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Manipur: जनजातीय मंत्रालय से 'कोई भी कुकी जनजाति' को एसटी सूची से हटाने की मांग, संगठनों की अपील

Tue, 24 Jun 2025 11:22 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Tue, 24 Jun 2025 11:22 AM IST
सार

दावा किया गया है कि कोई भी कुकी जनजाति से मणिपुर में पहले से मौजूद अनुसूचित जनजातियों की भूमि, संसाधनों और संवैधानिक विशेषाधिकारों को गंभीर खतरा है।

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Tribal ministry urged to delete Any Kuki Tribes category from Manipur ST list
मणिपुर - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

मणिपुर के दो संगठनों ने केंद्र सरकार के जनजातीय मंत्रालय से अपील की है कि वे 'कोई भी कुकी जनजाति' को राज्य की अनुसूचित जनजातियों की सूची (ST) से हटाएं। संगठनों का दावा है कि इससे विदेशियों को स्वदेशी लोगों के अधिकारों पर दावा करने और स्वदेशियों की जमीन और संसधानों के लिए खतरा पैदा होता है। मणिपुर के दो संगठनों थोडोउ इनपी मणिपुर और मैतेई अलायंस ने जनजातीय मंत्रालय को यह ज्ञापन सौंपा है। 
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मणिपुर सरकार ने भी 2023 में ऐसी ही सिफारिश की थी
इन दोनों संगठनों की अपील मणिपुर सरकार की आधिकारिक स्थिति से मेल खाती है। मणिपुर सरकार ने भी 19 अक्तूबर 2018 और 2 जनवरी 2023 औपचारिक रूप से कोई भी कुकी जनजाति को एसटी कैटेगरी से हटाने की सिफारिश की थी। ज्ञापन के अनुसार, कोई भी कुकी जनजाति की अस्पष्ट प्रकृति विदेशियों को मणिपुर में जनजातीय अधिकारों पर दावा करने की सुविधा देती है। दावा किया गया है कि इससे मणिपुर में पहले से मौजूद अनुसूचित जनजातियों की भूमि, संसाधनों और संवैधानिक विशेषाधिकारों को गंभीर खतरा है।
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'संविधान के जनजाति के बुनियादी मानदंड को पूरा नहीं करती'
मैतेई संगठनों का आरोप है कि कोई भी कुकी जनजाति की कोई भी विशिष्ट भाषा, अलग सांस्कृतिक विरासत और भौगोलिक अलगाव नहीं है, जो संविधान में अनुसूचित जनजातियों की पहचान के लिए बुनियादी मानदंड हैं। संगठनों का दावा है कि कोई भी कुकी जनजाति को साल 2003 में राजनीति से प्रेरित होकर और गैर पार्दर्शी तरीकों से जनजातीय सूची में डाला गया था। कोई भी कुकी जनजाति का कोई भी वैध आधार नहीं है। कुकी जनजाति को किसी भी अनुसूचित जनजाति द्वारा मान्यता नहीं दी गई है और इससे केवल जातीय तनाव ही बढ़ा है।  

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