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Maharashtra: किसी की बेटी तो किसी के भाई को टिकट, महाराष्ट्र में राजनीतिक दलों पर चढ़ा परिवारवाद का खुमार

Thu, 24 Oct 2024 08:08 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: बशु जैन Updated Thu, 24 Oct 2024 08:08 PM IST
सार

एक-दूसरे पर वंशवाद का आरोप लगाने वाले राजनीतिक दलों ने ही चुनाव में अपनी पार्टी नेताओं के रिश्तेदारों और परिवारीजनों को खूब टिकट दिए हैं। भाजपा से लेकर शिवसेना हो या मनसे सभी की सूची में परिवारवाद साफ नजर आ रहा है।

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Ticket for someone's daughter and someone's brother, nepotism has gripped political parties in Maharashtra
महायुति गठबंधन के नेता। (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एएनआई

विस्तार

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव को लेकर रणभूमि तैयार है। करीब-करीब हर राजनीतिक दल के योद्धा तैयार हो चुके हैं। मगर विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की ओर से जारी की गई सूची में परिवारवाद की झलक साफ नजर आ रही है। एक-दूसरे पर वंशवाद का आरोप लगाने वाले राजनीतिक दलों ने ही चुनाव में अपनी पार्टी नेताओं के रिश्तेदारों और परिवारीजनों को खूब टिकट दिए हैं। भाजपा से लेकर शिवसेना हो या मनसे सभी की सूची में परिवारवाद साफ नजर आ रहा है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पार्टियों का यह कदम चुनाव जीतने की बड़ी रणनीति होती है। 

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भाजपा ने इनको दिया टिकट 
नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट देने वालों में भाजपा भी पीछे नहीं है। भाजपा ने भोकर सीट से पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक चव्हाण की बेटी श्रीजया चव्हाण को प्रत्याशी बनाया है। जो लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुईं थीं। जबकि मुंबई भाजपा प्रमुख आशीष शेलार को बांद्रा पश्चिम और उनके भाई विनोद शेलार को पार्टी ने मलाड पश्चिम निर्वाचन क्षेत्र से मैदान में उतारा है। मौजूदा विधायक बबनराव पचपुते को स्वास्थ्य खराब होने के चलते श्रीगोंडा विधानसभा क्षेत्र से हटाकर उनकी पत्नी प्रतिभा पचपुते को टिकट दिया है। इसके अलावा कल्याण पूर्व निर्वाचन क्षेत्र से विधायक और शिवसेना कार्यकर्ता पर गोली चलाने के आरोप में जेल में बंद गणपत गायकवाड़ को हटाकर उनकी पत्नी सुलभा को चुनाव मैदान में उतारा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और लोकसभा सदस्य नारायण राणे के बेटे नितेश भी भाजपा के टिकट पर कंकावली से चुनाव लड़ेंगे। जबकि चिंचवड़ निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा ने दिवंगत पार्टी नेता लक्ष्मण जगताप की पत्नी और मौजूदा विधायक अश्विनी जगताप को हटाकर उनके भाई शंकर जगताप को टिकट दिया है। 
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शिवसेना शिंदे भी कुछ ऐसा ही हाल
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने भी नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट दिए हैं। पार्टी ने भी पूर्व केंद्रीय मंत्री और लोकसभा सदस्य नारायण राणे के बेटे नीलेश को कुडाल से टिकट दे दिया है। वह हाल ही में शिवसेना में शामिल हुए हैं। इसके अलावा रत्नागिरी जिले की राजापुर सीट से राज्य मंत्री उदय सामंत के भाई किरण सामंत को उम्मीदवार बनाया गया है। सांसद और शिवसेना नेता संदीपन भुमारे और रवींद्र वायकर के परिवार के सदस्यों को भी पार्टी ने चुनाव मैदान में मौका दिया है। भुमरे के बेटे विलास छत्रपति संभाजीनगर जिले के पैठण से चुनाव लड़ेंगे, वहीं वायकर की पत्नी मनीषा जोगेश्वरी पूर्व विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरेंगी।
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एनसीपी अजित ने भी बनाए प्रत्याशी
सत्तारूढ़ एनसीपी अजित पवार गुट ने भी वरिष्ठ नेता छगन भुजबल के बेटे पंकज भुजबल को नासिक जिले के येओला विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारा है। जबकि भुजबल के भतीजे समीर भी नासिक के नंदगांव निर्वाचन क्षेत्र से शिवसेना के मौजूदा विधायक सुहास कांडे के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं। 

महाविकास अघाड़ी गठबंधन के दलों ने भी रिश्तेदारों को दिए टिकट
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने मौजूदा विधायक आदित्य ठाकरे को मुंबई की वर्ली सीट से फिर से उम्मीदवार बनाया है। जबकि उनके चचेरे भाई वरुण सरदेसाई बांद्रा पूर्व से चुनाव लड़ेंगे। वहीं मुंबई की विक्रोली सीट से पार्टी के राज्यसभा सदस्य संजय राउत के भाई मौजूदा विधायक सुनील राउत को टिकट देने का भी फैसला किया गया। वहीं एनसीपी शरद ने भी पूर्व गृह मंत्री आरआर पाटिल के बेटे रोहित पाटिल को प्रत्याशी बनाया है। उन्होंने अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया। इसके अलावा शरद पवार के पोते और अहिल्यानगर में कर्जत जामखेड़ विधानसभा सीट से मौजूदा विधायक रोहित पवार को भी उम्मीदवार बनाया गया है। इसके अलावा महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने अपने बेटे अमित को मुंबई की माहिम विधानसभा सीट से मैदान में उतारा है। 


राजनीतिक विरासत बन रहे विधानसभा क्षेत्र
राजनीतिक पर्यवेक्षक अभय देशपांडे का कहना है कि बड़े नेता अपने निर्वाचन क्षेत्र पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहते हैं। इसके लिए वह मतदाताओं के साथ अपना नेटवर्क और संबंध विकसित करते हैं। जब उनका पारंपरिक निर्वाचन क्षेत्र परिवार के लिए सुरक्षित हो जाता है तो वह इसे राजनीतिक विरासत के रूप में बेटे या बेटी को सौंप देते हैं। जब किसी बड़े नेता की मौत हो जाती है तो पार्टी स्थापित नेता के परिवार को चुनती है। जैसे शिवसेना ने खानपुर सीट (सांगली में) से सुहास बाबर को मैदान में उतारा है क्योंकि उनके विधायक पिता अनिल बाबर का कुछ महीने पहले निधन हो गया। इसके पीछे पार्टी की मंशा मतदाताओं की सहानुभूति के जरिये राजनीतिक लाभ की होती है। साथ ही इसे राजनीतिक दल की ओर से उस विशेष परिवार के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक भी माना जाता है जिसने उसकी लंबे समय तक सेवा की है।


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