बसपा में स्वामी प्रसाद के करीबियों की हो रही ‘जासूसी’
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अब बसपा में स्वामी प्रसाद मौर्य के करीबियों के पीछे ‘बसपाई इंटेलीजेंस’ लग गई है। स्वामी प्रसाद के हाथी से उतरने के बाद जिलों में कौन-कौन उनके संपर्क में है इसकी पूरी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। अभी तक जो मुख्यालय को रिपोर्ट मिली है उसके मुताबिक कई पूर्व विधायक और जिलाध्यक्ष उनके संपर्क में हैं। इसे देखकर संगठन में भी फेरबदल की संभावनाएं बढ़ गईं हैं।
बसपा के संगठन में स्वामी प्रसाद मौर्य का बड़ा दखल था। ब्रज क्षेत्र के संगठन में भी उनके कई करीबी हैं। पूर्वांचल के जनपदों में तो संगठन में पदाधिकारियों की तैनाती उनकी ही सिफारिश पर होती थी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में भी उनके खास लोग हैं। हालांकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश का जिम्मा पूर्व कैबिनेट मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के पास है।
अब बसपा मुख्यालय ने स्वामी प्रसाद मौर्य के करीब वाले नेताओं की निगहबानी शुरू करा दी है। उन नेताओं पर विशेष नजर है जो मौर्य की सिफारिश पर ही संगठन में आए थे। अच्छे पदों पर तैनाती मिली। कोआर्डिनेटर तक बनाए गए हैं। निगहबानी का काम बामसेफ को सौंपा गया है। बामसेफ से जुड़े लोग पूरी जासूसी कर रहे हैं।
10 जुलाई को सभी कोआर्डिनेटर लखनऊ तलब
बसपा के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि विधानसभा चुनाव से पहले संगठन में फेरबदल किया जा सकता है। स्वामी प्रसाद मौर्य के करीब रहे नेताओं को या तो पदों से हटाया जाएगा या फिर उन्हें पार्टी से बाहर भी किया जा सकता है।
प्रदेश के सभी कोआर्डिनेटर लखनऊ तलब किए गए हैं। 10 जुलाई को बसपा सुप्रीमो मायावती मीटिंग करेंगी। कोआर्डिनेटर के साथ ही संगठन के बड़े पदाधिकारी भी इस मीटिंग में पहुंचेंगे। बताया जा रहा है कि इस मीटिंग में संगठन के साथ ही आने वाले चुनावों को लेकर भी मंथन होगा।
लखनऊ मीटिंग के बाद सभी कोआर्डिनेटर अपने-अपने मंडलों में मीटिंग करके पदाधिकारियों को संगठन के प्रति निष्ठावान रहने की हिदायत देंगे। साथ ही पार्टी छोड़ने वाले लोगों से किसी प्रकार का रिश्ता न रखने को कहा जाएगा। मुख्यालय से साफ कहा गया है कि अगर कोई बसपा छोड़़कर जाने वालों से संबंध रखता है तो उसकी गिनती भी उन्हीं में कर ली जाएगी।