभियान जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी के कारण बेहद मुश्किल हो गया है। प्रशासन अभी फंसे लोगों की सही संख्या का सत्यापन कर रहा है। फिलहाल तक 27 श्रमिकों के दबे होने की आशंका है। आइए, विस्तार से मामले को जानते हैं...

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Tunnel Collapse in Sikkim's Namchi Traps 12 Workers; Rescue Operation Underway
सिक्किम में भूस्खलन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सिक्किम के नामची जिले में निर्माणाधीन समरदुंग (झोलुंगे) सुरंग में हुए हादसे ने पूरे इलाके में चिंता बढ़ा दी है। सुरंग के भीतर मीथेन गैस रिसाव और उसके बाद हुए भूस्खलन के कारण कई मजदूरों के फंसने की आशंका है। शुरुआत में 17 मजदूरों के फंसे होने की जानकारी सामने आई थी, लेकिन बाद में यह संख्या बढ़कर 27 तक पहुंचने की आशंका जताई गई। हालांकि जिला प्रशासन ने अभी अंतिम संख्या की पुष्टि नहीं की है और रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी के कारण राहत अभियान बेहद कठिन बना हुआ है।

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सिक्किम सुरंग हादसे पर प्रशासन क्या बोला?

  • तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना की समरदुंग (झोलुंगे) सुरंग में हुआ हादसा।
  • नामची जिला प्रशासन के मुताबिक कंपनी के उपस्थिति रजिस्टर और अन्य रिकॉर्ड मिलाए जा रहे हैं।
  • भारत की सबसे बड़ी जलविद्युत विकास संस्था- एनएचपीसी लिमिटेड की है यह निर्माणाधीन परियोजना।
     

फंसे मजदूरों की संख्या को लेकर असमंजस क्यों है?

जिला प्रशासन के अनुसार कंपनी के उपस्थिति रजिस्टर, ड्यूटी रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है। इसी वजह से अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि सुरंग के भीतर कितने मजदूर फंसे हैं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक सुरंग के प्रवेश द्वार से करीब डेढ़ किलोमीटर भीतर मीथेन गैस जमा हो गई थी। गैस निकालने की कोशिश के दौरान विस्फोट जैसी स्थिति बनी और इसके बाद सुरंग के भीतर भूस्खलन हो गया। इससे सुरंग का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। कुछ मजदूर समय रहते बाहर निकल आए, जबकि कई अंदर ही फंस गए।

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सिक्किम की सुरंग में फंसे मजदूरों का रेस्क्यू कैसे?

  • मीथेन गैस रिसाव और उसके बाद हुए भूस्खलन में फंसे 25 से अधिक श्रमिक।
  • गैस निकालने की कोशिश के दौरान ब्लास्ट जैसी स्थिति बनने के बाद सुरंग के भीतर भूस्खलन।
  • जहरीली गैस के रिसाव और ऑक्सीजन की कमी के कारण राहत एवं बचाव अभियान जटिल।
  • एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, अग्निशमन दल और इमरजेंसी सर्विस टीमें तैनात।

 

बचाव अभियान में सबसे बड़ी चुनौती क्या बन रही है?

राहत एवं बचाव कार्य में सबसे बड़ी बाधा सुरंग के भीतर मौजूद जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), जिला पुलिस, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा की टीमें लगातार अभियान चला रही हैं। पश्चिम बंगाल से गैस-प्रोटेक्टिव उपकरणों से लैस विशेषज्ञ दल भी मौके पर पहुंचा है। गैस के असर से कई बचावकर्मियों को चक्कर आने और तबीयत बिगड़ने की सूचना मिली है। कुछ राहतकर्मियों को अस्पताल भेजना पड़ा, जबकि सुरंग के भीतर जाने वाले सभी दल गैस मास्क और विशेष सुरक्षा उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं।

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मजदूरों तक पहुंचने के लिए क्या कर रहा है प्रशासन?

जिला कलेक्टर अनुपा तामलिंग ने बताया कि सुरंग के भीतर वेंटिलेशन बेहतर बनाने और गैस के प्रभाव को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि बचाव दल सुरक्षित तरीके से अंदर पहुंच सके। घटनास्थल पर एंबुलेंस और चिकित्सा दल तैनात हैं। शुरुआती रेस्क्यू के दौरान अंदर गए तीन लोगों में से एक की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें रंगपो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। दो अन्य बचावकर्मी भी कुछ समय तक सुरंग के भीतर फंसे रहे। प्रशासन का कहना है कि मजदूरों तक बिना अतिरिक्त जोखिम के पहुंचना पहली प्राथमिकता है और इसी को ध्यान में रखकर चरणबद्ध तरीके से अभियान चलाया जा रहा है।



सिक्किम के हादसे पर जिला कलेक्टर क्या बोले?

  • सुरंग में फंसे श्रमिकों के रेस्क्यू के लिए पश्चिम बंगाल से विशेषज्ञ बचाव दल को बुलाया गया।
  • विशेष गैस-प्रोटेक्टिव उपकरणों से लैस है राहत और बचाव दल।
  • जिला कलेक्टर अनुपा तामलिंग ने बोले- सुरंग के भीतर वेंटिलेशन बेहतर करना प्राथमिकता।
  • फंसे मजदूरों को निकालने गई टीम के बचावकर्मियों की सेहत पर भी असर, रंगपो सीएचसी में भर्ती।
     

यह परियोजना कौन बना रहा है और आगे क्या होगा?

यह सुरंग एनएचपीसी की तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना के तहत पटेल इंजीनियरिंग द्वारा बनाई जा रही है। देर रात तक बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी रहा, लेकिन सभी फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का काम पूरा नहीं हो सका था। प्रशासन लगातार सुरंग के भीतर गैस की स्थिति पर नजर रखे हुए है और विशेषज्ञों की मदद से आगे की रणनीति बनाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक सुरंग के भीतर का वातावरण सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक हर कदम बेहद सावधानी से उठाया जाएगा।

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