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चिकन-मीट में एंटी बॉयोटिक्स के इस्तेमाल की सीमा होगी तय, जल्द आयेगा सख्त कानून

Mon, 20 Nov 2017 08:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो/नई दिल्ली Updated Mon, 20 Nov 2017 08:17 PM IST
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There will be a limit to the use of anti Bioetics in chicken meat
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मोदी सरकार अगले साल से चिकन और मीट को लेकर नामचीन कंपनियों के बड़े खेल पर लगाम कसने पर विचार कर रही है। गोश्त की मात्रा बढ़ाने के लिए एंटी बॉयोटिक दवाओं के इस्तेमाल को नियंत्रित करने की तैयारी की जा रही है। एक निश्चित सीमा से अधिक दवाओं का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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इसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक योजना तैयार कर ली है। छह दिसंबर तक इस पर स्वास्थ्य के क्षेत्र से जुड़े विशिष्ट लोगों के साथ-साथ आम लोगों से भी राय मांगी गई है। इसी महीने 7 नवंबर को एक बैठक में मंत्रालय के उच्च अधिकारियों ने चिकन और मीट में बढ़ रहे एंटी बॉयोटिक दवाओं के इस्तेमाल पर रोक लगाने का मुद्दा उठाया था। 
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जिसके बाद चिकन और मीट को खाद्य संरक्षा और मानक अधिनियम के दायरे में लाया गया। साथ ही एक ड्रॉफ्ट तैयार कर इस पर सलाह मांगी गई है।

अगले साल की शुरुआत में लागू हो जाएगा कानून

There will be a limit to the use of anti Bioetics in chicken meat
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मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अगले साल की शुरुआत में ही चिकन और मीट में होने वाले एंटी बॉयोटिक्स दवाओं के इस्तेमाल को लेकर कानून लागू हो जाएगा। इस फैसले से कई नामचीन कंपनियां प्रभावित होने वाली हैं। 

अधिकारी का कहना है कि अक्सर गोश्त की मात्रा बढ़ाने के लिए बेरोकटोक एंटी बॉयोटिक दवाओं का इस्तेमाल होता है। इससे एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस की स्थिति पैदा हो रही है। यानी अगर बैक्टीरिया पहले से ही इन दवाओं के साथ व्यवहारिक हो जाता है तो शरीर में पहुंचने पर इन दवाओं का कोई असर नहीं पड़ता है।

क्या है नया कानून ...
जल्द लागू होने वाले इस कानून में सभी मांसाहारी खाद्य पदार्थों में एंटी बॉयोटिक की अधिकतम मात्रा तय कर दी जाएगी। यानी कि किसी भी मांसाहारी खाद्य पदार्थ में 37 एंटी बॉयोटिक और 67 तरह की अन्य वैटेनरी ड्रग्स को निश्चित कर दिया जाएगा। 

चिकन-मटन शॉप, रेस्टोरेंट या फूड ऑउटलेट पर इससे ज्यादा एमआरएल पाया जाता है तो खाद्य अधिनियम के तहत संबंधित के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।

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