Politics: ट्रंप ने फिर उठाया भारत में चुनावी फंडिंग का मुद्दा; कांग्रेस ने बताया बेतुका, BJP ने कहा- हो जांच
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, 'भारत में मतदान के लिए 21 मिलियन अमेरिकी डॉलर। हम भारत में मतदान की परवाह क्यों कर रहे हैं? क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि इतना सारा पैसा भारत जा रहा है? मुझे आश्चर्य है कि जब उन्हें यह मिलता है तो वे क्या सोचते हैं। अब, यह एक रिश्वत योजना है। वहीं इस पर भाजपा और कांग्रेस ने अलग-अलग मांग रखी है।
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भाजपा ने मामले में जांच की मांग की
वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, भाजपा नेता अमित मालवीय ने आरोप लगाया कि अमेरिका से मिले धन का उपयोग भारत में डीप स्टेट एसेट्स के लिए किया जा रहा था 'जो इस तरह के खुलासे का बचाव करने और उन्हें विचलित करने का काम करते हैं।' एक्स पर ट्रंप का वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने कहा, 'अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से मतदान के लिए भारत को 21 मिलियन डॉलर भेजे जाने की बात कहने के एक दिन बाद, उन्होंने इस आरोप को दोहराया है। इस बार, उन्होंने रिश्वत का भी उल्लेख किया है।
A day after US President Donald Trump spoke about $21 million being sent to India for voter turnout, he has reiterated the charge. And no, he is not confusing it with the $29 million funneled into Bangladesh. This time, he has also mentioned kickbacks. Essentially, this money is… pic.twitter.com/Eaj9uXcFx4
विज्ञापन विज्ञापन— Amit Malviya (@amitmalviya) February 21, 2025
कांग्रेस ने श्वेत पत्र जारी करने की मांग की
इस मामले में कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में लिखा- यूएसएआईडी इन दिनों काफी चर्चा में है। इसकी स्थापना 3 नवंबर, 1961 को हुई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ से किए जा रहे दावे कम से कम कहने के लिए तो बेतुके हैं। फिर भी, भारत सरकार को जल्द से जल्द एक श्वेत पत्र जारी करना चाहिए जिसमें दशकों से भारत में सरकारी और गैर-सरकारी दोनों संस्थानों को यूएसएआईडी की तरफ से दिए गए समर्थन का विवरण हो।
USAID is very much in the news these days.
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) February 20, 2025
It was set up on November 3, 1961. Claims being made by the US President are typically nonsensical to say the least. Even so, the Govt of India should bring out a White Paper at the earliest detailing USAID's support to both…
डीओजीई ने कटौती शुरू करने के बाद उपजा पूरा विवाद
बता दें कि, ये बवाल तब शुरू हुआ, जब अमेरिकी सरकार के कार्यदक्षता विभाग (डीओजीई) ने अमेरिकी करदाताओं की तरफ से वित्तपोषित पहलों की एक सूची पोस्ट की, जिसमें 'भारत में मतदान' के लिए निर्धारित 21 मिलियन अमेरिकी डॉलर का उल्लेख था। एलन मस्क की अध्यक्षता वाले डीओजीई ने 16 फरवरी को इसे रद्द करने की घोषणा की। एक्स पर एक पोस्ट में, डीओजीई ने अमेरिकी करदाताओं की तरफ से रद्द किए गए खर्चों की संख्या सूचीबद्ध की, जिसमें 'भारत में मतदान के लिए 21 मिलियन अमेरिकी डॉलर' भी शामिल है।
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