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समीकरण: एक लाख करोड़..नारियल बोर्ड..सिर्फ किसानों पर नजर या यूपी चुनाव पर भी फोकस?
Thu, 08 Jul 2021 08:23 PM IST
प्रतिभा ज्योति
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली,
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली,
Published by: प्रतिभा ज्योति
Updated Thu, 08 Jul 2021 08:23 PM IST
सार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने दूसरे कैबिनेट विस्तार के बाद हुई पहली कैबिनेट बैठक में मंडियों के जरिए किसानों तक एक लाख करोड़ रुपए पहुंचाने की बात करके सरकार ने रुठे किसानों को मनाने की एक कोशिश की है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने दूसरे कैबिनेट विस्तार के बाद हुई पहली कैबिनेट बैठक में मंडियों के जरिए किसानों तक एक लाख करोड़ रुपए पहुंचाने की बात करके सरकार ने रुठे किसानों को मनाने की एक कोशिश की है। खासतौर पर 2022 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर यह फैसला किया गया है। सरकार ने किसानों से एक बार फिर आंदोलन समाप्त करने की अपील की है।
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर है खास नजर
लंबे समय से चल रहे किसान आंदोलन का असर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है जिसकी एक झलक भाजपा को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के दौरान देखने को मिला। किसान आंदोलन के कारण पश्चिम उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोक दल को संजीवनी मिल गई और भाजपा को एक सियासी झटका लगा। कहीं न कहीं किसान आंदोलन का असर ही कहा जाए कि पंचायत चुनाव में जनता का रुझान सपा और बसपा की ओर भी दिखा। सरकार की नजर किसान नेता राकेश टिकैत की अगुआई में चल रहे किसान आंदोलन पर है क्योंकि उनका असर कम से कम पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर तो है ही।
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इसलिए सरकार ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इस चुनौती का हल निकालने के लिए कृषि वापस लिए बिना किसानों को मनाने की है। इस रणनीति के तहत किसानों को मंडी के जरिए एक लाख करोड़ रुपए देने की बात कही गई है। सरकार ने किसानों की शंका का समाधान करते हुए इस बात पर जोर दिया है कि एपीएमसी मंडियों को और मजबूत किया जा रहा है और मंडिया खत्म नहीं की जाएगी। ताकि किसानों में यह भरोसा जाग सके कि मोदी सरकार किसानों के हित में काम कर रही है।
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वहीं नारियल बोर्ड एक्ट में संशोधन की बात भी आने वाले समय में गुजरात और आंध्रप्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर ही किया गया है। नारियल बोर्ड में केंद्र सरकार के नामित सदस्यों की संख्या अब 6 की जाएगी। पहले चार होती थी। जिसमें आंध्रप्रदेश और गुजरात के सदस्यों को भी जोड़ा जाएगा। कुल मिलाकर कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर ही किसानों के हित में फैसले लिए जा रहे हैं।