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मुंबई में विमान उड़ाना क्यों है कठिन? दुर्घटना की पूरी कहानी के साथ जानिए विशेषज्ञों की राय

Sat, 30 Jun 2018 02:50 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Updated Sat, 30 Jun 2018 02:50 AM IST
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The whole story of the Mumbai air crash, the testimony of witnesses

मुंबई के सर्वोदय नगर में गुरुवार दोपहर एक चार्टर्ड विमान क्रैश हो गया। विमान एक निर्माणाधीन बिल्डिंग से टकराया और फिर उसमें आग लग गई। इस विमान हादसे में पांच लोगों की मौत हो चुकी है जबकि दो अन्य लोग घायल हैं। मृतकों में एक पायलट, तीन यात्री और एक नागरिक शामिल है।

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बीबीसी की खबर के मुताबिक इस घटना स्थल के करीब रहने वाली तरुणा बताती हैं, हम अपने बेटे के स्कूल से वापस आने का इंतजार कर रहे थे। हमने सोचा था कि उसके आने पर साथ में लंच करेंगे तभी हमने एक जोर की आवाज सुनी, जैसे कि कोई ब्लास्ट हुआ हो। हमने घबराकर खिड़कियां खोलीं और बाहर आग का एक बड़ा गोला देखा, ऐसा लगा जैसे सड़क पर भी आग लगी हो। हमें ये समझने में थोड़ा वक्त लगा कि गली में एक प्लेन गिर गया है। 
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दुर्घटना के एक दिन बाद घाटकोपर में जिंदगी सामान्य हो चली है लेकिन यहां रहने वाले लोगों के माथे पर चिंता की लकीरों को साफ देखा जा सकता है। मामले की जांच चल रही है और दुर्घटना के वजहों का पता लगाने की कोशिश हो रही है।

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The whole story of the Mumbai air crash, the testimony of witnesses

तरुणा की भाभी कुसुम कहती हैं, मैं सोच भी नहीं सकती कि प्लेन अगर कुछ मीटर की दूरी पर गिरा होता तो क्या होता। हमने अपने आस-पास हमेशा प्लेन उड़ते देखे हैं लेकिन ऐसा पहले कभी नहीं देखा। हम डरे हुए तो नहीं हैं लेकिन हमें चिंता जरूर हो रही है।

घाटकोपर और छत्रपति शिवाजी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बीच तमाम इमारतों और झोपड़-पट्टियों में हजारों लोग रहते हैं। प्रथमेश लोखंडे उनमें से एक हैं, जो दुर्घटनास्थल से काफी करीब रहते हैं। हादसे के बाद वो पीड़ितों की मदद के लिए भी वहां गए थे।

प्रथमेश कहते हैं, "मेरे घर के ठीक ऊपर से होकर हवाई जहाज एयरपोर्ट की तरफ जाते हैं। यहां की गलियां इतनी तंग हैं कि वहां फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी नहीं पहुंच पाएंगी। अब हम निश्चित तौर पर चिंतित हैं कि अगर ऐसा कुछ हमारे इलाके में हुआ तो ज्यादा बड़ी त्रासदी होगी।

The whole story of the Mumbai air crash, the testimony of witnesses

विशेषज्ञों की राय क्या है?
गो-एयर में काम करने वाले कैप्टन नीलेश बापत बताते हैं, मुंबई में विमान उड़ाना बहुत मुश्किल नहीं है पर घनी आबादी वाले इलाके में प्लेन क्रैश होने पर लोगों का घबराना स्वाभाविक है। यहां ऐसी दुर्घटनाएं आम तौर पर नहीं होती हैं इसीलिए घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। 

कैप्टन नीलेश मानते हैं कि मुंबई में विमान उड़ाते समय पायलट को बहुत सतर्क रहना पड़ता है क्योंकि मुंबई का मौसम पायलटों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है, खासकर बारिश का मौसम। वो कहते हैं, आसमान में घुमड़ते बादल और चमकती बिजलियां प्लेन के लिए खतरनाक होती हैं।

मुंबई को हाल ही में दुनिया का सबसे व्यस्त सिंगल-रनवे एयरपोर्ट घोषित किया गया था। यहां हर रोज औसत 874 प्लेन उड़ान भरते हैं और 4 करोड़ 80 लाख से ज्यादा यात्रियों की आवाजाही होती है।

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सिविल ऐविएशन सेफ्टी एडवाइजरी काउसिंल के पूर्व सदस्य कैप्टन मोहन रंगनाथन का मानना है कि अधिकारियों को एयरपोर्ट के पास धड़ल्ले से बढ़ रहे निर्माण कार्य के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए। यहां 100 से ज्यादा ऐसी इमारतें हैं जिन्हें नियमों का उल्लंघन करके बनाया गया है। इन इमारतों की पहचान "रूकावट" के तौर पर की गई है, इसलिए मुंबई में प्लेन उड़ाते हुए खतरा हमेशा मौजूद रहता है।

रंगनाथन का कहना है कि, अगर एयरपोर्ट के बाहर कोई प्लेन क्रैश होता है तो बहुत ज्यादा नुकसान होने की आशंका होती है। ऐसी जगहों पर न तो फायर ब्रिगेड की गाड़ियों पहुंच सकती हैं और न ही बचाव दल का जल्दी पहुंच पाना सम्भव होता है। यहां रिहाइशी इलाकों की गलियां बहुत तंग हैं, हम खुशकिस्मत हैं ये कि प्लेन छोटा था और हादसा अपेक्षाकृत खुली जगह पर हुआ।

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