सीट का समीकरण: 2017 में जीती सीट 2022 में महज 1,834 वोट से हारी भाजपा, ऐसा है बिसौली विधानसभा का चुनावी इतिहास
बदायूं की बिसौली विधानसभा सीट 1957 में अस्तित्व में आई। 2022 के विधानसभा चुनाव में ये सीट समाजवादी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी से छीन ली थी। इस चुनाव में सपा के आशुतोष मौर्य ने भाजपा उम्मीदवार और तत्कालीन विधायक कुशाग्र सागर को महज 1,834 वोट से हराया था। आइये इस सीट का सियासी इतिहास जानते हैं...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तर प्रदेश की सियासत में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर हलचल लगातार बढ़ रही है। राजनीतिक दलों ने अभी से चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। भाजपा जहां अपनी सरकार को बरकरार रखने की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं विपक्ष सत्ता परिवर्तन के लिए नए समीकरण बनाने में जुटा है। उत्तर प्रदेश की इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में हमारी खास सीरीज 'सीट का समीकरण' में बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात बदायूं जिले की बिसौली विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास...
पहले जानते हैं बिसौली विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं। इन जिलों में एक जिला बदायूं है। जिले में कुल छह विधानसभा सीटें हैं। इनमें- बिसौली, सहसवान, बिल्सी, बदायूं, शेखूपुर और दातागंज शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की इस कड़ी में आज हम बिसौली विधानसभा सीट की बात करेंगे। बदायूं जिले की बिसौली विधानसभा सीट साल 1956 में परिसीमन के बाद पहली बार अस्तित्व में आई थी। इस सीट पर पहला विधानसभा चुनाव साल 1957 में हुआ था। यहां से पहले विधायक शिव राज सिंह बने थे, जिन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी।
बिसौली विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में सबसे बड़ी और निर्णायक हिस्सेदारी अनुसूचित जाति (दलित) और मुस्लिम मतदाताओं की है, जिनकी संख्या इस क्षेत्र में सबसे अधिक है। इसके बाद यादव समाज के मतदाताओं की एक बड़ी आबादी है, जो चुनाव में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वहीं मौर्य/शाक्य समाज के साथ-साथ पाल, कश्यप और लोधी वर्ग के मतदाताओं की संख्या भी प्रभाव डालने लायक है। बाकी बचे मतदाता अन्य समुदायों से आते हैं।
बिसौली विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
1957 के विधानसभा चुनाव में बदायूं जिले की बिसौली विधानसभा सीट उस समय द्वि-सदस्यीय सीट थी। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के केशो राम और शिव राज सिंह विजयी हुए। केशो राम को 26,980 वोट मिले। उन्होंने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी (PSP) के रतन सिंह को हाराया था। रतन सिंह को 18,295 वोट पाकर भी हार का सामना करना पड़ा। वहीं, शिव राज सिंह को 31,704 वोट मिले और उन्होंने PSP के श्याम सिंह (23,233 वोट) को पराजित किया।
1962 के विधानसभा चुनाव में बिसौली विधानसभा सीट पर कांग्रेस के शिव राज सिंह विजयी हुए। उन्होंने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी (PSP) के श्याम सिंह को 440 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में शिव राज सिंह को 11,014 वोट मिले, जबकि श्याम सिंह को 10,574 वोट मिले।
1967: बिसौली में भारतीय जनसंघ की पहली जीत
1962 के बाद राज्य में 1967 में विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में बदायूं जिले की बिसौली विधानसभा सीट पर भारतीय जनसंघ (BJS) के एस सिंह विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के शिव राज सिंह को 7,880 वोटों के अंतर से हराया।
1969 और 1974 में भारतीय क्रांति दल ने मारी बाजी
इसके बाद 1969 के विधानसभा चुनाव हुए, इस चुनाव में बिसौली विधानसभा सीट पर भारतीय क्रांति दल (BKD) के शिव राज सिंह विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के बृज बल्लभ को 2,431 वोटों के अंतर से हराया। वहीं, 1974 के चुनाव में बिसौली विधानसभा सीट पर भारतीय क्रांति दल (BKD) के कृष्णवीर सिंह विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के शिव राज सिंह को 4,797 वोटों के अंतर से हराया।
1974 के चुनावों के बाद जून 1975 में देश में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। इसके बाद जनता पार्टी की नई केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि कांग्रेस पार्टी देश की जनता का विश्वास खो चुकी है। इस आधार पर केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश सहित कांग्रेस शासित 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर दिया और राष्ट्रपति शासन लगा दिया। इसके बाद राज्य में 1977 में दोबारा चुनाव हुए, जिसमें जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला और राम नरेश यादव उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि यह सरकार भी ज्यादा दिनों तक सत्ता में नहीं रह सकी।
1977 में निर्दलीय उम्मीदवार ने जीता चुनाव
इस विधानसभा चुनाव में बिसौली विधानसभा सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार बृज बल्लभ विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी (JNP) के बनवारी को 1,918 वोटों के अंतर से हराया।
1980 के विधानसभा चुनाव में बिसौली विधानसभा सीट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (इंदिरा) के बाबू बृज बल्लभ विजयी हुए। बृज बल्लभ इससे पहले 1977 में निर्दलीय जीत दर्ज कर चुके थे। इस बार उन्होंने जनता पार्टी उम्मीदवार और तीन बार के पूर्व विधायक शिव राज सिंह को 4,603 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में बाबू बृज बल्लभ को 26,815 वोट मिले, जबकि शिव राज सिंह को 22,212 वोट मिले।
1985: निर्दलीय उम्मीदवार ने जीता चुनाव
1985 में उत्तर प्रदेश की बिसौली विधानसभा सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार योगेंद्र कुमार विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के कृष्णवीर सिंह को 18,569 वोटों के अंतर से हराया। वहीं 1989 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के अनुसार, बदायूं जिले की बिसौली विधानसभा सीट पर योगेंद्र कुमार कांग्रेस के टिकट पर विजयी हुए। इस चुनाव में उन्होंने जनता दल के कृष्णवीर सिंह सिरोही को 2,903 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में योगेंद्र कुमार को 32,871 वोट मिले, जबकि कृष्णवीर सिंह सिरोही को 29,968 वोट मिले।
1991 में जनता दल का रहा दबदबा
1991 के विधानसभा चुनाव में बिसौली विधानसभा सीट पर जनता दल के कृष्ण वीर सिंह विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के योगेंद्र कुमार को 309 वोटों के मामूली अंतर से हराया।
1993 में पहली बार भाजपा जीती
इसके बाद 1993 के विधानसभा चुनाव में बिसौली विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दया सिंधु शंखधार विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के योगेंद्र कुमार को 4,384 वोटों के अंतर से हराया।
1996 में सपा ने मारी बाजी
1996 के विधानसभा चुनाव में बिसौली विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) के योगेंद्र कुमार विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के गेंदन लाल को 23,775 वोटों के अंतर से हराया।
1996 के बाद राज्य में 2002 में चुनाव हुए। 2002 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की बिसौली विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) के योगेंद्र कुमार विजयी हुए। उन्होंने राष्ट्रीय लोक दल के विकास यादव को 2,251 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में योगेंद्र कुमार को 37,980 वोट मिले, जबकि विकास यादव को 35,729 वोट मिले।
2007: राष्ट्रीय परिवर्तन दल ने जीता चुनाव
2007 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की बिसौली विधानसभा सीट पर राष्ट्रीय परिवर्तन दल (RPD) की उमलेश यादव विजयी हुईं। उन्होंने समाजवादी पार्टी (SP) के योगेंद्र कुमार कुन्नू को 13,308 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में उमलेश यादव को 51,116 वोट मिले, जबकि योगेंद्र कुमार कुन्नू को 37,808 वोट मिले।
2012 के विधानसभा चुनाव में बदायूं जिले की बिसौली विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) के आशुतोष मौर्य उर्फ राजू विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रीति सागर उर्फ पुष्पा रानी को 42,990 वोट के भारी अंतर से हराया। चुनाव में आशुतोष मौर्य उर्फ राजू को 89,457 वोट मिले, जबकि प्रीति सागर उर्फ पुष्पा रानी को 46,467 वोट मिले।
2017: 24 साल बाद जीती भारतीय जनता पार्टी
2012 के बाद राज्य में 2017 में विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में बिसौली विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कुशाग्र सागर विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के आशुतोष मौर्य उर्फ राजू को 10,764 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में कुशाग्र सागर को 1,00,077 वोट मिले, जबकि आशुतोष मौर्य उर्फ राजू को 89,313 वोट मिले।
2022: नजदीकी मुकाबले में हारी भाजपा
2022 के विधानसभा चुनाव में बदायूं जिले की बिसौली विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) के आशुतोष मौर्य उर्फ राजू विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कुशाग्र सागर को 1,834 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में आशुतोष मौर्य को 1,10,569 वोट मिले, जबकि कुशाग्र सागर को 1,08,735 वोट मिले।