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NCPI: नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया ने नए अध्यक्ष का किया एलान, ज्योतिप्रकाश चटर्जी को मिली जिम्मेदारी
Tue, 16 Jun 2026 04:30 PM IST
Pavan
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Tue, 16 Jun 2026 04:30 PM IST
सार
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी सांसदों के गुट के नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय के बाद यह छोटी राजनीतिक पार्टी अचानक चर्चा में आ गई है। इसी बीच पार्टी ने ज्योतिप्रकाश चटर्जी को अपना नया राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह जानकारी टीएमसी के बागी खेमे की प्रमुख नेता काकोली घोष दस्तीदार ने दी।
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टीएमसी के बागियों को मिला नया मुखिया
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट की अहम सदस्य काकोली घोष दस्तीदार के मुताबिक, टीएमसी के बागी लोकसभा गुट के साथ विलय के बाद चर्चा में आई एनसीपीआई ने ज्योतिप्रकाश चटर्जी को अपना नया अध्यक्ष बनाया है। उनका ये बयान नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) की संस्थापक शिवली कुंडू के उस बयान के एक दिन बाद आया है, जब उन्होंने बताया कि वे एनसीपीआई प्रमुख का पद छोड़ चुकी हैं।
अध्यक्ष पद को लेकर अटकलों पर विराम
इसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई थी कि शायद काकोली घोष दस्तीदार खुद पार्टी की कमान संभालेंगी। लेकिन मंगलवार को पीटीआई से बातचीत में उन्होंने साफ किया कि ज्योतिप्रकाश चटर्जी ही एनसीपीआई के नए अध्यक्ष हैं।
यह भी पढ़ें- TMC Crisis: काकोली घोष का दावा- NCPI बागी सांसदों के विलय के लिए तैयार, MPs की संख्या बढ़कर हो सकती है 22
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नए अध्यक्ष के बारे में किसी को जानकारी नहीं
दिलचस्प बात यह है कि पार्टी के नए अध्यक्ष ज्योतिप्रकाश चटर्जी के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। यहां तक कि पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी भी उनके बारे में नहीं जानते। खुद को एनसीपीआई का राष्ट्रीय संगठन महासचिव बताने वाले शांतनु डे ने कहा कि उन्हें नए अध्यक्ष के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं पता कि ज्योतिप्रकाश चटर्जी कौन हैं। एनसीपीआई में क्या चल रहा है, इसकी भी मुझे कोई जानकारी नहीं है। मैंने इस पार्टी के लिए काफी मेहनत की है। बड़े नेताओं के आने से खुशी है, लेकिन अब तक हमसे कोई संपर्क नहीं किया गया है। हमें अंधेरे में रखा जा रहा है, जिससे मैं निराश हूं'। शांतनु डे का नाम पार्टी के पुराने पोस्टरों में भी महासचिव के रूप में दर्ज है।
नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया के बारे में
नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया एक अपेक्षाकृत नई राजनीतिक पार्टी है। इसे जनवरी 2023 में चुनाव आयोग में पंजीकृत किया गया था। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार पार्टी का पता पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के सांकराइल क्षेत्र में दर्ज है।
2023 त्रिपुरा चुनाव में प्रदर्शन
एनसीपीआई ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में चार उम्मीदवार उतारे थे। उस समय पार्टी का नारा था- 'राजनीतिक दल-बदलुओं को नकारें'। वहीं, पार्टी के चार उम्मीदवारों में से दो ने पार्टी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ा, एक उम्मीदवार निर्दलीय के रूप में मैदान में उतरा, जबकि चौथे उम्मीदवार का नामांकन रद्द हो गया था। हालांकि, चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा। एनसीपीआई उम्मीदवार बरजेदा त्रिपुरा को 536 वोट मिले, जो नोटा से सिर्फ 36 वोट ज्यादा थे। जबकि दूसरे उम्मीदवार को 286 वोट मिले। वहीं, पार्टी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार को 376 वोट प्राप्त हुए।
यह भी पढ़ें- नीट-पेपर लीक पर संग्राम: खरगे ने टेलीग्राम बैन पर सरकार को घेरा, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ी कांग्रेस
पार्टी की आर्थिक स्थिति भी कमजोर
चुनाव आयोग को सौंपे गए 2022-23 के ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी को शुभचिंतकों से कुल 1,13,075 रुपये का चंदा मिला था। इसमें से 1.13 लाख रुपये खर्च कर दिए गए। वित्तीय वर्ष के अंत में पार्टी के पास केवल 75 रुपये नकद शेष बचे थे।
क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम?
टीएमसी के बागी लोकसभा सांसदों के गुट के एनसीपीआई में शामिल होने के बाद यह छोटी और लगभग अज्ञात पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। हालांकि, पार्टी के नए अध्यक्ष की पहचान और संगठन के भीतर संवाद की कमी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एनसीपीआई खुद को एक प्रभावी राजनीतिक मंच के रूप में स्थापित कर पाती है या नहीं।
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अध्यक्ष पद को लेकर अटकलों पर विराम
इसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई थी कि शायद काकोली घोष दस्तीदार खुद पार्टी की कमान संभालेंगी। लेकिन मंगलवार को पीटीआई से बातचीत में उन्होंने साफ किया कि ज्योतिप्रकाश चटर्जी ही एनसीपीआई के नए अध्यक्ष हैं।
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नए अध्यक्ष के बारे में किसी को जानकारी नहीं
दिलचस्प बात यह है कि पार्टी के नए अध्यक्ष ज्योतिप्रकाश चटर्जी के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। यहां तक कि पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी भी उनके बारे में नहीं जानते। खुद को एनसीपीआई का राष्ट्रीय संगठन महासचिव बताने वाले शांतनु डे ने कहा कि उन्हें नए अध्यक्ष के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं पता कि ज्योतिप्रकाश चटर्जी कौन हैं। एनसीपीआई में क्या चल रहा है, इसकी भी मुझे कोई जानकारी नहीं है। मैंने इस पार्टी के लिए काफी मेहनत की है। बड़े नेताओं के आने से खुशी है, लेकिन अब तक हमसे कोई संपर्क नहीं किया गया है। हमें अंधेरे में रखा जा रहा है, जिससे मैं निराश हूं'। शांतनु डे का नाम पार्टी के पुराने पोस्टरों में भी महासचिव के रूप में दर्ज है।
नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया के बारे में
नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया एक अपेक्षाकृत नई राजनीतिक पार्टी है। इसे जनवरी 2023 में चुनाव आयोग में पंजीकृत किया गया था। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार पार्टी का पता पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के सांकराइल क्षेत्र में दर्ज है।
2023 त्रिपुरा चुनाव में प्रदर्शन
एनसीपीआई ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में चार उम्मीदवार उतारे थे। उस समय पार्टी का नारा था- 'राजनीतिक दल-बदलुओं को नकारें'। वहीं, पार्टी के चार उम्मीदवारों में से दो ने पार्टी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ा, एक उम्मीदवार निर्दलीय के रूप में मैदान में उतरा, जबकि चौथे उम्मीदवार का नामांकन रद्द हो गया था। हालांकि, चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा। एनसीपीआई उम्मीदवार बरजेदा त्रिपुरा को 536 वोट मिले, जो नोटा से सिर्फ 36 वोट ज्यादा थे। जबकि दूसरे उम्मीदवार को 286 वोट मिले। वहीं, पार्टी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार को 376 वोट प्राप्त हुए।
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पार्टी की आर्थिक स्थिति भी कमजोर
चुनाव आयोग को सौंपे गए 2022-23 के ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी को शुभचिंतकों से कुल 1,13,075 रुपये का चंदा मिला था। इसमें से 1.13 लाख रुपये खर्च कर दिए गए। वित्तीय वर्ष के अंत में पार्टी के पास केवल 75 रुपये नकद शेष बचे थे।
क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम?
टीएमसी के बागी लोकसभा सांसदों के गुट के एनसीपीआई में शामिल होने के बाद यह छोटी और लगभग अज्ञात पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। हालांकि, पार्टी के नए अध्यक्ष की पहचान और संगठन के भीतर संवाद की कमी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एनसीपीआई खुद को एक प्रभावी राजनीतिक मंच के रूप में स्थापित कर पाती है या नहीं।