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Tripura: पद्म श्री से सम्मानित त्रिपुरा सिविल सेवक का निधन, 1971 के दौरान लाखों शरणार्थियों की मदद की थी

Wed, 26 Apr 2023 12:42 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अगरतला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अगरतला Published by: Jeet Kumar Updated Wed, 26 Apr 2023 12:42 AM IST
सार

20 अप्रैल को हिमांशु मोहन चौधरी से मिलने गए मुख्यमंत्री माणिक साहा भी गए थे। उन्होंने भी पूर्वोत्तर के पहले पद्म श्री पुरस्कार विजेता के निधन पर शोक व्यक्त किया।

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Tripura civil servant Himangshu Mohan Chowdhury who looked after lakhs of refugees during 1971 dies
हिमांशु मोहन चौधरी - फोटो : Twitter

विस्तार

बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान सिविल सेवा अधिकारी के रूप में अपनी सेवाओं के लिए प्रतिष्ठित पद्म श्री से सम्मानित हिमांशु मोहन चौधरी का मंगलवार को यहां एक निजी अस्पताल में उम्र संबंधी बीमारियों के कारण निधन हो गया। वह 83 वर्ष के थे और उनके परिवार में दो बेटियां, रिश्तेदार और बड़ी संख्या में शुभचिंतक हैं। उसकी पत्नी की चार साल पहले मौत हो गई थी।

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मार्च 1971 में पाकिस्तानी सेना द्वारा क्रूर कार्रवाई के बाद लाखों लोग पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा भाग गए थे। उन्हें पड़ोसी देश से आए लाखों शरणार्थियों के आवास और भोजन की देखरेख करने का श्रेय दिया जाता है। 20 अप्रैल को हिमांशु मोहन चौधरी से मिलने गए मुख्यमंत्री माणिक साहा भी गए थे। उन्होंने भी पूर्वोत्तर के पहले पद्म श्री पुरस्कार विजेता के निधन पर शोक व्यक्त किया।
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जब बांग्लादेश में मुक्ति संग्राम छिड़ा, तो वह त्रिपुरा के सिपाहीजला जिले के सोनमुरा उपखंड के उप-विभागीय अधिकारी (एसडीओ) थे। उनके छोटे भाई स्नेहांशु मोहन चौधरी ने पीटीआई को बताया कि चूंकि सोनमुरा एक सीमावर्ती उपखंड है, लाखों बांग्लादेशियों ने पाकिस्तानी सेना से अपनी जान बचाने के लिए वहां शरण ली थी और यह चौधरी ही थे जिन्होंने अकेले ही 2.5 लाख बांग्लादेशी लोगों को आश्रय, भोजन और अन्य जरूरी चीजों का प्रबंध किया था।
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स्नेशांशु ने कहा कि उनके बड़े भाई ने बांग्लादेश से आए शरणार्थियों के लिए अंतिम प्रत्यावर्तन के लिए महीनों तक अथक परिश्रम किया, संकटग्रस्त प्रवासियों की जरूरतों के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। आगे उनके बारे में बताया कि युद्ध के दौरान, निर्वासन में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री ताजुद्दीन अहमद के परिवार ने सोनमुरा में चौधरी के आधिकारिक आवास में शरण ली थी। अहमद की बेटी सेमिन हुसैन रिमी, जो अब बांग्लादेश में एक सांसद हैं, वह दिसंबर 2021 में चौधरी से मिलने आई थीं और उन्हें अपने परिवार को सुरक्षित आश्रय प्रदान करने के लिए धन्यवाद दिया था। 


वर्ष 1971 में, केंद्र सरकार ने उन्हें प्रतिष्ठित पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया था। वहीं बांग्लादेश सरकार ने भी उनके योगदान की सराहना करते हुए 2013 में उन्हें 'बांग्लादेश का मित्र' पदक से सम्मानित किया।

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