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Maharashtra: मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने पर अब श्रेय लेने की होड़, राज ठाकरे बोले- मैंने की थी मांग

Fri, 04 Oct 2024 05:56 PM IST
बशु जैन सुरेंद्र मिश्र, अमर उजाला, मुंबई
सुरेंद्र मिश्र, अमर उजाला, मुंबई Published by: बशु जैन Updated Fri, 04 Oct 2024 05:56 PM IST
सार

केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले मराठी लोगों की पिछले कई दशकों से चली आ रही मांग को पूरा कर दिया है। भाजपा भी इसका श्रेय ले रही है। 

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there is a race to take credit for Marathi getting classical language, Raj Thackeray said i had demanded
राज ठाकरे। - फोटो : ANI

विस्तार

मराठी भाषा को 'शास्त्रीय दर्जा' देने के केंद्र सरकार के फैसले के बाद महाराष्ट्र में श्रेय लेने की होड़ मच गई है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे ने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान शिवाजी पार्क में आयोजित रैली में मैने भाजपा को बिना शर्त समर्थन देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने की मांग की थी। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने कहा कि इसमें सभी का योगदान है। लेकिन, भाजपा को श्रेय लेने की आदत है।

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केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले मराठी लोगों की पिछले कई दशकों से चली आ रही मांग को पूरा कर दिया है। इससे भाजपा इसका श्रेय भी ले रही है। लोकसभा चुनाव में राज ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बिना शर्त समर्थन दिया था। उन्होंने मोदी के साथ शिवाजी पार्क में एक रैली भी साझा की थी। इस दौरान राज ठाकरे ने मराठी भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने की मांग की थी। राज ठाकरे ने कहा कि मेरी यह प्रमुख मांगों में से एक थी जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने पूरी कर दी है। उन्होंने पीएम मोदी और उनके मंत्रिमंडल का आभार व्यक्त किया है।
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संजय राउत ने कहा कि यह बहुत बड़ा सम्मान है। राज्य के सभी दलों के नेताओं ने पिछले 30-35 वर्षों से मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने की मांग की है। आज मराठी भाषा को जो गौरव प्राप्त हुआ है उसमें सभी का योगदान है। अगर, भाजपा ने लोकसभा चुनाव में हुई पराजय की भरपाई के लिए ऐसा किया है तो हमें उनकी मेहरबानी नहीं चाहिए। वहीं, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने कहा है कि यह प्रधानमंत्री मोदी की वजह से संभव हो पाया। केंद्र सरकार ने मराठी समेत कुल पांच भाषाओं पाली, प्राकृत, असमिया और बंगाली को शास्त्रीय भाषाओं का दर्जा दिया है।
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