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TEDxDelhi में लीक से हटकर सोच रखने वालों ने साझा किए अनुभव, जानिए किसने क्या कहा?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 16 Apr 2018 10:47 AM IST
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दुनियाभर में मशहूर TEDx व्याख्यान श्रृंखला के तहत दिल्ली में हुए इस आयोजन में जाने-माने लीडर्स ने अपनी बात रखी
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दुनियाभर में मशहूर TEDx व्याख्यान श्रृंखला के तहत दिल्ली में हुए इस आयोजन में जाने-माने लीडर्स ने अपनी बात रखी। आईआईटी दिल्ली के डोगरा हॉल में आयोजित TEDxDelhi चैप्टर में अमर उजाला मीडिया पार्टनर है।
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'मानवता का भविष्य' विषय पर अलग-अलग क्षेत्र से आए लीक से हटकर सोच रखने वाले लोगों और यूथ आइकंस ने अपने ऐसे अनुभव साझा किए, जिन्होंने उनकी जिंदगी बदलकर रख दी। TEDxDelhi को amarujala.com वेबसाइट और facebook.com/Amarujala/ पर Live telecast भी किया गया।
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63 मिलियन युवा लिखेंगे न्यू इंडिया की नई कहानी
शुरुआत के पहले सेशन में इनवेस्ट इंडिया के एमडी और सीईओ दीपक वागला ने बताया कि आने वाले 2019 चुनाव में 133 मिलियन वोटर फर्स्ट टाइम वोटर होंगे जिसमें से 97 मिलियन गांव से ताल्लुक रखने वाले होंगे तो वहीं 63 मिलियन युवा वोटर होंगे और यही न्यू इंडिया की नई कहानी देश के सामने रखेंगे।
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लड़कियों को यौन शोषण से बचाना होगा
इसके बाद एम्पावर, इंडिया वरिष्ठ प्रोग्राम अधिकारी निशा धवन ने बताया कि आज भी देश में लड़कियों को आगे नहीं बढ़ने दिया जा रहा है। जबकि लड़को को खुली आजादी है। हमें लड़कियों को केंद्र में रखना होगा। लड़कियों को यौन शोषण से बचाना होगा। लड़कियों को पॉवर देनी होगी क्योंकि लड़कियां किसी से कमजोर नहीं।
इनोवेशन सबसे पहले, मार्क्स उसके बाद
परवरिश इंस्टीट्यूट ऑफ पैरेंटिंग के सीईओ सुशांत कालरा ने कहा कि ये सच है कि परीक्षाओं में हमारे मार्क्स ही हमारे भविष्य की दिशा और दशा तय करते हैं। एक तरफ हम अपने बच्चों को कहते हैं कि मार्क्स जरूरी हैं लेकिन कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां इनोवेशन पहली प्राथमिकता मानी जाती है। आजकल अभिभावक अपने बच्चों के कम नंबर आने से निराशा होते हैं, लेकिन सच तो यह है कि 2030 जो कि इनोवेशन के लिहाज से एक ऐसा समय होगा जहां इंडस्ट्री को स्किलस की जरूरत होगी।
डांस एक ऐसी भाषा है जो बहुत कुछ समझाती है
कथक का ढांचा विषय पर कथक प्रतिपादक दिव्या गोस्वामी दीक्षित ने अपने विचार रखें। उन्होंने कहा कि हम अपने भविष्य को लेकर इतने परेशान रहते हैं कि हम वर्तमान की खुशी को ठीक से महसूस नहीं कर पाते। डांस एक ऐसी भाषा है जो हमें बहुत कुछ समझाती है। मेरे लिए तो यह एक मेडिटेशन है। मेरा मानना है कि बिना डांसर के कोई डांस नहीं हो सकता। डांस एक मल्टी टास्किंग कला है जिसमें हमें कई भावों को साथ में एक ही समय में परोसना होता है।
इनोवेशन सबसे पहले, मार्क्स उसके बाद
परवरिश इंस्टीट्यूट ऑफ पैरेंटिंग के सीईओ सुशांत कालरा ने कहा कि ये सच है कि परीक्षाओं में हमारे मार्क्स ही हमारे भविष्य की दिशा और दशा तय करते हैं। एक तरफ हम अपने बच्चों को कहते हैं कि मार्क्स जरूरी हैं लेकिन कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां इनोवेशन पहली प्राथमिकता मानी जाती है। आजकल अभिभावक अपने बच्चों के कम नंबर आने से निराशा होते हैं, लेकिन सच तो यह है कि 2030 जो कि इनोवेशन के लिहाज से एक ऐसा समय होगा जहां इंडस्ट्री को स्किलस की जरूरत होगी।
डांस एक ऐसी भाषा है जो बहुत कुछ समझाती है
कथक का ढांचा विषय पर कथक प्रतिपादक दिव्या गोस्वामी दीक्षित ने अपने विचार रखें। उन्होंने कहा कि हम अपने भविष्य को लेकर इतने परेशान रहते हैं कि हम वर्तमान की खुशी को ठीक से महसूस नहीं कर पाते। डांस एक ऐसी भाषा है जो हमें बहुत कुछ समझाती है। मेरे लिए तो यह एक मेडिटेशन है। मेरा मानना है कि बिना डांसर के कोई डांस नहीं हो सकता। डांस एक मल्टी टास्किंग कला है जिसमें हमें कई भावों को साथ में एक ही समय में परोसना होता है।
मानसिक बीमारी है ऑटिज्म
ऑटिज्म सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की संस्थापक डॉक्टर अर्चना नायर ने 'ऑटिज्म एक महामारी' विषय पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि ऑटिज्म कोई फिजिकल बीमारी नहीं बल्कि मानसिक बीमारी है जिसमें हम अकेलापन महसूस करने लगते हैं। लेकिन आज हमारे समाज में लोगों के बीच इस बीमारी पर बहुत कम जानकारी है। यही नहीं देश में बहुत कम संगठन ऐसे हैं जो इस बीमारी के बारे में लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
नेत्रहीनों के लिए डिवाइस
आईआईटी दिल्ली में प्रोफेसर एम बालाकृष्णन ने कहा 'नेत्रहीनों की सुरक्षा और एजुकेशन पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। हमारे पास ऐसी डिवाइस होनी चाहिए जिससे नेत्रहीनों को यह पता चल सके कि रास्ते में कोई व्यवधान तो नहीं। हमने इसपर काम किया और ऐसी डिवाइस बनाई। हमें कई बार देखने को मिलता है जब किसी नेत्रहीन को बस पकड़नी होती है तो उसे कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इन तकलीफों को दूर करने के लिए भी हमने डिवाइस तैयार की है। इन डिवाइस से सबसे बड़ा फायदा यह है कि इस तरह की मशीनों से नेत्रहीनों की सुरक्षा पुख्ता होती हैं और उनका जीवन आसान होता है।
बेहतर हो सकते हैं भारत-पाकिस्तान के रिश्ते
शांति के लिए काम करने वाले एक्टिवीस्ट समीर गुप्ता ने भारत पाकिस्तान के रिश्तों पर चिंता व्यक्त की। अपने अनुभवों के आधार पर उन्होंने कहा कि 'पड़ोसी देश से भारत के रिश्ते आने वाले समय में बेहतर हो सकते हैं। हमें पाकिस्तान के साथ शांति स्थापित करने के लिए बातचीत करनी होगी। लेकिन इसके लिए हमें सही रास्ते को चुनना होगा।
नेत्रहीनों के लिए डिवाइस
आईआईटी दिल्ली में प्रोफेसर एम बालाकृष्णन ने कहा 'नेत्रहीनों की सुरक्षा और एजुकेशन पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। हमारे पास ऐसी डिवाइस होनी चाहिए जिससे नेत्रहीनों को यह पता चल सके कि रास्ते में कोई व्यवधान तो नहीं। हमने इसपर काम किया और ऐसी डिवाइस बनाई। हमें कई बार देखने को मिलता है जब किसी नेत्रहीन को बस पकड़नी होती है तो उसे कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इन तकलीफों को दूर करने के लिए भी हमने डिवाइस तैयार की है। इन डिवाइस से सबसे बड़ा फायदा यह है कि इस तरह की मशीनों से नेत्रहीनों की सुरक्षा पुख्ता होती हैं और उनका जीवन आसान होता है।
बेहतर हो सकते हैं भारत-पाकिस्तान के रिश्ते
शांति के लिए काम करने वाले एक्टिवीस्ट समीर गुप्ता ने भारत पाकिस्तान के रिश्तों पर चिंता व्यक्त की। अपने अनुभवों के आधार पर उन्होंने कहा कि 'पड़ोसी देश से भारत के रिश्ते आने वाले समय में बेहतर हो सकते हैं। हमें पाकिस्तान के साथ शांति स्थापित करने के लिए बातचीत करनी होगी। लेकिन इसके लिए हमें सही रास्ते को चुनना होगा।
डिजिटल वर्ल्ड के जरिए बच्चों को बेहतर एजुकेशन
भारत में यूनिसेफ की प्रतिनिधि डॉक्टर यास्मिन ए हक ने कहा कि '1.1 बिलियन स्कूल जाने वाले बच्चों में से ज्यादात्तर बच्चे प्राइमरी शिक्षा भी हासिल नहीं कर पा रहे हैं। डिजिटल वर्ल्ड के जरिए हम बच्चों को बेहतर एजुकेशन दे सकते हैं। भारत में पढ़ाई पूरी करने से पहले ही लड़कियों की शादी करवा दी जाती है, लेकिन हमें बदलाव लाना होगा और यह बदलाव सिर्फ हमारे जरिए ही आएगा।'
पायलट बनना चाहता था, डायरेक्टर बन गया
बड़े पर्दे की फिल्म बनाने का लोकतांत्रीकरण विषय पर सुपरहिट मलयालम फिल्म आनंदम के डायरेक्टर और स्क्रिपट राइटर गणेश राज ने कहा कि 'इंटरनेट के जरिए मैं फिल्म इंडस्ट्री में अपने सपनों को साकार करने में कामयाब हुआ क्योंकि मेरा फिल्म इंडस्ट्री में कोई भी खास नहीं था। मैं एक साधारण परिवार से था और मेरा सपना पायलट बनने का था। लेकिन मैंने अपने करियर की शुरूआत शॉर्ट फिल्में बनाकर की। मैंने वीकिपीडिया के जरिए फिल्म बनाने की बारीकियां सीखीं। मैंने अपनी पहली शॉर्ट फिल्म बनाकर यूट्यूब पर डाली थी तो उसे 300 लोगों ने देखा था इसके 6 महीने बाद जब मैंने अपनी दूसरी शॉर्ट फिल्म यूट्यूब पर डाली तो इसे 1 हजार से ज्यादा लोगों ने देखा। और धीरे-धीरे मैं इसी तरह आगे बढ़ता चला गया और एक दिन मलायलम फिल्म इंडस्ट्री के एक बड़े डायरेक्टर ने मुझे फोन कर मेरे काम की तारीफ की और मुझे असिस्टेंड डायरेक्टर बना लिया।'
ब्लैक बोर्ड ही छात्रों के लिए असली विलेन
मैथ्स की सिरदर्दी को चुटकी में खत्म करने का दावा करने वाले क्यूमैथ के संस्थापक और सीईओ मनन खुर्मा ने बताया कि 'बीते 15 साल में एक टीचर के रूप में मैंने महसूस किया है कि मैथ्स सिर्फ एक विषय नहीं बल्कि थिंकिंग और प्रॉब्लम सॉल्विंग है। ब्लैक बोर्ड ही छात्रों के लिए असली विलेन है क्योंकि यह छात्र को आगे सोचने से रोकता है।
सच तो यह है हमें मैथ्स को रीजनिंग क्वेश्चन के तरह ही सॉल्व करना होगा। अगर हम ऐसा नहीं करते हैं तो हमें परीक्षाओं में इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है। हम पजल और गेम्स के जरिए मैथ्स की कठिनाओं को आसानी से सुलझा सकते हैं जैसा की मैं अपनी कक्षाओं में करता हूं। हमारी कक्षाओं में बच्चे पुराने उबाऊ और लीक से हटकर अन्य माध्यमों से मैथ्स की कठिनाओं को दूर करते हैं बल्कि वह इस विषय में बेहतर भी करते हैं।
पायलट बनना चाहता था, डायरेक्टर बन गया
बड़े पर्दे की फिल्म बनाने का लोकतांत्रीकरण विषय पर सुपरहिट मलयालम फिल्म आनंदम के डायरेक्टर और स्क्रिपट राइटर गणेश राज ने कहा कि 'इंटरनेट के जरिए मैं फिल्म इंडस्ट्री में अपने सपनों को साकार करने में कामयाब हुआ क्योंकि मेरा फिल्म इंडस्ट्री में कोई भी खास नहीं था। मैं एक साधारण परिवार से था और मेरा सपना पायलट बनने का था। लेकिन मैंने अपने करियर की शुरूआत शॉर्ट फिल्में बनाकर की। मैंने वीकिपीडिया के जरिए फिल्म बनाने की बारीकियां सीखीं। मैंने अपनी पहली शॉर्ट फिल्म बनाकर यूट्यूब पर डाली थी तो उसे 300 लोगों ने देखा था इसके 6 महीने बाद जब मैंने अपनी दूसरी शॉर्ट फिल्म यूट्यूब पर डाली तो इसे 1 हजार से ज्यादा लोगों ने देखा। और धीरे-धीरे मैं इसी तरह आगे बढ़ता चला गया और एक दिन मलायलम फिल्म इंडस्ट्री के एक बड़े डायरेक्टर ने मुझे फोन कर मेरे काम की तारीफ की और मुझे असिस्टेंड डायरेक्टर बना लिया।'
ब्लैक बोर्ड ही छात्रों के लिए असली विलेन
मैथ्स की सिरदर्दी को चुटकी में खत्म करने का दावा करने वाले क्यूमैथ के संस्थापक और सीईओ मनन खुर्मा ने बताया कि 'बीते 15 साल में एक टीचर के रूप में मैंने महसूस किया है कि मैथ्स सिर्फ एक विषय नहीं बल्कि थिंकिंग और प्रॉब्लम सॉल्विंग है। ब्लैक बोर्ड ही छात्रों के लिए असली विलेन है क्योंकि यह छात्र को आगे सोचने से रोकता है।
सच तो यह है हमें मैथ्स को रीजनिंग क्वेश्चन के तरह ही सॉल्व करना होगा। अगर हम ऐसा नहीं करते हैं तो हमें परीक्षाओं में इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है। हम पजल और गेम्स के जरिए मैथ्स की कठिनाओं को आसानी से सुलझा सकते हैं जैसा की मैं अपनी कक्षाओं में करता हूं। हमारी कक्षाओं में बच्चे पुराने उबाऊ और लीक से हटकर अन्य माध्यमों से मैथ्स की कठिनाओं को दूर करते हैं बल्कि वह इस विषय में बेहतर भी करते हैं।