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Defense:रक्षा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने आगे आई ये यूनिवर्सिटी, ड्रोन-रोबोटिक में छात्रों को मिलेगी मदद

Fri, 07 Nov 2025 06:16 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Fri, 07 Nov 2025 06:16 PM IST
सार

भारत के रक्षा क्षेत्र में हो रहे नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कई विश्वविद्यालय भी आगे आए है। यह न केवल छात्रों को सेना से जोड़ने में मदद कर रहे बल्कि भारत की सैन्य क्षमता को बढ़ाने में अपना योगदान दे रहे है।  

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This university has come forward to promote innovation in the defense sector, helping students in drones, AI
रक्षा क्षेत्र में नवाचार के लिए आगे आए कई विश्वविद्यालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत रक्षा के क्षेत्र में अपनी स्वदेशी ताकत के जरिए दुनियाभर में परचम लहरा रहा है। इसके तहत भारत अब रक्षा जरूरतों के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बन चुका है और दूसरे देशों को भी रक्षा उत्पाद निर्यात कर रहा है। भारत के रक्षा क्षेत्र में हो रहे नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कई विश्वविद्यालय भी आगे आए है। यह न केवल छात्रों को सेना से जोड़ने में मदद कर रहे बल्कि भारत की सैन्य क्षमता को बढ़ाने में अपना योगदान दे रहे है। गुजरात की राजधानी गांधीनगर में स्थित कर्णावती विश्वविद्यालय भी लगातार रक्षा क्षेत्र में स्टार्टअप, रोबोटिक सिस्टम, ड्रोन प्रणालियाँ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस्ड सेंसिंग जैसे विषयों पर काम कर रहा है।

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दरअसल,यह विश्वविद्यालय नए सोच वाले छात्रों और रक्षा क्षेत्र में स्टार्टअप शुरू करने वाले लोगों को एक मंच प्रदान करता है। साथ ही उन्हें इस क्षेत्र के विशेषज्ञों से मार्गदर्शन दिलाने और वित्तीय साधन जुटाने में भी मदद करता है। विश्वविद्यालय के छात्रों और स्टार्टअप द्वारा तैयार किए रक्षा उपकरण की प्रदर्शनी भी आयोजित की जाती है। जिसमें रक्षा क्षेत्र की नामी हस्तियां शामिल होती है। इन उपकरणों को जमीनी स्तर पर कैसे उतारा जाए इस बारे में विश्वविद्यालय द्वारा बताया जाता है।
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विश्वविद्यालय में डिफेंस इनक्यूबेशन सेंटर की इंचार्ज डॉ.बृंदा पांड्या अमर उजाला डिजिटल से चर्चा में कहती है कि,एआई और नई तकनीक के जरिए सेना में नवाचार कैसे लाए जाए इस दिशा में हमारा विश्वविद्यालय लगातार काम कर रहा है। छात्र और स्टार्टअप्स सेना की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप स्वदेशी समाधान विकसित करने का काम करते है। इसी के मद्देनजर हमारा फोकस चार काम पर है। पहला रक्षा क्षेत्र की जरूरतों को देखते हुए नई खोज करना है। दूसरा इन स्टार्टअप और छात्रों के जरिए इन जरूरतों को पूरा करने का प्रयास करना। तीसरा नए उपकरणों को सेना के साथ मिलकर ट्रायल करना। जबकि चौथा काम डिफेंस सेक्टर के विशेषज्ञों के साथ मिलकर छात्रों और स्टार्टअप के प्रोजेक्ट्स को पूरा करना है।  
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कर्णावती विश्वविद्यालय के अध्यक्ष रितेश हाड़ा अमर उजाला से चर्चा में कहते है, हमारा विश्वविद्यालय रक्षा क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है। इसका मुख्य केंद्र डिफेंस डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी इनक्यूबेटर ऑफ इंडिया है। यह इनक्यूबेटर रक्षा, अंतरिक्ष और संबंधित उद्योगों के लिए अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहित करता है। इनोवेटर्स, स्टार्टअप और उद्यमियों को समर्थन देता है। विश्वविद्यालय रक्षा उत्पादों और प्रौद्योगिकियों के प्रदर्शन के लिए रक्षा डेमो दिवस जैसे कार्यक्रम भी आयोजित करता है, जो विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और फंडिंग के अवसर प्रदान करते हैं।


हाड़ा कहते है, हमारा विश्वविद्यालय एकमात्र ऐसी संस्था है जो एआई और नई तकनीकों के जरिए रक्षा क्षेत्र में नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता को बढ़ावा दे रहा है। छात्रों को 21वीं सदी के कौशल जैसे डिजाइन थिंकिंग और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करता है। सभी स्कील आज की जरूरत है। छात्रों को इन स्कील में उत्कृष्ट बनाने के लिए हम संबंधित इंडस्ट्री के विशेषज्ञों के अलावा सरकार से जुड़े संगठनों की भी मदद लेते है। ताकि छात्रों को सरकार और इंडस्ट्री के साथ काम करने का अनुभव मिल सके। वहीं उनके इनोवेशन को भी एक उचित प्लेटफार्म मिल सके। हमारा विश्वविद्यालय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की पहल के तहत भारत की रक्षा क्षमताओं में योगदान देने के लिए इनोवेटरर्स की एक नई पीढ़ी को तैयार कर रहा है। इसलिए विश्वविद्यालय छात्रों और स्टार्टअप द्वारा तैयार किए गए इनोवेशन को फील्ड परीक्षण के अवसर के अलावा बाज़ार तक पहुँचने जैसे संसाधन भी मुहैया करवाता है। 

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