फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   The central government violated the rules and used the GST cess itself instead of giving it to the states cag says

राज्यों के हिस्से का 47 हजार करोड़ न देकर केंद्र ने तोड़ा जीएसटी क्षतिपूर्ति कानून : कैग

Sat, 26 Sep 2020 05:14 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 26 Sep 2020 05:14 AM IST
विज्ञापन
The central government violated the rules and used the GST cess itself instead of giving it to the states cag says
सांकेतिक तस्वीर

कैग ने केंद्र सरकार द्वारा नियमों का उल्लंघन करते हुए जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर (सेस) के 47,272 करोड़ रुपये कब्जा लेने की बात कही है। नियमों के हिसाब से यह रकम जीएसटी लागू होने से घटे राजस्व की पूर्ति के लिए राज्यों में बंटनी चाहिए थी, लेकिन केंद्र सरकार ने इस रकम को अपने ही पास रख लिया। 

विज्ञापन


सरकारी खातों की अपनी ऑडिट रिपोर्ट में महालेखा परीक्षक व नियंत्रक (कैग) ने वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) लागू होने के पहले दो साल में जुटाई गई इस रकम को अलग से चिह्नित करते हुए टिप्पणी लिखी है।
विज्ञापन



कैग के मुताबिक, 2017 से जीएसटी लागू होने के कारण राजस्व हानि के बदले राज्यों को मुआवजा देने के लिए नॉन-लैप्सेबल जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर संग्रह निधि में राशि जमा की जानी थी। लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं करते हुए जीएसटी क्षतिपूर्ति कानून का उल्लंघन किया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


कैग के मुताबिक, वित्त वर्ष 2017-18 में जीएसटी सेस के तौर पर 62,612 करोड़ रुपये जुटाए गए थे, लेकिन इनमें से 56,146 करोड़ रुपये ही क्षतिपूर्ति उपकर संग्रह निधि में स्थानांतरित किए गए। इसके बाद वित्त वर्ष 2018-19 में भी 95,081 करोड़ रुपये में से 54,275 करोड़ रुपये की रकम ही निधि में जमा कराई गई।

2017-18 के 6,466 करोड़ रुपये और 2018-19 में 40,806 करोड़ रुपये की रकम को सरकार ने अपने खातों में ‘अन्य उद्देश्य’ के नाम से दिखाया है। इससे उस साल सरकार के खाते में राजस्व प्राप्ति की अधिकता और राजकोषीय घाटे में कमी दिखाई दी।

कैग के मुताबिक, केंद्र और राज्यों के बीच चल रहा है ‘सेस क्षतिपूर्ति विवाद’
कैग की इस रिपोर्ट से केंद्र और राज्यों के बीच सेस क्षतिपूर्ति को लेकर चल रहा विवाद अब और ज्यादा तेज हो सकता है। राज्यों को पिछले वित्त वर्ष से वादे के अनुरूप मुआवजा जीएसटी से नहीं मिल सका है।

केंद्र सरकार ने इसके लिए आर्थिक मंदी का हवाला देते हुए पर्याप्त धन जमा नहीं होने का तर्क दिया है और इस राजस्व कमी को पूरा करने के लिए राज्यों को बाजार से कर्ज उगाहने की सलाह दी है। लेकिन कांग्रेस, वाम, तृणमूल और आप जैसे विपक्षी दलों की सत्ता वाले राज्यों ने केंद्र की इस सलाह का विरोध किया है। ऐसे में कैग की रिपोर्ट के बाद ये राज्य हल्ला मचा सकते हैं।

वित्त मंत्री के संसद को दी जानकारी के विपरीत बात
कैग रिपोर्ट में दिए गए तथ्य वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की तरफ से पिछले सप्ताह संसद में दिए गए जवाब के भी विपरीत है, जिसमें कहा गया था कि राज्यों को राजस्व कमी की क्षतिपूर्ति के लिए कंसोल्डेटड फंड ऑफ इंडिया (सीएफआई) के इस्तेमाल का कानून में कोई प्रावधान नहीं है।


कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वित्त वर्ष 2017-18 व 2018-19 में राज्यों की क्षतिपूर्ति के लिए जुटाए गए उपकर की बची हुई 47,272 करोड़ रुपये की रकम अब भी सीएफआई में उन उद्देश्यों के लिए मौजूद है, जिनका प्रावधान कानून में किया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed