कोरोना पर बैठक: पीएम मोदी ने दिए पांच मंत्र, कहा- इन्हें अपनाने से वायरस पर पा सकते हैं काबू
- देश में बीते 24 घंटे में कोरोना के 93,000 से ज्यादा मामले आए सामने
- प्रधानमंत्री मोदी की वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च-स्तरीय बैठक हुई
- बैठक के बाद कोरोना पर काबू पाने के लिए पीएम मोदी ने दिए पांच मंत्र
विस्तार
देश में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और रिकॉर्ड तोड़ आंकड़ों ने लोगों के साथ-साथ सरकार की भी नींद उड़ा दी है। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी की वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रविवार सुबह उच्च-स्तरीय बैठक हुई। इस बैठक में कोविड-19 से संबंधित मुद्दों और वैक्सीनेशन अभियान की समीक्षा पर चर्चा हुई।
इस बैठक में कैबिनेट सचिव, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव, स्वास्थ्य सचिव और डॉक्टर विनोद पॉल शामिल थे। इस बैठक के दौरान पीएम मोदी ने पांच मंत्र दिए। उन्होंने कहा कि परीक्षण, ट्रेसिंग, उपचार, सह-उचित व्यवहार और टीकाकरण की रणनीति यदि पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ लागू की जाए तो यह महामारी के प्रसार को रोकने में प्रभावी होगी। पीएम मोदी ने निर्देश दिया कि स्थायी रूप से कोरोना पर काबू पाने के लिए समुदाय की जागरूकता और इनकी भागीदारी सर्वोपरि है। इसके अलावा इस महामारी के प्रसार को रोकने के लिए जन आंदोलन जारी रखने की आवश्यकता है।
पीएम मोदी ने निर्देश दिया कि स्थायी रूप से कोरोना पर काबू पाने के लिए समुदाय की जागरूकता और इनकी भागीदारी सर्वोपरि है। इसके अलावा इस महामारी के प्रसार को रोकने के लिए जन आंदोलन जारी रखने की आवश्यकता है। वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने वैक्सीनेशन को लेकर वसुधैव कुटुम्बकम की भावना के तहत काम करने को कहा है। उन्होंने कहा कि घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करते हुए अन्य देशों की भी मदद की जानी चाहिए।
बीते 24 घंटे में 93,000 से ज्यादा मामले आए सामने
बीते 24 घंटों में रविवार को रिकॉर्ड 93 हजार से ज्यादा नए कोरोना के मरीज मिले हैं। वहीं कोरोना संक्रमण के चलते 500 से ज्यादा की जान चली गई है। एक दिन में मिलने वाले कोरोना संक्रमित मरीजों की बात करें, तो इससे पहले पिछले साल, 19 सितंबर को 92,574 नए केस मिले थे।
सात लाख के करीब पहुंचे सक्रिय मामले
स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में सक्रिय मामलों का ग्राफ बहुत तेजी से ऊपर जा रहा है। पिछले 24 घंटों में 60,048 कोरोना मरीज स्वस्थ होकर अपने घर लौट गए हैं, इसी के साथ देश में अब तक 1,16,29,289 मरीज कोरोना वायरस को मात देने में कामयाब हुए हैं। रोजाना के आधार पर दर्ज होने वाले नए कोरोना केसों की तुलना में ठीक होने वाले मरीजों की संख्या बेहद कम है। फिलहाल, देश में सक्रिय मामले बढ़कर 6,91,597 पहुंच गए हैं।
महाराष्ट्र, पंजाब और छत्तीसगढ़ के हालात पर चिंता जताई गई
बैठक के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि छह अप्रैल से 14 अप्रैल के बीच कोविड-19 महामारी के अनुरूप व्यवहार करने मसलन शत-प्रतिशत मास्क के उपयोग, व्यक्तिगत स्वचछता पर जोर देने के साथ ही कोविड बचाव संबंधी सावधानियों के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
बैठक में महाराष्ट्र, पंजाब और छत्तीसगढ़ के हालात पर चिंता जताई गई और इसके मद्देनजर प्रधानमंत्री ने इन राज्यों में जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों तथा चिकित्सकों की केन्द्रीय टीम भेजने का निर्देश दिया। महाराष्ट्र में अकेले देश में कोविड-19 के कुल मामलों के 57 प्रतिशत मामले हैं और राज्य में दैनिक नए मामलों का आंकड़ा 47,913 तक पहुंच गया है। महाराष्ट्र में इससे पहले जब कोरोना वायरस महामारी चरम पर थी, उसके मुकाबले यह आंकड़ा दोगुने से भी अधिक है।
पीएमओ के बयान के मुताबिक पंजाब ने पिछले 14 दिनों में देश में मामलों की कुल संख्या में 4.5 प्रतिशत का योगदान किया है जबकि मौतों की कुल संख्या में इसका योगदान 16.3 प्रतिशत रहा है। बयान के मुताबिक, ‘‘10 उच्च संख्या वाले राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश देश के कुल मामलों में 91.4 प्रतिशत और कुल मौतों में 90.9 प्रतिशत का योगदान दे रहे हैं।’’
पीएम ने अस्पतालों में बिस्तरों की उपलब्धता, जांच की उचित व्यवस्था के दिए निर्देश
प्रधानमंत्री ने इस समीक्षा बैठक के दौरान आने वाले दिनों में अस्पतालों में बिस्तरों की उपलब्धता, जांच की उचित व्यवस्था और समय रहते मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराना सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कोरोना वायरस से होने वाली मृत्यु दर में हर हालत में कमी लाने और इसके लिए आवश्यक स्वास्थ्य ढांचा बढ़ाने पर भी जोर दिया।
बयान के मुताबिक कोविड मामलों में हुई वृद्धि बचाव संबंधी उपायों के पालन ना करने, खासकर मास्क ना पहनने और दो गज की दूरी के नियम में कोताही के कारण हुई है। कोरोना संबंधी दिशा-निर्देशों के जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन की कमी को भी इसकी एक वजह बताया गया।
बैठक में बताया गया कि टीके के उत्पादक अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दे रहे हैं। साथ ही टीकों के संवर्धन के लिए अन्य घरेलू तथा विदेशी कंपनियों के साथ भी चर्चा की जा रही है। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से सक्रिय मामलों की खोज तथा निषिद्ध क्षेत्रों के प्रबंधन में सामुदायिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी के अतिरिक्त अन्य उपायों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने की आवश्यकता रेखांकित की।