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बाढ़ की सटीक भविष्यवाणी कर लोगों की जान बचाएगा TERI का ये खास सिस्टम, जानिए कैसे करेगा काम
Mon, 17 Aug 2020 07:42 PM IST
Harendra Chaudhary
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Mon, 17 Aug 2020 07:42 PM IST
सार
- शहर में होने वाली वर्षा, जल निकास प्रबंधन की सटीक जानकारी लेकर बाढ़ की पूर्व सूचना देगा FEWS,
- वेबसाइट पर ली जा सकेगी जानकारी, बाद में एप भी होगा विकसित
- अभी गुवाहाटी के लिए हो रहा ट्रायल, सफल रहने पर पूरे देश में होगा लांच, अलर्टस भेजकर बचाएगा लोगों की जान
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Gorakhpur Flood
- फोटो : For Refernce Only
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विस्तार
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के अनुसार इस वर्ष बाढ़ के कारण 868 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। बिहार में बाढ़ से अब तक 25 लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य के दर्जनों जिलों की लगभग 78 लाख आबादी इस समय बाढ़ की भयंकर विभीषिका झेल रही है। असम में बाढ़ के कारण 136 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
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बाढ़ के कारण हजारों करोड़ की संपत्ति को नुकसान पहुंच चुका है। पिछले वर्ष भी 12 अगस्त तक बाढ़ के कारण देश में 908 लोगों की मौत हो गई थी।
बाढ़ की इस स्थिति को देखते हुए एक ऐसे सिस्टम की जरूरत महसूस की जा सकती है, जो समय रहते लोगों को इस बात की जानकारी दे सके कि उनके क्षेत्र में अगले दो-तीन दिन में बाढ़ की स्थिति कैसी रह सकती है। ऐसा सिस्टम होने से न सिर्फ लोगों की जान बचाई जा सकेगी, बल्कि संपत्ति के नुकसान को भी काफी कम किया जा सकेगा।
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राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग से टेरी ने एक ऐसा ही सिस्टम विकसित किया है, जो लोगों को उनके क्षेत्र में बाढ़ आने की पूर्व सूचना दे सकेगा। इसे ‘फ्लड अर्ली वार्निंग सिस्टम’ (FEWS) का नाम दिया गया है।
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यह सिस्टम भारतीय मौसम विभाग से प्राप्त संभावित वर्षा के पूर्वानुमान, किसी शहर की भौगोलिक स्थिति, शहर के नजदीक बहने वाली नदी की जलधारण क्षमता, शहर की जल निकास की योजना और इसकी नालियों-नालों की साफ-सफाई पर हुए काम के समेकित आकलन पर काम करता है।
इस प्रोजेक्ट पर काम करने वाले विशेषज्ञ प्रसून सिंह ने अमर उजाला को बताया कि किसी भी जगह आने वाली बाढ़ कई चीजों पर निर्भर करती है। जैसे उस क्षेत्र में किसी निश्चित समय में कितनी बारिश होती है और उस वर्षा जल के निकासी की क्या व्यवस्था है। शहर के पास बहने वाली नदी की जलधारण क्षमता क्या है, और वर्षा जल के निकास के लिए शहर का ढांचा कितना विकसित किया गया है।
इस ऑनलाइन सेल्फ मॉनिटरिंग सिस्टम में वर्षा होने की संभावना की जानकारी भारतीय मौसम विभाग से ली जाती है। साथ ही इस बात का आकलन किया जाता है कि शहर में वर्षा जल के निकलने के लिए कितना ढांचा विकसित किया गया है।
साथ ही नालियों और नालों की साफ-सफाई पर कितना काम हुआ है। इन सबकी गणना करने के बाद सिस्टम स्वयं यह बता सकता है कि अगले दो-तीन दिनों में किसी क्षेत्र में बाढ़ की क्या स्थिति रह सकती है।
प्रसून सिंह के मुताबिक इसके लिए हर साल नगर निगमों की नालों की सफाई के वास्तविक आंकड़ों की जानकारी चाहिए होती है, जिसे संबंधित विभागों से प्राप्त किया जाएगा। अभी इस सिस्टम का ट्रायल गोवाहाटी के लिए किया गया है। एक-दो वर्षा में इसकी सटीकता पर ज्यादा बेहतर काम करने के बाद इसे पूरे देश के स्तर पर लांच किया जाएगा।
सिस्टम से किसी भी इलाके में बाढ़ की जानकारी अलर्ट्स के माध्यम से लोगों तक पहुंचाई जा सकेगी। बारिश के कारण कई इलाकों में पानी भर जाता है, जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति पैदा हो जाती है, लेकिन दावा है कि इस सिस्टम के उपयोग से ट्रैफिक रूट डायवर्ट कर इससे निजात पाई जा सकेगी।