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बंगाल: बीरभूम परिवार के निर्वासन पर हाईकोर्ट की रोक, TMC ने फैसले का स्वागत किया; अभिषेक बनर्जी केंद्र पर बरसे
Fri, 26 Sep 2025 06:18 PM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Fri, 26 Sep 2025 06:18 PM IST
सार
कलकत्ता हाईकोर्ट ने केंद्र का डिपोर्टेशन आदेश खारिज करते हुए बीरभूम की दो महिलाओं और उनके परिवारों को भारत वापस लाने का आदेश दिया। टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने फैसले को बंगालियों के खिलाफ 'सुनियोजित उत्पीड़न अभियान' का पर्दाफाश बताया और केंद्र पर हमला बोला।
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टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी (फाइल)
- फोटो : ANI
विस्तार
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले का स्वागत किया जिसमें केंद्र सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले की दो महिलाओं और उनके परिवारों को बांग्लादेश भेजने के आदेश को खारिज कर दिया गया। बनर्जी ने इस फैसले को बंगालियों के खिलाफ चलाए जा रहे "क्रूर और सुनियोजित उत्पीड़न अभियान" का पर्दाफाश बताया।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (दिल्ली) द्वारा जारी डिटेंशन और डिपोर्टेशन आदेश को अवैध ठहराया। अदालत ने आदेश दिया कि बीरभूम की गर्भवती महिला समेत छह लोगों को, जिन्हें 'बांग्लादेशी प्रवासी' कहकर बाहर भेजा गया था, तुरंत वापस भारत लाया जाए। अदालत ने इस मामले में केंद्र की अंतरिम राहत की याचिका भी खारिज कर दी।
ये भी पढ़ें- मद्रास हाईकोर्ट ने विजय को भेजा नोटिस, पार्टी के झंडे पर विवाद; जानें पूरा मामला
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बनर्जी का केंद्र पर तीखा हमला
अभिषेक बनर्जी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “यह फैसला दिखाता है कि कैसे बंगालियों को योजनाबद्ध तरीके से निशाना बनाया गया। अब कानून ने अपना काम किया है और जो इसके लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें अदालत, सार्वजनिक बहस और चुनावी मैदान-हर जगह जवाब देना होगा।” उन्होंने कहा कि 2026 विधानसभा चुनावों में लोग बहिष्कार और अपमान की राजनीति को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
बंगालियों की अस्मिता का मुद्दा
टीएमसी नेता ने दोहराया कि उनकी पार्टी बंगालियों की गरिमा, अधिकार और भाषा की रक्षा के लिए हमेशा खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा, “न्याय मिलना शुरू हो चुका है और हमारी प्रतिबद्धता अडिग है।” हाल के दिनों में टीएमसी ने बंगालियों के खिलाफ कथित उत्पीड़न के मामलों को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया है और सड़कों पर भी प्रदर्शन किया है।
ये भी पढ़ें- NATO प्रमुख के बयान और नेपाल से लेकर बांग्लादेश तक... विदेश मंत्रालय ने दिए तमाम सवालों के जवाब
भाजपा ने इस मुद्दे पर जवाब देते हुए कहा है कि कार्रवाई केवल अवैध प्रवासियों के खिलाफ हो रही है, न कि बंगालियों के खिलाफ। भाजपा का कहना है कि टीएमसी इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर लोगों को गुमराह कर रही है। हालांकि बनर्जी का हमला यह संकेत देता है कि टीएमसी आगामी चुनावों में इसे बड़ा चुनावी हथियार बनाएगी। इस पूरे विवाद ने बंगाल की राजनीति में नया मोर्चा खोल दिया है। बनर्जी का कहना है कि 2026 में बंगाल की जनता निर्णायक फैसला देगी और भय व उत्पीड़न की राजनीति को खत्म करेगी। हाईकोर्ट के इस आदेश ने न सिर्फ प्रभावित परिवारों को राहत दी है बल्कि बंगाल में राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
जानें क्या है पूरा मामला
कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार के बिर्भूम जिले की सोनाली बीबी और स्वीटी बीबी समेत उनके परिवार को बांग्लादेश भेजने के फैसले को रद्द कर दिया। अदालत ने केंद्र को निर्देश दिया कि छह लोगों को चार सप्ताह के भीतर भारत वापस लाया जाए। हाईकोर्ट ने केंद्र की अस्थायी रोक लगाने की अपील को भी खारिज कर दिया। न्यायाधीशों ने पाया कि डी.सी.पी. दिल्ली और एफआरआरओ की प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया और परिवारों को बिना जांच-पड़ताल और दस्तावेज़ों के आधार पर डिपोर्ट किया गया।
बंगाली विरोधी एजेंडा चलाने का लगा आरोप
अदालत ने विशेष रूप से सोनाली बीबी की जन्मतिथि और दस्तावेजों के आधार पर यह तय किया कि वह 1998 में भारत में प्रवेश नहीं कर सकती थीं। इसके अलावा, दिल्ली पुलिस द्वारा पश्चिम बंगाल सरकार को जानकारी न साझा करना संवैधानिक नियमों का उल्लंघन माना गया। अदालत ने अधिकारियों को चेताया कि वे अपनी शक्ति का दुरुपयोग नहीं कर सकते और प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि डिपोर्टेशन आदेश कानून के अनुसार अमान्य है। इस आदेश के बाद तृणमूल कांग्रेस के सांसद समीरुल इस्लाम ने भाजपा पर "बंगाली विरोधी एजेंडा" चलाने का आरोप लगाया। वहीं टीएमसी के अभिषेक बनर्जी ने कहा कि अदालत के आदेश से बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा को जवाब देना होगा।
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (दिल्ली) द्वारा जारी डिटेंशन और डिपोर्टेशन आदेश को अवैध ठहराया। अदालत ने आदेश दिया कि बीरभूम की गर्भवती महिला समेत छह लोगों को, जिन्हें 'बांग्लादेशी प्रवासी' कहकर बाहर भेजा गया था, तुरंत वापस भारत लाया जाए। अदालत ने इस मामले में केंद्र की अंतरिम राहत की याचिका भी खारिज कर दी।
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बनर्जी का केंद्र पर तीखा हमला
अभिषेक बनर्जी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “यह फैसला दिखाता है कि कैसे बंगालियों को योजनाबद्ध तरीके से निशाना बनाया गया। अब कानून ने अपना काम किया है और जो इसके लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें अदालत, सार्वजनिक बहस और चुनावी मैदान-हर जगह जवाब देना होगा।” उन्होंने कहा कि 2026 विधानसभा चुनावों में लोग बहिष्कार और अपमान की राजनीति को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
बंगालियों की अस्मिता का मुद्दा
टीएमसी नेता ने दोहराया कि उनकी पार्टी बंगालियों की गरिमा, अधिकार और भाषा की रक्षा के लिए हमेशा खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा, “न्याय मिलना शुरू हो चुका है और हमारी प्रतिबद्धता अडिग है।” हाल के दिनों में टीएमसी ने बंगालियों के खिलाफ कथित उत्पीड़न के मामलों को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया है और सड़कों पर भी प्रदर्शन किया है।
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भाजपा ने इस मुद्दे पर जवाब देते हुए कहा है कि कार्रवाई केवल अवैध प्रवासियों के खिलाफ हो रही है, न कि बंगालियों के खिलाफ। भाजपा का कहना है कि टीएमसी इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर लोगों को गुमराह कर रही है। हालांकि बनर्जी का हमला यह संकेत देता है कि टीएमसी आगामी चुनावों में इसे बड़ा चुनावी हथियार बनाएगी। इस पूरे विवाद ने बंगाल की राजनीति में नया मोर्चा खोल दिया है। बनर्जी का कहना है कि 2026 में बंगाल की जनता निर्णायक फैसला देगी और भय व उत्पीड़न की राजनीति को खत्म करेगी। हाईकोर्ट के इस आदेश ने न सिर्फ प्रभावित परिवारों को राहत दी है बल्कि बंगाल में राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
जानें क्या है पूरा मामला
कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार के बिर्भूम जिले की सोनाली बीबी और स्वीटी बीबी समेत उनके परिवार को बांग्लादेश भेजने के फैसले को रद्द कर दिया। अदालत ने केंद्र को निर्देश दिया कि छह लोगों को चार सप्ताह के भीतर भारत वापस लाया जाए। हाईकोर्ट ने केंद्र की अस्थायी रोक लगाने की अपील को भी खारिज कर दिया। न्यायाधीशों ने पाया कि डी.सी.पी. दिल्ली और एफआरआरओ की प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया और परिवारों को बिना जांच-पड़ताल और दस्तावेज़ों के आधार पर डिपोर्ट किया गया।
बंगाली विरोधी एजेंडा चलाने का लगा आरोप
अदालत ने विशेष रूप से सोनाली बीबी की जन्मतिथि और दस्तावेजों के आधार पर यह तय किया कि वह 1998 में भारत में प्रवेश नहीं कर सकती थीं। इसके अलावा, दिल्ली पुलिस द्वारा पश्चिम बंगाल सरकार को जानकारी न साझा करना संवैधानिक नियमों का उल्लंघन माना गया। अदालत ने अधिकारियों को चेताया कि वे अपनी शक्ति का दुरुपयोग नहीं कर सकते और प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि डिपोर्टेशन आदेश कानून के अनुसार अमान्य है। इस आदेश के बाद तृणमूल कांग्रेस के सांसद समीरुल इस्लाम ने भाजपा पर "बंगाली विरोधी एजेंडा" चलाने का आरोप लगाया। वहीं टीएमसी के अभिषेक बनर्जी ने कहा कि अदालत के आदेश से बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा को जवाब देना होगा।