{"_id":"6892b7d36047ea19ef0b50cf","slug":"there-will-be-a-shower-of-meteors-in-the-sky-mars-will-meet-the-crescent-moon-you-can-see-an-amazing-sight-2025-08-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"ग्रह-चाल: आसमान में होगी उल्का पिंडों की बौछार, अर्धचंद्र से मिलेगा मंगल; देखने को मिल सकता है अद्भुत नजारा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
ग्रह-चाल: आसमान में होगी उल्का पिंडों की बौछार, अर्धचंद्र से मिलेगा मंगल; देखने को मिल सकता है अद्भुत नजारा
Wed, 06 Aug 2025 07:32 AM IST
अभिषेक दीक्षित
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Wed, 06 Aug 2025 07:32 AM IST
सार
11-12 अगस्त को शुक्र और बृहस्पति एक-दूसरे के सबसे करीब होंगे, सिर्फ 1 डिग्री की दूरी पर। यह दृश्य सूर्योदय से ठीक पहले पूर्व दिशा में दिखाई देगा। 19-20 अगस्त को एक पतला अर्धचंद्र, शुक्र और बृहस्पति के बीच में आकर ‘त्रिग्रहीय मिलन’ जैसा नजारा बनाएगा।
विज्ञापन
सांकेतिक फोटो
- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
अगस्त 2025 का आसमान सितारों, ग्रहों और उल्कापिंडों के विस्मयकारी नजारों से भरा रहेगा। नासा के अनुसार इस महीने भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में आसमान हर रात कुछ नया और अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करेगा। चाहे वह पर्सिड्स उल्कापिंडों की बौछार हो, चंद्रमा के साथ शुक्र और बृहस्पति का आलिंगन या फिर 26 अगस्त की शाम मंगल ग्रह के बगल में झूलता एक नाजुक अर्धचंद्र।
विज्ञापन
अगस्त की सबसे प्रतीक्षित खगोलीय घटना पर्सिड्स उल्का वर्षा है, जो अब से 24 अगस्त तक आसमान में चमक बिखेरती रहेगी। पर्सिड्स को उल्कापिंडों की ‘क्वीन’ कहा जाता हैैं। हालांकि इस साल 12-13 अगस्त की रात 84% पूर्ण चंद्रमा की रोशनी के कारण दृश्यता थोड़ी कम रहेगी, लेकिन भोर से पहले के घंटों में कुछ चमकीले उल्कापिंड साफ देखे जा सकते हैं। भारत में इस उल्का वर्षा का सबसे अच्छा नजारा 13 अगस्त की आधी रात के बाद पहाड़ी इलाकों जैसे लद्दाख, स्पीति, कच्छ के रण और कर्नाटक या उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों से मिलेगा, जहां कृत्रिम रोशनी कम होती है।
विज्ञापन
20-25 साल में एक बार बनता है ऐसा संयोग
अंतरिक्ष में पर्सिड्स उल्कापिंडों की वर्षा, ग्रहों की युति (कंजक्शन) और चंद्रमा के साथ ग्रहों की नजदीकी स्थिति हर साल अलग-अलग रूपों में घटती रहती है, लेकिन इस बार जैसी स्थिति जब पर्सिड्स का चरम, शुक्र-बृहस्पति की युति, चंद्रमा का उनके साथ आना और मंगल के साथ अर्धचंद्र का मिलन एक साथ दिखाई दे, ऐसा खगोलीय संयोग औसतन 20 से 25 वर्षों में एक बार ही बनता है। इसकी मुख्य वजह यह है कि ग्रहों के परिक्रमा पथ, पृथ्वी की स्थिति, चंद्र चक्र और उल्कापिंडों की बौछार के समय का ऐसा तालमेल विरले ही एक साथ घटता है, जिससे सभी घटनाएं एक ही महीने में इतने स्पष्ट रूप में नजर आएं।
विज्ञापन
11-12 अगस्त को शुक्र और बृहस्पति सबसे नजदीक होंगे
11-12 अगस्त को शुक्र और बृहस्पति एक-दूसरे के सबसे करीब होंगे, सिर्फ 1 डिग्री की दूरी पर। यह दृश्य सूर्योदय से ठीक पहले पूर्व दिशा में दिखाई देगा। 19-20 अगस्त को एक पतला अर्धचंद्र, शुक्र और बृहस्पति के बीच में आकर ‘त्रिग्रहीय मिलन’ जैसा नजारा बनाएगा।
26 अगस्त को चांद और मंगल का रूमानी मिलन
26 अगस्त को सूर्यास्त के बाद पश्चिम की ओर आकाश में एक अर्धचंद्र चांद दिखाई देगा। उसके ठीक बगल में एक छोटा सा चमकीला लाल बिंदु मंगल ग्रह का होगा। यह दृश्य रात 8:15 बजे से लगभग एक घंटे तक दिखाई देगा। यह नजारा खगोलीय महत्व के लिहाज से भी बेहद खास है, क्योंकि यह भविष्य के उस ब्रह्मांडीय चक्र की झलक देता है जिसमें तारों और ग्रहों की नई पीढ़ियों के लिए तत्वों की बुवाई होती है।