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चार दवाओं पर सख्ती: बिना डॉक्टर की सलाह के उपयोग पर होगी पाबंदी, स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रस्ताव में क्या?

Himanshu Mishra हिमांशु अरविंद मिश्र
Updated Wed, 26 Aug 2026 08:06 AM IST
सार

खुद से दवा खाने का चलन बंद करने के लिए सरकार ने सख्त उपाय कर रही है। नींद की समस्या, नसों के दर्द, मानसिक बीमारी और मांसपेशियों के दर्द में इस्तेमाल होने वाली चार दवाओं की बिना डॉक्टरी सलाह के बेचने पर पाबंदी लगाने की तैयारी है। पढ़िए रिपोर्ट-

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four drugs restriction without prescription sale ban government action against misuse
बिना पर्ची के नहीं मिलेंगी चार दवाएं - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

केंद्र सरकार ने फ्लूपेंरिक्सोल, जोपिक्लोन, गैबापेंटिन और कैरिसोप्रोडोल को दवा नियमों की अनुसूची एच1 में शामिल करने का प्रस्ताव रखा है। आने वाले दिनों में ये दवाएं बिना पर्ची के नहीं मिलेगी। यही नहीं, इन दवाओं को लेकर बिक्री और रिकॉर्ड रखने के नियम पहले से ज्यादा सख्त हो जाएंगे। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद इन दवाओं को खरीदना आसान नहीं रहेगा। हालांकि डॉक्टर की पर्ची पर ये दवाएं मिलेंगी। दूसरी ओर दवा दुकानदारों को इनकी बिक्री का पूरा रिकॉर्ड भी रखना होगा। इसमें मरीज, डॉक्टर और दी गई दवा की जानकारी दर्ज करनी होगी।
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असली निशाना बिना सलाह दवा खरीदने और गलत इस्तेमाल पर निगरानी बढ़ाना है।

कौन सी दवा किस काम आती है?
फ्लूपेंरिक्सोल: मानसिक बीमारियों, खासकर सिजोफ्रेनिया और लंबे समय से चल रही मानसिक समस्याओं के इलाज में इस्तेमाल होती है।

जोपिक्लोन: नींद न आने की गंभीर समस्या में थोड़े समय के लिए दी जाने वाली दवा है।
गैबापेंटिन: मिर्गी के इलाज के अलावा नसों में होने वाले दर्द में भी इस्तेमाल होती है।

कैरिसोप्रोडोल: मांसपेशियों में खिंचाव और दर्द में थोड़े समय के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा।

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नशे के लिए होने लगा था इस्तेमाल
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की औषधि परामर्श समिति ने इन चार दवाओं को एच1 में शामिल करने की विशेषज्ञ समिति की सिफारिश को मंजूरी दी थी। समिति के सामने इन दवाओं के गलत इस्तेमाल और नशे के लिए इस्तेमाल से जुड़ी चिंता रखी गई थी। इन चारों का असर सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर पड़ता है। इसलिए इनका गलत या बिना निगरानी इस्तेमाल नुकसान पहुंचा सकता है। बहुत से जगहों पर इसका प्रयोग नशे के लिए भी होने लगा था।
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इन पर सख्ती...
नींद, नसों के दर्द और मानसिक बीमारी में होता है फ्लूपेंरिक्सोल, जोपिक्लोन, गैबापेंटिन और कैरिसोप्रोडोल का इस्तेमाल
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