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भारत-म्यांमार बाॅर्डर पर आईएसआई की मदद से विद्रोहियों के हाथ में चीनी सेना के घातक हथियार

Sat, 25 Aug 2018 09:10 AM IST
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Updated Sat, 25 Aug 2018 09:10 AM IST
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The rebels have chinese weapons on India-Myanmar border

तमाम तरह के राजनीतिक, कूटनीतिक और सुरक्षात्मक प्रयासों के बावजूद भारत-म्यांमार बॉर्डर पर आतंकी गतिविधियां कम नहीं हो पा रही हैं। बॉर्डर पर सक्रिय विद्रोहियों एवं दूसरे आतंकी समूहों के हाथ में चीनी सेना पीपल लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले घातक हथियार आ गए हैं।

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ये हथियार पाकिस्तान की प्राइम इंटेलीजेंस एजेंसी आईएसआई व लश्कर के सहयोग से म्यांमार के आतंकी समूहों तक पहुंचाए जाते हैं। वहां से इन हथियारों को भारतीय सीमा में आतंकी गतिविधियां चला रहे समूहों को सौंपा जाता है। दूसरा, चीन में सक्रिय कुछ ऐसे समूह हैं जो सीधे म्यांमार में चल रहे आतंकियों के ट्रेनिंग कैंपों को पीएलए के घातक हथियार सप्लाई कर देते हैं। वहां से वे नागालैंड और मणिपुर के उग्रवादियों को मिल जाते हैं।
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भारत की खुफिया एजेंसी, एनआईए और भारत म्यांमार बाॅर्डर पर तैनात असम राइफल के सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है। सुरक्षा एजेंसियों के पास बाकायदा चीनी हथियारों के फोटो और वीडियो भी हैं। जिन आतंकी समूहों के पास चीनी हथियार देखे गए हैं, उनमें नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल आॅफ नागालैंड (खंगेलीपक), अराकन रोहिंग्या सालवेशन आर्मी (दो साल पहले ही गठित हुआ दल), खंगेलीपक कम्युनिस्ट पार्टी (केसीपी), मणिपुर के विद्रोही गुट केवाईकेएल (कंगेली याओल कन्ना लूप) शामिल हैं। इसके अलावा एक नया समूह यूनाईटेड लिब्रेशन फ्रंट आॅफ वेस्ट साउथ ईस्ट ऐशिया (यूएनएलएपफडब्लू) भी शामिल हो गया है।
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आर्मी के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल बलबीर सिंह संधू का कहना है कि यह पूरी तरह संभावित है। वहां के विद्रोही दो तरीके से चीनी हथियार हासिल कर सकते हैं। एक, चीन में सक्रिय कुछ ऐसे समूह हैं, जो उन्हें ये हथियार बेच देते हैं। पीएलए द्वारा अपडेट पाॅलिसी के तहत जो हथियार इस्तेमाल से बाहर हो जाते हैं, चीनी समूह इन्हें सस्ते दामों पर बेच देते हैं। दूसरा, वहां से हथियारों की बड़ी खेप सीधे म्यांमार के सीमावर्ती इलाके में पहुंच जाती है। वहां से भारतीय सीमा में अपनी गतिविधियां संचालित कर रहे विद्रोहियों को ये हथियार मिल जाते हैं। चूंकि म्यांमार बॉर्डर का कुछ इलाका पहाड़ी व घने जंगल वाला भी है, इसका फायदा विद्रोही खूब उठाते हैं।

चीनी आर्मी के ये घातक हथियार मिलें हैं-

The rebels have chinese weapons on India-Myanmar border

क्यूबीजेड-95-1 कारबाईन

क्यूबीजेड-95बी-1 5.8 एमएम कारबाइन

एजजे-8 रेड ऐरो एंटी टेंक मशीन गन

7.62 एमएम की पिस्टल

क्यूसीडब्लू-05-5.8 एमएम सुपरेस्ड सब-मशीन गन

क्यूबीजेड-3-5.8 एमएम असाॅल्ट राइफल

क्यूबीजेड-95-5.8 एमएम बुलपप असाॅल्ट राइफल

क्यूटीएस-11-5.8 एमएम राइफल

स्नाईपर गन क्यूबीयू-10-12.7 गुणा 108 एमएम

सीएस-एलआर4 7.62 गुणा 51एमएम

सीएस-एलआर-5.8 गुणा 42 एमएम 

केंद्र सरकार ने भी माना है कि म्यांमार बाॅर्डर पर सबसे ज्यादा घुसपैठ हो रही है-

The rebels have chinese weapons on India-Myanmar border

पिछले दिनों राज्यसभा में गृह राज्यमंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने एक सवाल के जवाब में बताया था कि म्यांमार बाॅर्डर पर सबसे ज्यादा घुसपैठ हो रही है। खास बात है कि अन्य देशों के साथ लगती सीमाओं पर घुसपैठ कम हो रही है। गत वर्ष जम्मू कश्मीर को छोड़कर भारत-पाक सीमा पर घुसपैठ के दस मामले सामने आए थे। दो आतंकी मारे गए थे।

भारत-बांग्लादेश की सीमा पर आतंकियों का कोई मामला सामने नहीं आया। भारत-चीन बॉर्डर भी इस मामले में शांत रहा। भारत-नेपाल सीमा पर एक मामला और भूटान बाॅर्डर पर कोई केस नहीं हुआ। म्यांमार बाॅर्डर पर विद्रोही या आतंकी समूहों की घुसपैठ के 99 मामले सामने आए थे। इनमें 9 आतंकी मारे गए, जबकि 130 को जिंदा पकड़ लिया गया था। इस साल की बात करें तो 26 जुलाई तक ऐसी 64 घटनाएं हुई हैं। इनमें तीन विद्रोही मारे गए, जबकि 66 को जिंदा पकड़े गए हैं।

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