फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Trauma patients suffering serious illnesses often leave hospital treatment midway due to financial reasons

अधय्यन: खर्च के बोझ में दबे 42% ट्रॉमा मरीज बीच में छोड़ते हैं इलाज, इनमें सबसे ज्यादा ब्रेन-स्पाइन इंजरी के

Sat, 06 Sep 2025 07:43 AM IST
दीपक कुमार शर्मा परीक्षित निर्भय
परीक्षित निर्भय Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sat, 06 Sep 2025 07:43 AM IST
सार

अध्ययन में चौंकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया कि इलाज बीच में छोड़ने वाले मरीजों में से 35% की छह महीनों के भीतर मौत हो गई। हालांकि 77% मरीज बाद में किसी अन्य अस्पताल पहुंचे लेकिन इनमें से ज्यादातर ने सरकारी अस्पतालों का ही सहारा लिया।

विज्ञापन
Trauma patients suffering serious illnesses often leave hospital treatment midway due to financial reasons
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

गंभीर बीमारियों से जूझ रहे ट्रॉमा मरीज अक्सर आर्थिक कारणों से अस्पताल का इलाज बीच में छोड़ देते हैं। इसके चलते उनकी जान का जोखिम तीन गुना तक बढ़ जाता है।

विज्ञापन


भारत में पहली बार ट्रॉमा सेंटर में भर्ती मरीजों पर अध्ययन में यह तथ्य सामने आए हैं। इस रिपोर्ट को जिसे इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईजेएमआर) में प्रकाशित किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक निजी ट्रॉमा सेंटरों में सबसे ज्यादा करीब 42% मरीजों ने आर्थिक तंगी के चलते अस्पताल से डीएएमए (डिस्चार्ज अगेंस्ट मेडिकल एडवाइस) लिया। इनमें से आधे से ज्यादा मरीज निचले आर्थिक वर्ग से थे।
विज्ञापन


35% की हो गई मौत
अध्ययन में चौंकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया कि इलाज बीच में छोड़ने वाले मरीजों में से 35% की छह महीनों के भीतर मौत हो गई। हालांकि 77% मरीज बाद में किसी अन्य अस्पताल पहुंचे लेकिन इनमें से ज्यादातर ने सरकारी अस्पतालों का ही सहारा लिया।

विज्ञापन
विज्ञापन
  • वेल्लोर सीएमसी के ट्रामा सर्जरी डॉ. जोसेस डैनी जेम्स ने कहा कि महंगे खर्च की वजह से अक्सर परिजन मरीजों को प्राइवेट अस्पताल से सरकारी में शिफ्ट करा लेते हैं लेकिन यह स्थिति ट्रामा केयर सेंटर पर लागू होती है या नहीं, यह जानने के लिए यह अध्ययन किया।

ये भी पढ़ें: Swimming: अंतर-मंत्रालयी तैराकी प्रतियोगिता में कैबिनेट सचिवालय का दबदबा; हर्षित और बैशाली ने भी दिखाया दम
 

देश के सभी ट्रामा सेंटर पर होना चाहिए अध्ययन
वेल्लोर सीएमसी के ट्रामा सर्जरी डॉ. जोसेस डैनी जेम्स ने कहा कि यह सिर्फ एक निजी अस्पताल की समस्या नहीं, बल्कि पूरे देश में गंभीर ट्रामा और अन्य बीमारियों के इलाज में यह एक बड़ी चुनौती है। इसलिए सरकार को देश के सभी ट्रामा सेंटर पर ऐसा अध्ययन करना चाहिए क्योंकि समय पर नीति स्तर पर हस्तक्षेप और आर्थिक सहयोग न हुआ तो गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए इलाज अधूरा छोड़ना मजबूरी बन सकता है।



ये भी पढ़ें: Anoushka Shankar: ट्रोलर्स पर भड़कीं सितार वादक अनुष्का, कहा- किसी को भी मेरे शरीर पर टिप्पणी का अधिकार नहीं

जब जेब हार जाए, तो जान भी दांव पर
शोधकर्ताओं ने बताया कि इस अध्ययन के लिए प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती 2,486 ट्रामा मरीजों के दस्तावेजों की समीक्षा की गई। इसमें पाया कि इनमें से 42 फीसदी परिजन आर्थिक तंगी की वजह से अपने मरीजों को घर ले गए। अध्ययन में यह भी पाया कि किसी घटना में जिन लोगों को मस्तिष्क पर चोट लगने या रीढ़ की हड्डी पर चोट लगने के बाद यहां भर्ती कराया गया, उनमें सबसे ज्यादा मरीजों ने इलाज छोड़ दिया जिससे उनकी मौत का       जोखिम दो से तीन गुना तक बढ़ गया।

  • जिन मरीजों ने इलाज बीच में छोड़ दिया उनमें से 35 फीसदी की मौत अगले छह महीने में हो गई। बाकी 65 फीसदी मरीज कुछ दिन बाद दोबारा से भर्ती होने अस्पताल पहुंचे जिनमें 54 फीसदी को सरकारी अस्पतालों में जाना पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed